नई दिल्ली. सुपरस्टार राजेश खन्ना और एक्ट्रेस अनीता आडवाणी का रिश्ता किसी से छुपा नहीं है. पिछले कुछ सालों से अनीता लगातार काका के साथ अपने बॉन्ड के बारे में खुलकर बात कर रही हैं. उन्होंने अपनी किताब में भी इस बारे में लिखा है. हाल ही में अनीता आडवाणी ने बताया कि राजेश खन्ना के साथ उनका रिश्ता तब शुरू हुआ, जब वह बहुत कम उम्र की थीं.
रील मीट्स रियल को दिए इंटरव्यू में अनीता आडवाणी ने
राजेश खन्ना के बारे में बात की. कहा, ‘जब मैं पहली बार उनसे मिली, तब मैं टीएनजर थी और हमारे बीच बहुत ही जल्दी रोमांस शुरू हो गया था. उन्होंने मेरे दिल और दिमाग पर इतनी गहरी छाप छोड़ी कि उसके बाद मुझे दूसरा कोई अच्छा ही नहीं लगा. फिर किस्मत ने अपना खेल खेला, हम लगातार एक-दूसरे से मिलते रहे और आखिरकार जब उनके जीवन में सभी लोग चले गए थे, जब उनके परिवार का कोई भी सदस्य उनके पास नहीं था, तो हम फिर से मिले. इसके बाद हम करीब 12 साल तक एक साथ रहे.’
अनीता आडवाणी और राजेश खन्ना.
कभी किसी दूसरे पुरुष के बारे में नहीं सोचा
उन्होंने बताया कि उस उम्र में वह भावनात्मक रूप से बहुत कमजोर थीं. अनीता ने कहा, ‘मैं उनसे बेहतर आदमी नहीं चाह सकती थी. वह लाखों में एक थे. बात यह थी कि मैं एक बहुत प्रभावशाली उम्र में उनके साथ रिश्ते में थी. मैं एक पारंपरिक परिवार से आई थी, इसलिए मुझे लगता था कि वह मेरी दुनिया हैं. जब मैं बड़ी हुई, लोग मेरे पीछे आए, लेकिन मैं किसी और को देख ही नहीं पाई. मैं बस उसी तुलना में फंसी हुई थी. मैं नहीं चाहती थी कि कोई दूसरा मर्द मुझे छुए. यह मेरे लिए मेंटल ब्लॉक बन गया था.’
राजेश खन्ना के प्रार्थना सभा से किया गया था बाहर
अनीता आडवाणी ने हाल ही में राजेश खन्ना के प्रार्थना सभा से बाहर किए जाने के दर्द को भी बयां किया था. उन्होंने कहा, ‘वहां बाउंसर्स तैनात थे ताकि मुझे अंदर न जाने दिया जाए, यह मैंने दोस्तों से सुना. जब मैंने उन्हें बताया कि मैं जाने का सोच रही हूं, तो उन्होंने मुझे चेतावनी दी कि मुझे अंदर नहीं जाने दिया जाएगा. फिर भी उन्होंने कहा कि अगर कुछ होता है, तो हम आपके साथ हैं.
हैरान रह गई थीं अनीता आडवाणी
उन्होंने बताया, ‘मगर मैं चौंक गई और पूछा कि यह सब क्यों? मेरे कुछ स्टाफ और करीबी दोस्तों ने मुझे जाने के लिए प्रोत्साहित किया, यहां तक कि उन्होंने यह भी कहा कि कैमरा लेकर जाऊं ताकि यह रिकॉर्ड कर सकूं कि वे क्या करते हैं. लेकिन मैंने सोचा, ऐसे वक्त पर मैं ऐसा कैसे कर सकती हूं? तो मैं नहीं गई. मैंने अकेले ही उनके लिए एक मंदिर में अपना चौथा रखा.’