रूस और यूक्रेन के बीच तीन साल से चल रहे संघर्ष में एक बड़ी कूटनीतिक पहल सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अलास्का के सैन्य अड्डे पर हुई बैठक में रूस ने पहली बार यह स्वीकार किया कि अमेरिका और यूरोपीय देश यूक्रेन को सुरक्षा गारंटी दे सकते हैं, ठीक वैसे जैसे नाटो का अनुच्छेद पांच काम करता है। इस बात की जानकारी इस बैठक में शामिल ट्रंप के प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ ने दी। बता दें कि नाटो का अनुच्छेद पांच कहता है कि अगर किसी एक सदस्य देश पर हमला होता है, तो उसे सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा और बाकी देश उसकी रक्षा करेंगे। यूक्रेन इसी तरह की सुरक्षा गारंटी की लंबे समय से मांग कर रहा है।
विटकॉफ ने इसे बताया गेम चेंजिग कदम
इस बैठक में शामिल ट्रंप के प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ ने आगे को बताया कि यह पहली बार है जब रूस इस तरह की सुरक्षा गारंटी पर सहमत हुआ है। उन्होंने इसे गेम-चेंजिंग यानी हालात को बदलने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने यह बड़ी रियायत हासिल की कि वह यूक्रेन को अनुच्छेद पांच जैसी सुरक्षा गारंटी दे सकता है, ताकि यूक्रेन भविष्य में फिर से किसी हमले का शिकार न बने।
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रूस ने और किन-किन बातों पर जताई सहमति?
इसके साथ ही एक न्यूज चैनल को विटकॉफ ने बताया कि रूस ने यह भी मान लिया है कि वह भविष्य में किसी और यूरोपीय देश की सीमा का उल्लंघन नहीं करेगा। साथ ही और यूक्रेन से और जमीन नहीं लेगा। यह रूस की तरफ से एक तरह का लिखित भरोसा देने की बात है, जो पहले कभी नहीं हुआ था। ऐसे में अब अमेरिका और यूरोपीय देश इस सप्ताह यह तय करेंगे कि यूक्रेन को दी जाने वाली सुरक्षा गारंटी की व्यवस्था कैसे बनाई जाए। यह गारंटी कैसे काम करेगी, किसके जिम्मे क्या होगा? इन सभी बातों पर चर्चा होगी।
क्या बोले मार्को रुबियो?
वहीं अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो जो इस बैठक में भी मौजूद थे और ट्रंप के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं उन्होंने कहा कि हम अभी शांति समझौते के करीब नहीं हैं, लेकिन यह एक बड़ी प्रगति है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन इस बैठक में शामिल नहीं था, इसलिए युद्धविराम पर सहमति बनना मुश्किल था। लेकिन अब हम आगे की बातचीत के लिए तैयार हैं।
आज व्हाइट हाउस में ट्रंप और जेलेंस्की की होगी मुलाकात
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और कई यूरोपीय नेता सोमवार को व्हाइट हाउस में ट्रंप से मुलाकात करेंगे। इस बैठक में सुरक्षा गारंटी और शांति समझौते पर गहराई से बात होगी। इसको लेकर जेलेंस्की ने कहा कि हमें खुशी है कि अमेरिका इस पर विचार कर रहा है, लेकिन हमें अभी तक ये साफ नहीं है कि यह गारंटी वास्तव में कैसे काम करेगी। हमें ऐसी सुरक्षा चाहिए जो जमीनी हकीकत में असर डाले, सिर्फ कागज पर न हो।
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यूरोप ने अमेरिका के कदम का किया स्वागत
वहीं यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने अमेरिका की इस पहल का स्वागत किया और कहा कि यूरोपीय संघ भी यूक्रेन की सुरक्षा के लिए अपना सहयोग देने को तैयार है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी कहा कि सुरक्षा गारंटी को नाम क्या दिया जाता है, यह उतना जरूरी नहीं है जितना कि उसकी असली ताकत और प्रभाव।












