{“_id”:”69c2108e27905a7db70fad4f”,”slug”:”parents-hit-by-overpriced-books-and-notebooks-2026-03-24″,”type”:”feature-story”,”status”:”publish”,”title_hn”:”UP: इतिहास की किताब 560 रुपये, अंग्रेजी की बुक हुई इतनी महंगी; बच्चों के नए कोर्स का रेट उड़ा देगा होश”,”category”:{“title”:”City & states”,”title_hn”:”शहर और राज्य”,”slug”:”city-and-states”}}
किताबों के साथ कॉपियों के नाम पर भी अभिभावकों से ज्यादा कीमत वसूली जा रही है, कम पन्नों की कॉपियां महंगे दाम पर बेची जा रही हैं। स्कूलों की मिलीभगत से तय दुकानों से ही खरीदारी की मजबूरी ने अभिभावकों पर आर्थिक बोझ और बढ़ा दिया है।
माहेश्वरी बुक डिपो पर प्रदर्शन किया – फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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बच्चों को पढ़ाना आसान नहीं है। एक ओर आसमान छूती किताबों की कीमतें अभिभावकों को दिन में तारे दिखा रहीं हैं तो वहीं दूसरी ओर कॉपियों के नाम पर भी अभिभावकों की जेब पर डाका डाला जा रहा है। अधिकतम खुदरा मूल्य पर किताबों की बिक्री के साथ पुस्तक विक्रेता कॉपियों के दाम और पन्नों में भी कालाबाजारी कर रहे हैं। कम पन्ने की कॉपियों को अधिक कीमत का टैग लगाकर बेचा जा रहा है, जिससे अभिभावकों पर दोहरी मार पड़ रही है।
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सोमवार से शहर के कई अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में नए सत्र की पढ़ाई शुरू हो गई। इसी के साथ अभिभावकों के लिए तय दुकान से किताब खरीदना भी मजबूरी बन गया है। माहेश्वरी बुक डिपो से किताब-कॉपियां खरीदकर लाए अभिभावक ने अमर उजाला को कॉपियों की रेट लिस्ट का फोटो भेजा। 200 पेज की कॉपी के अभिभावक से 90 रुपये वसूले गए। घर पहुंचने पर जब किताब-कॉपी के सेट को खोला गया तो उसमें कॉपी पर रेट स्लिप ऊपर से लगाई गई थी। जब इस रेट स्लिप को हटाया गया तो पेजों की संख्या 164 और मूल्य 70 रुपये अंकित था। इस प्रकार अभिभावकों की जेब पर कीमत बढ़ा और पन्ने कम कर डबल डाका डाला जा रहा है।