हिंदू धर्म में शादी को केवल सामाजिक परंपरा नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण धार्मिक संस्कार का अभिन्न अंग भी माना गया है. इसलिए विवाह से जुड़े कई नियम और परंपराएं भी प्रचलित हैं.
इन्हीं परंपराओं में एक मान्यता यह भी है कि, बड़े भाई के रहते हुए छोटे भाई की शादी पहले नहीं करना चाहिए. इस विषय पर संत और कथावाचक श्री राजेंद्र दास जी महाराज ने अपने प्रवचन में विस्तार से बताया है.
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छोटे भाई की शादी पहले क्यों नहीं करनी चाहिए?
श्री राजेंद्रदास जी महाराज के मुताबिक, यदि किसी परिवार में बड़े भाई की शादी नहीं हुई है और उससे पहले छोटा भाई शादी कर लेता है, तो शास्त्रों के मुताबिक, छोटे भाई पर परिवेत्ता दोष लग जाता है.
धार्मिक मान्यताओं में इस दोष को बेहद ही निंदनीय माना गया है. कहा जाता है कि, यह दोष व्यक्ति के जीवन में तमाम तरह की बाधाएं और नकारात्मक परिणाम ला सकता है.
परिवेत्ता दोष क्यों हैं गंभीर?
धार्मिक नजरिए के लिहाज से बड़े भाई को परिवार में खास स्थान दिया गया है. परंपराओं के मुताबिक, विवाह जैसे अहम संस्कार में भी बड़े भाई को प्राथमिकता दी जाती है.
यदि इस क्रम को तोड़ा जाता है, तो इसे शास्त्रों के नियमों के खिलाफ माना जाता है. इसी वजह से छोटे भाई द्वारा पहले शादी करने को परिवेत्ता दोष से जोड़ा जाता है.
परिवेत्ता दोष कब नहीं लगता है?
हालांकि इस नियम के कुछ अपवाद भी बताए गए हैं. श्रीराजेंद्रदासजी महाराज के मुताबिक, यदि बड़ा भाई खुद संन्यास ग्रहण कर ले या नैष्ठिक ब्रह्मचर्य का पालन करने की प्रतिज्ञा कर लें और साफ तौर से कह दे कि, वह जीवनभर विवाह नहीं करेगा, तो ऐसी स्थिति में छोटे भाई के शादी करने पर किसी भी तरह का दोष नहीं लगता है.
ऐसी परिस्थिति में यह भी माना जाता है कि, बड़े भाई ने खुद विवाह से दूरी बना ली है, इसलिए छोटे भाई के शादी करने में किसी भी तरह की धार्मिक बाधा नहीं रहती है.
बड़े भाई को लग सकता है दोष?
प्रवचन के दौरान बताया गया कि, यदि पहले छोटे भाई की शादी हो जाए और उसके बाद बड़े भाई की शादी हो, तो शास्त्रों के मुताबिक दोनों पर दोष लगने की बात कही जाती है.
इसी वजह से पारंपरिक रूप से परिवारों में इस बात का खास ध्यान रखा जाता था कि, विवाह का क्रम बड़े से छोटे की ओर ही हो.
परंपरा और आधुनिक सोच क्या कहती है?
आज के समय में ज्यादातर लोग इन बातों को धार्मिक आस्था और परंपरा से जोड़कर देखते हैं, जबकि कुछ लोग इसे सामाजिक व्यवस्था का भाग मानते हैं.
फिर भी भारतीय संस्कृति में विवाह से जुड़े ऐसे नियम लंबे समय से चले आ रहे हैं, जिनका उद्देश्य परिवार में संतुलन और अनुशासन बनाए रखने के लिए जाना जाता है.
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