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यह कहानी एक ऐसी एक्ट्रेस की जिसने मजबूरी में बॉलीवुड में अपना करियर बनाया. बचपन बेहद गरीबी में बीता. पिता नाटक मंडली चलाते थे. घर में खाने तक के लाले पड़े थे. ऐसे में पढ़ाई छोड़ दी और परिवार को सपोर्ट करने के लिए महज 9 साल की उम्र में ही फल्मों में काम तलाशा. हिंदी सिनेमा में अपनी एक अलग पहचान बनाई. इस एक्ट्रेस को बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार सेट पर सबके सामने ‘बहना रानी’ बुलाते थे. हालांकि फिल्म में दोनों ने टूटकर रोमांस किया.

बॉलीवुड की वेटरन एक्ट्रेस अरुणा ईरानी महज 9 साल की उम्र में ही फिल्मों में काम करने लगी थीं. पिता फरीदुन ईरानी नाटक मंडली चलाते थे. मां एक्ट्रेस थीं और छोटे-मोटे रोल करके परिवार को पालती थीं. पिता को जुए की लत थी. ऐसे में वह अपनी कमाई अपने खर्चों में उड़ा देते थे. आठ भाई बहनों में अरुणा सबसे बड़ी थीं. घर में गरीबी का आलम ऐसा था कि कई बार सिर्फ प्याज और चावल खाकर रात काटी. वो भी हमें लजीज लगता था. 1961 से उन्होंने फिल्मों में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट काम शुरू किया. अरुणा के भाई इंद्र कुमार, आदि ईरानी और फिरोज ईरानी भी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े हुए हैं.

60 के दशक में अरुणा एक फिल्म के ऑडिशन देने के लिए गई थीं. ऑडिशन देने के बजाय वो खाने-पीने में जुट गईं. तभी दिलीप कुमार ने पीछे से जोर से आवाज लगाई. गंगा जमुना फिल्म में काम करने का ऑफर दिया. यहीं से उनका फिल्मी करियर शुरू हुआ.

अरुणा ईरानी ने साइड रोल करती रहीं. फिर उन्हें बॉम्बे टू गोवा फिल्म मिली. इस फिल्म में उन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ काम किया. यह पहली फिल्म थी जिसमें उन्होंने पहली बार बतौर लीड एक्ट्रेस काम किया. इस फिल्म का निर्देशन महमूद ने किया था.

लहरें रेट्रो के पॉडकास्ट में अरुणा ने बताया था कि जब उम्र बड़ी तो उन्हें रोल मिलना बंद हो गए. इसी दौरान उन्हें डांस मास्टर सुरेश भट्ट ने एक्टर महमूद से काम मांगने की सलाह दी थी. अरुणा ने बताया, ‘मैं बचपन से ही महमूद की फैन थी. मेरा उनसे अफेयर हुआ. ये अफेयर उनकी लाइफ के लिए ठीक नहीं था. मुझे भी समझ आ गया था कि शादी नहीं हो पाएगी. मुझे भी आगे करियर बनाना था. भाई-बहनों को पढ़ाना-लिखाना था. महमूद से ब्रेक अप होने के बाद मुझे कोई काम नहीं दे रहा था.’

अरुणा ईरानी ने गुजरात सिनेमा में भी काम किया है. उन्हें गुजराती सिनेमा का ‘अमिताभ बच्चन’ कहा जाता है. एक्ट्रेस बिंदु अरुणा ईरानी की मौसेरी बहन हैं. हालांकि दोनों के बीच संबंध उतने प्रगाढ़ नहीं रहे. अरुणा ने अपने इंटरव्यू में बताया था, ‘बिंदु के पिता नानूभाई देसाई डायरेक्टर थे. हम लोगों के पास पैसे नहीं होते थे तो मम्मी बार-बार मौसी से उधार मांगती थीं. इसलिए दूरी बनाकर रहते थे. मैंने कभी बिंदु के साथ काम नहीं किया.’

राजेश खन्ना मुझे बहन बोलते थे. उनको लगता था कि मैं सबको तंग करती हूं. वो कहते थे कि ‘ऐ बहन’ मेरे साथ बदमाशी नहीं करना. वो मुझे बहन बोलते थे तो मैं उन्हें सिर्फ काका बोलती थी. वो मुझे बहुत पसंद करते थे. हमेशा लाइक करते थे. मैंने उनका स्टारडम अपनी आंखों से देखा है. मैं उनके साथ एक फिल्म कर रही थी. शाम के समय एक सीन शूट हुआ. तीन-चार प्रोड्यूसर मिलने के लिए आए. उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि किसकी फिल्म करें. ऐसे में शाम को चिट्ठी पड़ी. एक चिट्ठी उठाई और भप्पी दा का नाम निकला. पूरी यूनिट में मिठाई बंट गई थी. मैंने उनके साथ कई रोमांटिक सीन भी किए हैं. प्रेम नगर फिल्म में मैं उनके प्यार में पड़ जाती हूं. पर्दे पर तो मैं उन्हें रिझाती ही रहती थी.’

अरुणा ईरानी ने अपने एक इंटरव्यू में अपनी निजी जिंदगी के कई राज खोले थे. उन्होंने कुकू कोहली से शादी कैसे हुई इस पर भी चर्चा की थी. बकौल अरुणा ईरानी , ‘महमूह से ब्रेकअप के बाद करीब ढाई साल तक कोई काम नहीं मिला. फिर राज कपूर ने बॉबी में 1973 में रोल ऑफर किया. यही से फिर से दोबारा करियर शुरू किया. रेखा ने मुझे दो फिल्मों से निकलवाया था. 1991 में फिल्म कोहराम के सेट पर डायरेक्टर कुकू कोहली से मुलाकात हुई. दोस्ती प्यार में बदल गई तो शादी रचा ली. हालांकि कुकू की पहली पत्नी का निधन हो गया था तभी जाकर घर बसाया लेकिन कभी बच्चे पैदा नहीं किए. मुझे इसकी बहुत खुशी है. मैं नीना गुप्ता जितनी बहादुर नहीं हूं.’
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