मिट्टी की भी सेहत खराब हो रही है। पूर्वांचल में इसकी स्थिति में कोई सुधार नहीं है। 10 जिलों में मिट्टी में मूल पोषक तत्व जीवांश कार्बन की कमी है। आजमगढ़ और सोनभद्र की मिट्टी में पोषक तत्वों में ज्यादा कमी पाई गई है। अगर किसान खेतों में प्राकृतिक और जैविक विधि नहीं अपनाते हैं तो मिट्टी ऊसर हो जाएगी। मृदा परीक्षण विभाग की मानें तो पूर्वांचल में मिट्टी के पोषक तत्व अपने न्यूनतम स्तर से भी कम है। इससे फसलों की गुणवत्ता और उत्पादकता में 20 से 30 फीसदी की कमी आ रही है।
प्रदेश सरकार नेशनल प्रोजेक्ट ऑन सॉयल हेल्थ ऑन फर्टिलिटी योजना के तहत मिट्टी की जांच कर उसमें सुधार के लिए किसानों को जागरूक कर रही है। मगर, अब भी पूर्वांचल भर में मिट्टी की पोषकता में कोई खास सुधार नहीं हुआ है।
10 जिलों में इस साल 2,32,400 मिट्टी के नमूने की जांच का लक्ष्य रखा गया है। इसमें 70 फीसदी की जांच हो चुकी है। 30 फीसदी मिट्टी के नमूनों की जांच रबी सीजन में होगी। अभी जांच में नाइट्रोजन, जीवांश कार्बन, फाॅस्फेट, सल्फर, जिंक, आयरन की मात्रा मानक से काफी कम है।
इन पोषक तत्वों का स्तर न्यूनतम से भी नीचे है। इन जिलों में पोटाश मध्यम और काॅपर की स्थिति थोड़ी ठीक है। आजमगढ़ का कुछ हिस्सा ऊसर और सोनभद्र के कुछ हिस्से पथरीले होने की वजह से यहां की मिट्टी में कोई खास सुधार नहीं है।
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