उत्तर प्रदेश में बाराबंकी से बहराइच तक 101.515 किलोमीटर लंबे चार लेन के प्रवेश और निकास नियंत्रित राष्ट्रीय राजमार्ग-927 के निर्माण को मंजूरी मिली है. इस परियोजना का निर्माण पीपीपी मोड के तहत किया जाएगा. केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने 6969.04 करोड़ रुपये की लागत से इस सड़क के निर्माण का फैसला किया है.
राष्ट्रीय राजमार्ग-927 के बाराबंकी-बहराइच हिस्से के सुधार से बाराबंकी और बहराइच के शहरी इलाकों में सड़क की बड़ी खामियों, तीखे मोड़ों और ट्रैफिक जाम की समस्या कम होगी. सेवा सड़कों के साथ नियंत्रित प्रवेश वाले चार लेन राजमार्ग के रूप में तैयार होने वाली यह परियोजना रिहायशी इलाकों को बाईपास का विकल्प देगी, जिससे वाहनों की औसत रफ्तार बढ़ेगी और यात्रा समय में करीब एक घंटे की कमी आएगी. इससे सड़क सुरक्षा बेहतर होगी, ईंधन की बचत होगी और वाहनों के संचालन का खर्च भी कम होगा. साथ ही इलाके में आवाजाही आसान होगी और सामाजिक-आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा.
यह परियोजना उत्तर प्रदेश के कई अहम आर्थिक, सामाजिक और परिवहन केंद्रों को बेहतर तरीके से जोड़ेगी. यह कॉरिडोर तीन आर्थिक केंद्रों, दो सामाजिक केंद्रों और 12 परिवहन केंद्रों से जुड़ेगा, जिससे अलग-अलग परिवहन साधनों के बीच बेहतर तालमेल बनेगा. इससे रूपईडीहा लैंड पोर्ट और हवाई अड्डों तक पहुंच आसान होगी और पूरे क्षेत्र में माल और यात्रियों की आवाजाही तेज होगी.
परियोजना पूरी होने के बाद नेपालगंज सीमा के जरिए भारत और नेपाल के बीच व्यापार और आवाजाही के लिए एक अहम रास्ता मजबूत होगा, जिससे रूपईडीहा लैंड पोर्ट तक पहुंच में बड़ा सुधार होगा. यह सड़क बहराइच और श्रावस्ती जैसे दूरदराज के जिलों को भी जोड़ेगी और प्रधानमंत्री गतिशक्ति योजना के आर्थिक और लॉजिस्टिक केंद्रों से संपर्क देगी. इससे कृषि व्यापार, पर्यटन, सीमा पार कारोबार और क्षेत्रीय निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
48.28 किलोमीटर लंबा बाईपास भी
परियोजना के तहत बाराबंकी से बहराइच तक चार लेन का एक्सेस-कंट्रोल्ड राष्ट्रीय राजमार्ग-927 बनाया जाएगा, जो लखनऊ-रूपईडीहा कॉरिडोर का हिस्सा होगा. इसकी कुल लंबाई 101.515 किलोमीटर होगी.
इस परियोजना की सिविल लागत 3485.49 करोड़ रुपये और भूमि अधिग्रहण की लागत 1574.85 करोड़ रुपये तय की गई है, जबकि कुल लागत 6969.04 करोड़ रुपये है. परियोजना का निर्माण हाइब्रिड वार्षिकी मोड में होगा और इसमें 48.28 किलोमीटर लंबा बाईपास भी बनाया जाएगा.
इन इलाकों तक आसान होगी पहुंच
यह राजमार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग-27, 330बी और 730 के साथ-साथ राज्य राजमार्ग-13 और 30बी से जुड़ेगा. इसके जरिए लखनऊ और श्रावस्ती हवाई अड्डों तक पहुंच मिलेगी. साथ ही बाराबंकी, रसौली, जंगीराबाद, रफीनगर, बिंदौरा, बुढ़वल, चौकाघाट, घाघराघाट, जरवल और बहराइच रेलवे स्टेशनों से भी कनेक्टिविटी मजबूत होगी. यह परियोजना रूपईडीहा लैंड पोर्ट से भी जुड़ेगी. इसके अलावा यह एक विशेष आर्थिक क्षेत्र और दो मेगा फूड पार्क जैसे आर्थिक केंद्रों के साथ-साथ दो आकांक्षी जिलों जैसे सामाजिक केंद्रों को भी जोड़ेगी.
इस कॉरिडोर के जरिए बाराबंकी, रामनगर, जरवल, कैसरगंज, कुंडासर, फखरपुर और बहराइच जैसे प्रमुख शहरों और कस्बों को बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा. परियोजना के निर्माण के दौरान करीब 36.54 लाख व्यक्ति-दिवस का प्रत्यक्ष और 43.04 लाख व्यक्ति-दिवस का अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने का अनुमान है. वित्त वर्ष 2028 में इस मार्ग पर रोजाना औसतन यातायात का अनुमान पैकेज-1 में 28,557 और पैकेज-2 में 21,270 यात्री कार यूनिट रहने का आकलन किया गया है.










