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Guess The Actress: बॉलीवुड की इस एक्ट्रेस की शादी सिर्फ 12 की उम्र में हो गई थी और 17 की उम्र में वह मां भी बन गई थी. फिल्मों में एंट्री हुई, लेकिन उन्होंने कभी पर्दे पर लीड रोल नहीं निभाया. पर्दे पर साइड रोल्स के साथ ही छाई रहीं. कौन हैं ये एक्ट्रेस चलिए बताते हैं.
नई दिल्ली. सिनेमा का दुनिया में सब लीड हीरो बनकर छा जाए, ये तो मुमकिन नहीं है. लेकिन क्या कभी आपने ऐसे एक्टर के बारे में सुना है, जिसने ये कह दिया हो कि मुझे लीड एक्टर बनना ही नहीं है. एक फिल्म जब बनती है तो सिर्फ हीरो-हीरोइन नहीं बल्कि लंबी चौड़ी स्टार कास्ट के साथ पूरी होती है. कुछ चेहरे लीड रोल न निभाने के बाद भी चर्चाओं में आ जाते हैं और कुछ स्क्रीन पर होने के बावजूद अक्सर चर्चा में नहीं आते. लेकिन, बॉलीवुड की उस एक्ट्रेस के बारे में क्या आप जानते हैं, जिन्होंने हमेशा सपोर्टिंग रोल किए और अनपढ़ होने के बाद भी सारी जिंदगी दो शर्तों के साथ काम किया. फोटो साभार-@IMDb

‘तो क्या लड़का अभी कुछ भी नहीं कमाता? कमाने का क्या है मौसी जी… कमाता तो है, लेकिन जुए में हार जाता है’, 50 साल पहले रिलीज हुई ये डायलॉग फिल्म शोले का है. फिल्म में ‘बसंती’ की ‘मौसी’ को शायद ही कोई भूल सकेगा. आज कहानी बॉलीवुड की फेवरेट दादी-नानी और मौसी यानी लीला मिश्रा की.

लीला का जन्म 1 जनवरी 1908 में उत्तर प्रदेश के आगरा के जमींदार परिवार में हुआ. लीला की पढ़ाई-लिखाई नहीं हुई और सिर्फ 12 साल की उम्र में ही उनकी शादी रामप्रसाद मिश्र से कर दी गई. 17 साल की उम्र में वह दो बच्चों की मां बन चुकी थी. रंगमंच से जुड़े रामप्रसाद बेहद आजाद खयालों की व्यक्ति थे. वह सिनेमा को काफी पसंद करते थे और अक्सर फिल्मों में साइलेंट रोल किया करते थे.

एक बार रामप्रसाद के मित्र मामा शिंदे उनके घर आए और उन्होंने लीला को फिल्मों में रोल करने को कहा. लीला ने फिल्मों में रोल करने से तुरंत इंकार कर दिया. हालांकि, बाद में पति के समझाने पर वह फिल्मों में काम करने को राजी तो हुई लेकिन उन्होंने एक शर्त रख दी और कहा कि वह फिल्मों में कभी भी सिर से पल्लू नहीं हटाएंगी. फोटो साभार-@IMDb

लीला ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत साल 1936 में आई फिल्म ‘सती सुलोचना’ से की. उन्होंने इस फिल्म में अपने पति रामप्रसाद के साथ काम किया. इस फिल्म में लीला को हर माह के 500 रुपये मिलते थे. वहीं उनके पति को महज 150 रुपये मिलते थे. दरअसल, उस दौरान फिल्मों के लिए फीमेल एक्ट्रेस बहुत कम मिलती थी. इसके चलते अपने पति से 3 गुना से ज्यादा फीस दी गई. फोटो साभार-@IMDb

लीला कोई भी फिल्म साइन करने से पहले प्रोड्यूसर और डायरेक्टर के सामने एक अजीब शर्त रख देती थीं. लीला का कहना होता था कि वह फिल्म में किसी भी तरह का कोई भी रोमांटिक सीन नहीं करेंगी. रोमांटिक सीन तो दूर की बात वह पूरी फिल्म में सिर से पल्लू तक हटाने से इंकार कर देती थी. यही कारण था कि उन्होंने कई रोमांटिक फिल्मों में लीड रोल तक करने से इंकार कर दिया. फोटो साभार-@IMDb

फिल्मफेयर को दिए इंटरव्यू में सई परांजपे ने कहा था, ‘लीला मिश्रा समय की पाबंदी और परफेक्शन की मिसाल थीं. मैंने आजतक उन जैसी दूसरी महिला नहीं देखी.’ उन्होंने नोटिस किया कि किस तरह लीला अपने सीन्स के लिए क्रिएटिव थीं. वह खूब मेहनत करती थीं और जैसे हो सके एक एक सीन को बेहतरीन बनाती थीं. फोटो साभार-@IMDb

लीला मिश्रा की आखिरी फिल्म ‘दाता’ थी जिसमें मिथुन चक्रवर्ती, प्रेम चोपड़ा और पद्मिनी कोल्हापुरे नजर आए थे. इस फिल्म के दौरान लीला मिश्रा को पैरालाइज्ड हो गया. पूरे सेट पर उनकी तबीयत को लेकर अफरा-तफरी मच गई. सब सोच रहे थे कि कैसे उन्हें जल्द से जल्द अस्पताल ले जाया जाए. लेकिन लीला अपनी हालत से बिल्कुल भी परेशान नहीं थीं और उन्होंने कैमरा क्रू से सिर्फ इतना कहा कि उन्हें उस साइड से फिल्माया जाए जो प्रभावित नहीं हुई है.शूटिंग खत्म होने के बाद ही लीला मुंबई लौटीं और उनका निधन हो गया.

बॉलीवुड में भले ही पिछले कुछ दशकों में काफी बदलाव आ गया हो लेकिन अपने धार्मिक किरदार को कभी न छोड़ने वाली लीला को सर्वश्रेष्ठ एक्ट्रेस का सम्मान भी एक धार्मिक फिल्म से ही मिला. लीला ने ‘जय संतोषी मां’ फिल्म में बेहद शानदार किरदार निभाया और उन्हें इस फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ एक्ट्रेस के लिए चुना गया. लीला ने बॉलीवुड ही नहीं कई भोजपुरी फिल्मों में भी एक्टिंग की है. फोटो साभार-@IMDb
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