Sheetala Ashtami Vrat Katha in Hindi: शीतला अष्टमी या बसोड़ा हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण पर्व है, जोकि होली के बाद और चैत्र नवरात्रि के बीच में मनाया जाता है. इस दिन शीतला माता की पूजा होती है. खास बात यह है कि, इस दिन घरों में ताजा भोजन नहीं बनती, बल्कि परिवार के सभी लोग एक दिन पहले पकाया हुआ बासी भोजन खाते हैं.
माता शीतला को भी बासी भोजन का भोग लगाया जाता है, जिस कारण इस पर्व को बसोड़ा भी कहा जाता है. ऐसी मान्यता है कि, बसोड़ा पर बासी और ठंडा भोजन प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से माता शीतला रोग-व्याधि और संक्रमण आदि से लोगों की रक्षा करती हैं.
बसोड़ा कब है (Basoda 2026 Date)
पंचांग के अनुसार, शीतला अष्टमी या बसोड़ा का पर्व हर साल चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर मनाया जाता है. इस वर्ष बसोड़ा बुधवार 11 मार्च 2026 को पड़ रही है. पूजा के लिए सुबह 06:11 से शाम 06:05 तक का समय शुभ रहेगा. लेकिन भक्त इस बात का ध्यान रखें कि, बसोड़ा पूजा में माता शीतला से जुड़ी व्रत कथा का पाठ जरूर करें, क्योंकि इसके बिना पूजा पूरी नहीं मानी जाती है.
शीतला अष्टमी व्रत कथा
कथा के अनुसार, एक बार माता शीतला ने विचार किया कि, पृथ्वी जाकर देखना चाहिए कि लोग मेरी पूजा-उपासना करते हैं या नहीं. शीतला माता जब धरती पर आईं तो उन्होंने देखा कि, उनका कोई मंदिर स्थापित नहीं है और कोई भक्त विधिवत उनकी पूजा-उपासना भी नहीं करता है. शीतला माता गांव में भ्रमण करने लगी. गांव की गली में भ्रमण करते हुए किसी ने उनके ऊपर उबले चावल का गर्म पानी फेंक किया, जिससे उनके शरीर में तीव्र जलन होने लगी और फफोले भी पड़ गए. जलन और पीड़ा से व्याकुल होकर शीतला माता गांव में सहायता के लिए भटकने लगी, लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की और लोगों ने अनदेखा कर दिया.
तब एक गरीब कुम्हारिन ने माता की दशा देखी. उसने दया भाव से माता को ठंडी बासी रोटी और दही खिलाई. ठंडा भोजन ग्रहण कर उनके शरीर की जलन कम हो गई. कुम्हारिन के सेवा-भाव से प्रसन्न होकर माता शीतला ने दर्शन दिया और साथ ही उसकी दरिद्रता भी समाप्त कर दी. माता शीतला ने कहा कि, होली के बाद आने वाली अष्टमी को जो भक्त श्रद्धापूर्वक मेरी पूजा करेगा और ठंडा व बासी भोजन का भोग लगाएगा, उसके घर में कभी धन-धान्य अभाव नहीं रहेगा. इसी विश्वास के आधार पर हर साल चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी का पर्व मनाया जाता है.
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