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स्पोर्ट्स में नाम कमाने के बाद कुछ खिलाड़ियों ने सिनेमा को अपना ठिकाना बनाया और यहां भी सफल रहे. लंबे-चौड़े, मजबूत कद-काठी वाले एथलीट प्रवीण कुमार सोबती उन्हीं चेहरों में से एक थे. स्पोर्ट्स में नाम कमाने के बाद वह अभिनय की दुनिया में कैसे आए और पर्दे पर छाए, इसकी भी दिलचस्प कहानी है.
नई दिल्ली: भारत के एंटरटेनमेंट जगत में कई ऐसे कलाकार हुए, जिनका सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा. बीआर चोपड़ा की ‘महाभारत’ के भीम उर्फ प्रवीण कुमार सोबती का जीवन भी ऐसा ही था. उनका जन्म 6 दिसंबर 1947 को पंजाब के तरनतारन जिले के सरहाली कलां गांव में हुआ था. वे बचपन से ही अपनी ऊंचाई और ताकत की वजह से सबका ध्यान खींचते थे. स्कूल में खेल-कूद में इतना अच्छा परफॉर्म किया कि परिवार ने भी उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. उनका रुझान एथलेटिक्स की ओर था. 18 साल की उम्र में उन्हें सीमा सुरक्षा बल (BSF) में नौकरी मिल गई. यहीं रहते हुए अधिकारियों ने उनकी एथलेटिक क्षमता पर ध्यान दिया और उन्हें ट्रेनिंग दिलाई. इसी के बाद उनका असली स्पोर्ट्स सफर शुरू हुआ.
1960 और 70 के दशक में प्रवीण कुमार भारत के टॉप हैमर और डिस्कस थ्रो खिलाड़ियों में गिने जाते थे. उन्होंने 1966 के एशियाई खेलों में डिस्कस थ्रो में गोल्ड और हैमर थ्रो में कांस्य पदक जीता. इसी साल कॉमनवेल्थ गेम्स में हैमर थ्रो में रजत पदक भी हासिल किया, जो आज तक भारत का इस स्पर्धा में एकमात्र पदक माना जाता है. 1970 के एशियाई खेलों में उन्होंने एक बार फिर डिस्कस थ्रो में गोल्ड जीतकर अपना दबदबा दिखाया. 1974 के एशियाई खेलों में वे डिस्कस थ्रो के लिए रजत पदक लेकर लौटे.
ओलंपिक में भारत को किया रीप्रेजेंट
प्रवीण कुमार सोबती ने 1968 मेक्सिको और 1972 म्यूनिख ओलंपिक में भारत को रीप्रेजेंट किया. खेलों में उनके शानदार योगदान के लिए उन्हें 1967 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया. यह वही समय था जब वे देश के सबसे मजबूत और लोकप्रिय एथलीट बन चुके थे. खेल से लेकर एक्टिंग तक का सफर पूरी तरह संयोग भरा था. स्पोर्ट्स करियर के अंतिम दौर में एक फिल्म निर्देशक ने सिर्फ उनकी कद-काठी देखकर उन्हें फिल्म में लेने का प्रस्ताव दिया. एक इंटरव्यू में प्रवीण कुमार सोबती ने खुद बताया था कि यह मौका उन्हें अचानक मिला और उन्होंने इसे सिर्फ इसलिए स्वीकार किया क्योंकि उन्हें लगा कि इससे वे लाइमलाइट में बने रहेंगे.

(फोटो साभार: Instagram@praveenkumar.bheem)
बिना ऑडिशन के मिला भीम का रोल
प्रवीण ने 1982 में आई फिल्म ‘रक्षा’ के जरिए फिल्मों में कदम रखा. इस दौरान उन्हें खबर मिली कि बीआर चोपड़ा टीवी धारावाहिक महाभारत बना रहे हैं और भीम के किरदार के लिए किसी दमदार इंसान की तलाश है. जब प्रवीण उनसे मिलने के लिए कमरे में दाखिल हुए तभी बीआर चोपड़ा चहककर बोल उठे- ‘एकदम परफेक्ट! यही है हमारा भीम.’ इसके बाद, प्रवीण को ऑडिशन देने तक की जरूरत नहीं पड़ी. ‘महाभारत’ में भीम की भूमिका ने उन्हें घर-घर में मशहूर कर दिया और प्रवीण कुमार सोबती भारतीय टेलीविजन के सबसे यादगार किरदारों में से एक बन गए. ये उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट था.
दिल का दौरा पड़ने से हुआ था निधन
प्रवीण कुमार सोबती ने ‘मेरी आवाज सुनो,’ ‘युद्ध,’ ‘इलाका,’ ‘मोहब्बत के दुश्मन,’ ‘शहंशाह,’ ‘लोहा,’ और लगभग 50 से ज्यादा फिल्मों में अलग-अलग किरदार निभाए, लेकिन असली लोकप्रियता उन्हें ‘महाभारत’ के भीम के किरदार से मिली. उनकी ऊंचाई, ताकत, भारी आवाज और सादगी भरे संवाद उन्हें हर घर में पहचान दिला गए. इसके बाद उन्होंने बच्चों के पसंदीदा ‘साबू’ का किरदार भी निभाया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा. एक्टिंग के बाद उन्होंने राजनीति में भी कदम रखा. 2013 में उन्होंने आम आदमी पार्टी के टिकट पर दिल्ली की वजीरपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, हालांकि वे जीत नहीं पाए. बाद में वे बीजेपी में शामिल हो गए. जीवन के अंतिम सालों में उन्हें गंभीर बीमारियों ने घेर लिया. बढ़ती उम्र में उनकी सेहत तेजी से गिरने लगी थी. 7 फरवरी 2022 को 74 साल की उम्र में उनका दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. भले ही वह अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन स्पोर्ट्स में उनका योगदान, महाभारत के भीम की उनकी शानदार इमेज और उनकी अदम्य ऊर्जा उन्हें हमेशा जीवित रखेगी.
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अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें
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