जम्मू-कश्मीर पुलिस ने जिस सफेदपोश डॉक्टर आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है, वह पिछले साल से ही आत्मघाती हमलावर की तलाश में था। मुख्य साजिशकर्ता डॉ. उमर नबी इस षडयंत्र को लगातार आगे बढ़ा रहा था। आतंकियों की साजिश अप्रैल में दानिश के इस्लाम में खुदकुशी वर्जित होने का हवाला देते हुए पीछे हटने से विफल हो गई थी।
जांच अधिकारियों ने रविवार को दावा किया कि दक्षिण कश्मीर के काजीगुंड से पकड़े गए आरोपी जसीर उर्फ दानिश से पूछताछ में पता चला कि डॉ. उमर घोर कट्टरपंथी था। वह इस बात पर लगातार जोर देता था कि आतंकी साजिश को अंजाम देने के लिए एक आत्मघाती हमलावर की जरूरत थी। आरोपी ने स्वीकारा कि वह पिछले साल अक्तूबर में कुलगाम की एक मस्जिद में सफेदपोश डॉक्टर आतंकी मॉड्यूल से मिला था, जहां से उसे फरीदाबाद के अल-फलाह विवि में किराये के कमरे में ले जाया गया।
पूछताछ में दानिश ने बताया, सफेदपोश मॉड्यूल से जुड़े अन्य लोग उसे प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के लिए ओवर-ग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) यानी आतंकियों का मददगार बनाना चाहते थे, जबकि डॉ. उमर उसे आत्मघाती हमलावर बनाना चाहता था। इसके लिए वह दानिश को कई महीनों तक बरगलाता रहा।
भारी भीड़भाड़ वाले धर्मस्थल पर विस्फोटक भरी गाड़ी छोड़कर गायब होने की थी मंशा
श्रीनगर पुलिस ने डॉ. अदील राथर और डॉ. मुजफ्फर गनई सहित अन्य आरोपियों से पूछताछ के आधार पर राजनीति विज्ञान में स्नातक दानिश को पकड़ा था। अधिकारियों ने सबूतों की कड़ियों को जोड़ते हुए बताया, डॉ. उमर ने दिल्ली या धार्मिक महत्व के किसी स्थान पर भीड़भाड़ वाली जगह पर विस्फोटकों से भरी गाड़ी छोड़कर गायब होने की साजिश रची थी। आत्मघाती हमलावर की तलाश की साजिश जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े अंतरराज्यीय आतंकी नेटवर्क की जांच में एक नया खतरनाक आयाम जोड़ती है।
तुर्किये यात्रा के बाद बना था कट्टरपंथी
दानिश से पूछताछ के आधार पर अधिकारियों ने बताया, डॉ. उमर 2021 में सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल के सदस्य डॉ. मुजम्मिल अहमद गनी के साथ तुर्किये की यात्रा के बाद कट्टरपंथी बनना शुरू हुआ था। वहां दोनों जैश-ए-मोहम्मद के ओवर-ग्राउंड-वर्कर से मिले थे।
20 साल पहले की योजना से बिल्कुल अलग रणनीति
इन संदिग्धों का प्रोफाइल 20 साल पहले भर्ती आतंकियों से अलग है। 2000 के दशक की शुरुआत से 2020 तक, आतंकी संगठनों का ध्यान उन युवाओं पर था, जिनका पहले से ही आतंकी गतिविधियों से जुड़ाव था। इस अवधि में मारे गए कई आतंकवादियों ने किसी न किसी समय हथियार छोड़ दिए थे। फिर आतंकी गतिविधियों में शामिल हो गए। विभिन्न जेलों में बंद रहने के दौरान बड़ी संख्या में युवाओं को कट्टरपंथी बनाया गया। ब्यूरो
आपराधिक रिकॉर्ड जिनका नहीं, उन्हें बना रहे आतंकी
जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी समूहों के आका सुरक्षा बलों की नजर से बचने के लिए अब नई रणनीति पर काम कर रहे हैं। आतंकियों की नई भर्ती में वे उन युवाओं को शामिल कर रहे हैं, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड या अलगाववादी जुड़ाव नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि यह दो दशक पुरानी रणनीति से अलग है, जिसमें आतंकी संगठनों से जुड़े लोगों को प्राथमिकता दी जाती थी। सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल की जांच कर रहे अधिकारियों का कहना है कि अब तक गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए आरोपियों से पूछताछ में इस नए पैटर्न का पता चला है।
- एक अधिकारी ने कहा, डॉ. अदील, उसके भाई डॉ. मुजफ्फर राथर और डॉ. मुजम्मिल गनई जैसे आरोपियों का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में संलिप्तता नहीं है। इन कट्टरपंथी युवाओं के परिवार के सदस्यों का भी किसी अलगाववादी या आतंकी संगठन से पूर्व संबंध नहीं है। यहां तक कि डॉ. उमर का भी कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। उसका परिवार भी इस मामले में बेदाग रहा है
- सूत्रों के मुताबिक, यह जम्मू-कश्मीर या पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी समूहों की सोची-समझी चाल है, ताकि उच्च शिक्षित युवाओं और बिना किसी आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को आतंकी गतिविधियों का हिस्सा बनाया जाए
फंडिंग जुटा रहे थे शाहीन और डॉक्टर परवेज
आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के फरीदाबाद माड्यूल की अहम सदस्य डॉ. शाहीन ने आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के लिए कई देशों से फंडिंग जुटाई थी। जैश के इशारे पर उसे विदेशों में रहने वाले कश्मीरी मूल के डॉक्टरों से संपर्क स्थापित कर फंडिंग का बंदोबस्त करने का जिम्मा सौंपा गया था। इसमें उसका भाई डॉ. परवेज भी मदद कर रहा था। राजधानी निवासी दोनों भाई-बहन की जांच में सामने आया है कि वह पाकिस्तान समेत कई मुस्लिम देशों के डॉक्टरों के संपर्क में थे।
- जांच एजेंसियां शाहीन द्वारा 30 लाख रुपये से अधिक रकम जुटाने के पुख्ता सुबूत जुटा चुकी है और आगे की जांच जारी है। जैश ने सुनियोजित साजिश के तहत राजधानी निवासी डॉ. शाहीन और डॉ. परवेज को यह काम सौंपा था। दरअसल, इस माड्यूल से जुड़े अधिकतर डॉक्टर कश्मीर मूल के हैं, जिनके जरिये फंडिंग करने से फंसने का डर था
- छानबीन में पता चला है कि डॉ. शाहीन, मुजम्मिल के नेटवर्क से कई लोग जुड़े थे। यह लोग व्हाट्सएप ग्रुप के अलावा टेलीग्राम एप से भी जुड़े थे। 9 नवंबर को गिरफ्तारियों के बाद कई लोगों ने ग्रुप छोड़ दिए
हिदायत कॉलोनी की गली सील एजेंसियों ने दिनभर की छानबीन
आतंकी उमर की शहर में मौजूदगी की पुष्टि के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके में कार्रवाई तेज कर दी है। उमर लगभग 10 दिन तक हिदायत कॉलोनी के जिस मकान में रुका था उस गली को रविवार सुबह पुलिस ने बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया। गली में रहने वाले सभी लोगों की का पुलिस ने सत्यापन किया। रविवार को नूंह के एसपी राजेश कुमार ने भी उस मकान का निरीक्षण किया, जिसमें उमर ठहरा था। उमर को मकान उपलब्ध कराने में भूमिका निभाने वाले शोएब और रिजवान को पुलिस ने हिरासत में लिया है। शोएब उस महिला का रिश्तेदार बताया जा रहा है, जिसके मकान में उमर किराए पर रहा।











