1835 में मैकाले नाम के अंग्रेज ने भारत को अपनी जड़ों से उखाड़ने के बीज बोए थे। उसने भारत में मानसिक गुलामी की नींव रखी थी। मैकाले ने जो सोचा था, उसका प्रभाव कहीं व्यापक हुआ। हमें आजादी तो मिली, लेकिन हीन भावना से मुक्ति नहीं मिली।
वर्ष 2035 में उस अपवित्र घटना के 200 वर्ष पूरे हो रहे हैं। अगले 10 वर्ष में भारत को गुलामी की मानसिकता से मुक्त करके रहेंगे। इसी के बदौलत वर्ष 2047 तक विकसित भारत अपना स्वरूप लेगा।
इस दौरान पीएम ने राम मंदिर के संघर्ष से लेकर सृजन तक की गाथा सुनाई। मंदिर निर्माण के सभी सहयोगियों को नमन किया। सभी दानदाताओं का आभार प्रकट किया। निर्माण से जुड़े श्रमवीर, कारीगर, योजनाकार, वास्तुकार का अभिनंदन करके रामराज्य की परिकल्पना साकार की। साथ ही भविष्य की अयोध्या की अलौकिक झलक की कल्पना भी की।
कहा कि अयोध्या विकसित भारत का मेरुदंड बनकर उभर रही है। भविष्य की अयोध्या में पौराणिकता और नूतनता का संगम होगा। सरयू की अमृत धारा और विकास की धारा एक साथ बहेगी। आध्यात्म और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का तालमेल दिखेगा। भगवान राम के विचार हमारी प्रेरणा बनेंगे और शीघ्र ही भारत विश्व की तीसरी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।
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