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उषा खन्ना ने पुरुष प्रधान हिंदी सिनेमा में 1959 की दिल देके देखो से पहचान बनाई. छह दशकों तक लता मंगेशकर व शम्मी कपूर जैसे दिग्गजों संग सदाबहार गीत दिए. चलिए आज उनके बर्थडे पर उनकी जिंदगी से रूबरू करवाते हैं.
उषा खन्ना का जन्म 7 अक्टूबर 1941 को ग्वालियर में हुआ था. जो संगीत की समृद्ध परंपरा के लिए प्रसिद्ध है. उनके पिता मनोहर खन्ना गजलकार थे. इसलिए उषा का घर बचपन से ही गीत-संगीत से भरा था. वे मुंबई में जद्दन बाई और सरस्वती देवी जैसे महान गुरुओं से संगीत की तालीम लीं.
जब पुरुषों का दबदबा था तब बनाई पहचान
उषा खन्ना ने गायिका के रूप में अपने करियर की शुरुआत की. लेकिन उनका रुझान संगीत रचना की ओर हो गया. उस समय हिंदी फिल्म उद्योग में पुरुष संगीतकारों का दबदबा था. फिर भी उषा ने हार नहीं मानी. उन्होंने सशधर मुखर्जी के सामने अपनी प्रतिभा साबित की. मुखर्जी ने उन्हें 1959 की सुपरहिट फिल्म ‘दिल देके देखो’ का संगीत बनाने का मौका दिया.
संगीत बनाकर कमाई दौलत-शोहरत
यह फिल्म उषा खन्ना के करियर में बड़ा मोड़ साबित हुई. उस समय के मशहूर अभिनेता शम्मी कपूर भी इस फिल्म का हिस्सा थे. जिन्होंने उषा की धुनों को स्वीकार किया. धीरे-धीरे उषा ने अपने संगीत से सभी को प्रभावित किया. उन्होंने लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी और किशोर कुमार जैसे दिग्गज गायकों के साथ काम किया और कई सदाबहार गीत दिए.
उषा खन्ना के गाने
उषा खन्ना हर तरह के गीतों में माहिर थीं. उन्होंने ‘हम हिंदुस्तानी’ के लिए ‘छोड़ों कल की बातें’. ‘साजन बिना सुहागन’ के लिए ‘मधुबन खुशबू देता है’. ‘सौतन’ के लिए ‘चाय पे बुलाया है’. ‘हवस’ के लिए ‘तेरी गलियों में रखेंगे कदम’. और ‘दादा’ के लिए ‘दिल के टुकड़े-टुकड़े’ जैसे फिल्मों में यादगार संगीत दिया. उनके गीत आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं.
बड़े बजट की फिल्में निकल जाती थी हाथ से
फिल्मी दुनिया में उनका सफर आसान नहीं था. एक महिला संगीतकार के रूप में उन्हें कई बार संघर्ष करना पड़ा. बड़े बजट की फिल्में पुरुष संगीतकारों को ही मिलती थीं. लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी. उन्होंने छोटी और मध्यम बजट की फिल्मों के लिए संगीत बनाया और इनमें कई बार संगीत की चमक ऐसी रही कि फिल्में भले कम जानी गईं. लेकिन उनके गीत सदाबहार बन गए.
6 दशकों तक चला सफर
उषा खन्ना को उनके काम के लिए कई बार सम्मानित किया गया और फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामांकित भी किया गया. उन्होंने अपने करियर में सैकड़ों गीत दिए जो आज भी रेडियो और समारोहों में गाए जाते हैं. उनकी संगीत यात्रा लगभग छह दशकों तक चली. जो किसी भी महिला संगीतकार के लिए एक बड़ी उपलब्धि है.

न्यूज 18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहीं वर्षा का डिजिटल मीडिया में 8 सालों का अनुभव है। एंटरटेनमेंट रिपोर्टिंग, लेखन, फिल्म रिव्यू, इंटरव्यू और विश्लेषण इनकी विशेषज्ञता है। वर्षा ने जामिया मिल्…और पढ़ें
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