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हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता दारा सिंह का आज जन्मदिन है. उन्होंने अपने करियर में एक्टिंग से लेकर राजनीति तक अपने काम से लोगों का दिल जीता और अपनी एक अलग पहचान बनाई. दारा सिंह फिल्मों में आने से पहले पहलवान थे.मुमताज को स्टार बनाने का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है.रामायण से तो उन्हें बड़ी पहचान मिली थी.
नई दिल्ली. पहलवानी और एक्टिंग का आपस में कोई रिश्ता नहीं लगता. दोनों बिल्कुल अलग दुनिया हैं. लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हुए हैं जिन्होंने दोनों जगह अपना लोहा मनवाया. ऐसे नामों में सबसे ऊपर आता है दारा सिंह का. रिंग में उतरतें थे तो उनसे बड़ा पहलवान कोई नहीं था और जब रामायण में भगवान हनुमान बने तो आज तक कोई उनके जैसा नहीं बन पाया. असल जिंदगी और पर्दे पर दोनों जगह उन्होंने ऐसा असर छोड़ा कि लोग आज भी नहीं भूलते.
दारा सिंह का जन्म आज ही के दिन 19 नवंबर 1928 को अमृतसर, पंजाब में हुआ था. उनका असली नाम दीदार सिंह रंधावा था. बचपन से ही उन्हें कुश्ती का शौक था और उसी को उन्होंने अपना करियर बनाया. 1950 के दशक में उन्होंने प्रोफेशनल फ्रीस्टाइल रेसलिंग शुरू की. 1954 में कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप जीती. इसके बाद वे सिंगापुर, मलाया, हांगकांग, जापान, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका जैसे बड़े अखाड़ों में लड़े. उन्होंने दुनिया के दिग्गज पहलवानों जैसे किंगकांग, जॉन डा सिल्वा, स्कीहिप्पर, जॉर्ज गॉर्डिएंको और लू थीज को हराया. करीब 500 से ज्यादा प्रोफेशनल मुकाबले खेले और कभी नहीं हारे.
मुमताज को स्टार बनाने का श्रेय
हिंदी सिनेमा की दिग्गज एक्ट्रेस मुमताज ने अपने करियर की शुरुआत में कई जूनियर आर्टिस्ट से लेकर सपोर्टिंग लीड रोल निभाए हैं. लेकिन जब बतौर लीड काम करने की सोची तो हर बड़े स्टार ने उनके साथ काम करने से मना कर दिया था. पहली बार दारा सिंह ने उन्हें अपनी फिल्म में काम करने का चांस दिया था. मुमताज की किस्मत तब बदली जब पहली बार लीड एक्ट्रेस के तौर पर उन्हें दारा सिंह के साथ मिली फिल्म फौलाद में काम करने का मौका मिला. इस फिल्म के बाद मुमताज और दारा की जोड़ी ने 16 और फिल्में भी कीं. मुमताज ने अपने इंटरव्यू में कहा भी था कि उन्हें स्टार बनाने का श्रेय दारा सिंह को भी जाता है.
रामायण ने दी बड़ी पहचान
यूं तो दारा सिंह ने कई फिल्मों में काम किया है. लेकिन उन्हें बड़ी पहचान दिलाने में रामानंद सागर की रामायण का बहुत बड़ा हाथ रहा है. रामायण में निभाए गए भगवान हनुमान के रोल से वह रातोंरात स्टार बन गए थे. बड़े शरीर, सादगी और जबरदस्त स्क्रीन प्रेज़ेंस के साथ उन्होंने बजरंगबली को इतने सजीव रूप में पेश किया कि आज भी कोई उस स्तर को नहीं छू पाया है. हनुमान का नाम लेते ही automatically दारा सिंह का चेहरा सामने आ जाता है. यही उनकी असली सफलता है.

पहलवानी में खूब कमाया नाम
करीब 30 साल तक रेसलिंग में छाए रहने के बाद लोगों ने उन्हें रुस्तम-ए-हिंद, रुस्तम-ए-पंजाब और दुनिया के अजेय पहलवान जैसे खिताबों से नवाजा. 1983 में 55 साल की उम्र में उन्होंने कुश्ती को अलविदा कह दिया. कुश्ती छोड़ने के बाद उन्होंने फिल्मों की दुनिया में कदम रखा. उनकी पहली फिल्म संगदिल 1952 में आई थी. लेकिन बतौर हीरो पहचान उन्हें 1962 में आई फिल्म किंगकांग से मिली. इसके बाद फौलाद, समसोन, वीर भीमसेन जैसी कई फिल्मों में उन्होंने दमदार काम किया. करियर में उन्होंने 150 से ज्यादा फिल्मों में एक्टिंग की.
बता दें कि फिल्मों और कुश्ती के बाद दारा सिंह राजनीति में भी आए और 2003 से 2009 तक राज्यसभा में सांसद रहे. उनकी आखिरी हिंदी फिल्म 2007 में आई ‘जब वी मेट’ थी. 12 जुलाई 2012 को 83 साल की उम्र में मुंबई में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया.

न्यूज 18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार का डिजिटल मीडिया में 9 सालों का अनुभव है. एंटरटेनमेंट रिपोर्टिंग, लेखन, फिल्म रिव्यू और इंटरव्यू में विशेषज्ञता है. मुनीष ने जामिया मिल्लिया इ…और पढ़ें
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