मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच ईरान ने ऐसी रणनीति अपनाई है, जिसका असर सिर्फ युद्ध तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है. इजरायल के साथ जारी संघर्ष के दौरान ईरान ने सीधे सैन्य ठिकानों के बजाय उन जगहों को निशाना बनाया है, जहां से पूरी दुनिया को तेल और गैस की सप्लाई होती है.
ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को भी दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया है. यह समुद्री रास्ता बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है. इसके साथ ही रस लाफान इंडस्ट्रीज शहर पर हमला किया गया, जो कतर में स्थित दुनिया का सबसे बड़ा गैस केंद्र है. यहां से दुनिया की करीब 20 फीसदी गैस सप्लाई होती है. हमले में कई मिसाइलें दागी गईं, जिनमें से कुछ को रोका गया लेकिन एक मिसाइल सीधे प्लांट पर लगी, जिससे बड़ा नुकसान हुआ. यहां मौजूद शेल का Pearl GTL प्लांट भी बुरी तरह प्रभावित हुआ, जो गैस को तरल ईंधन में बदलता है.
हबशान गैस कॉम्प्लेक्स बंद
संयुक्त अरब अमीरात के हबशान गैस कॉम्प्लेक्स को भी बंद करना पड़ा. यह प्लांट रोज करीब 6.1 अरब क्यूबिक फीट गैस बनाता है और यूएई की लगभग 60 फीसदी जरूरत पूरी करता है. इस गैस का इस्तेमाल बिजली बनाने, पानी साफ करने और बड़े उद्योगों में होता है. सऊदी अरब में भी हमले की कोशिश की गई. रियाद की तरफ बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं और ड्रोन से पूर्वी इलाके की रिफाइनरी को निशाना बनाने की कोशिश हुई. यहां रस तनुरा जैसी बड़ी रिफाइनरी है, जो रोज करीब 5.5 लाख बैरल तेल को प्रोसेस करती है और यहां से पेट्रोल, डीजल और दूसरे ईंधन कई देशों तक भेजे जाते हैं.
दुनिया भर में तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ी
इन हमलों के बाद दुनिया भर में तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ गईं. कच्चे तेल की कीमत 112 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई. अमेरिका में डीजल 5 डॉलर प्रति गैलन से ज्यादा हो गया, जो 2022 के बाद सबसे ज्यादा है. यूरोप में गैस की कीमतें करीब 70 फीसदी बढ़ गईं और एशिया में LNG की कीमतों में लगभग 88 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई. इन हमलों का असर सिर्फ इन देशों तक सीमित नहीं है. चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश इन गैस सप्लाई पर काफी निर्भर हैं.
भारत अपनी गैस जरूरत का बड़ा हिस्सा कतर से लेता है, इसलिए इस संकट का असर यहां भी महसूस किया जा सकता है. कई देशों में गैस का भंडार बहुत कम बचा है. कुछ जगहों पर केवल 9 से 11 दिन का ही स्टॉक बचा है. पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों की स्थिति और भी ज्यादा मुश्किल हो सकती है, क्योंकि उनके पास विकल्प कम हैं.
पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई के बड़े केंद्र पर हमला
ईरान ने जिन जगहों को निशाना बनाया है, वे सिर्फ स्थानीय प्लांट नहीं हैं, बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई के बड़े केंद्र हैं. इन पर हमला होने का मतलब है कि इसका असर हर देश, हर उद्योग और आम लोगों तक पहुंचता है. अगर यह स्थिति लंबे समय तक जारी रहती है तो महंगाई और बढ़ सकती है और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर इसका गहरा असर पड़ेगा.










