परशुरामपुर के वेदीपुर में प्यार को पाने के लिए नई नवेली पत्नी ने प्रेमी के हाथों पति का कत्ल करवा डाला। तो रुधौली में बांसी सिद्धार्थनगर के युवक ने गले की हड्डी बनी शादीशुदा प्रेमिका को ही मौत के घाट उतार दिया।
हालात ऐसे हैं कि किसी की मंजिल मौत बन रही है, तो कोई प्रेम को पाने या बचाने की जिद में सलाखों के पीछे उम्र भर की कैद का इंतजाम कर बैठा है। ताजा घटनाओं की परतें उठाती हैं कि आज प्रेम का मतलब समझने से ज्यादा, उसे हर हाल में हासिल करने की सनक बढ़ रही है।
मनोविज्ञानी डॉ. एके दुबे कहते हैं, भावनाओं के तूफान में युवा फैसले तो जल्द ले लेते हैं, पर परिणाम झेलने की क्षमता नहीं बची। रिश्तों में संवाद की कमी, सोशल मीडिया का प्रभाव और अवसाद का दबाव मिलकर एक खतरनाक विस्फोट बना रहे हैं।
प्रेम पहली मुलाकात में नहीं, समझ और सम्मान में पनपता है। लेकिन आज युवक-युवतियां तुरंत सबकुछ पा लेने की चाह में गलत रास्ते चुन लेते हैं। असफलता का सामना होते ही टूट जाते हैं, और खतरनाक कदम उठा लेते हैं। भले ही बाद में उन्हें पछतावे के अलावा कुछ हासिल नहीं होता हो, लेकिन समय रहते आंख नहीं खुल रही है।
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