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रमेश सिप्पी की फिल्म ‘शोले’ 1975 में रिलीज हुई थी. वह अब अपने 50 साल पूरे कर चुकी है. बाकी लीड कलाकारों के मुकाबले जया बच्चन के डायलॉग कम थे, जिसकी वजह रमेश सिप्पी ने एक इंटरव्यू में बताई.
‘शोले’ में जया ने राधा का रोल निभाया था.जब रमेश सिप्पी से आईएएनएस ने पूछा कि फिल्म में जया बच्चन के ज्यादा संवाद नहीं थे, क्या आपको लगता है कि महिला किरदार को कमतर आंका गया है?” इस पर फिल्म निर्माता ने जवाब दिया, ‘बिल्कुल नहीं.’ रमेश सिप्पी ने अपनी बात को आगे समझाते हुए कहा, ‘हालांकि जया जी फिल्म में विधवा की भूमिका निभाते हुए चुप थीं, लेकिन वह इतनी अद्भुत कलाकार हैं कि वह अपनी आंखों के माध्यम से अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में सक्षम थीं. अमित जी (अमिताभ बच्चन) के साथ भी ऐसा ही था. अपने एक्शन सीन्स के अलावा, उन्हें इस बात का भी मान रखना था कि राधा एक विधवा और घर की बहू थीं.’
रमेश सिप्पी ने यह भी बताया कि ‘शोले’ की पूरी कहानी संजीव कुमार के उस बदले के इर्द-गिर्द घूमती है, जो गब्बर द्वारा अपने पूरे परिवार की हत्या के बाद उभरता है. इसलिए जया बच्चन का फिल्म में कुछ ही संवाद हों, यह किरदार और कहानी के हिसाब से ठीक था. ‘शोले’ में धर्मेंद्र (वीरू) और अमिताभ बच्चन (जय) दो छोटे अपराधी हैं, जिन्हें एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी (संजीव कुमार) गब्बर सिंह नाम के खूंखार डाकू को पकड़ने के लिए लाते हैं. फिल्म की शूटिंग कर्नाटक के रामनगरम की पहाड़ी और पथरीली जगहों पर की गई थी.
शुरू में फिल्म की हुई आलोचना
शूटिंग अक्टूबर 1973 में शुरू हुई थी और इसे पूरा होने में ढाई साल लगे थे. शुरुआत में फिल्म को आलोचकों से अच्छे रिव्यू नहीं मिले थे और इसकी कमाई भी कुछ खास नहीं हुई थी. लेकिन बाद में धीरे-धीरे दर्शकों की तारीफ और सकारात्मक बातों ने इसे सुपरहिट बना दिया था.
अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें
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