वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व राजनयिक शशि थरूर ने कहा कि वह इस बात से ‘हैरान और दुखी’ हैं कि भारत आज भी उन कुछ लोकतांत्रिक देशों में शामिल है, जहां वैवाहिक दुष्कर्म को गंभीर अपराध नहीं माना जाता, जबकि देश में अन्य मामलों के लिए कड़े दुष्कर्म विरोधी कानून मौजूद हैं। कोलकाता में प्रभा खैतान फाउंडेशन और फिक्की लेडीज ऑर्गनाइजेशन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि ‘भारत में पत्नी की सहमति के बिना पति द्वारा किया गया दुष्कर्म कानूनी रूप से दुष्कर्म नहीं माना जाता, यह चौंकाने वाला है और महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन है।’
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अपवाद ‘न्याय का मजाक’ है- थरूर
इस दौरान शशि थरूर ने सवाल उठाया कि जब किसी भी महिला के साथ जबरदस्ती करना अपराध है, तो पति को इस कानून से छूट क्यों दी गई है? उनके अनुसार यह छूट पुरानी सोच पर आधारित है जहां माना जाता था कि शादी एक पवित्र बंधन है और उसके अंदर होने वाली हर बात को अपराध नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि यह अपवाद ‘न्याय का मजाक’ है, खासकर उन मामलों में जहां पति-पत्नी अलग रह रहे हों लेकिन कानूनी तौर पर तलाक न हुआ हो।
वैवाहिक दुष्कर्म प्रेम नहीं, हिंसा है- थरूर
कांग्रेस सांसद ने उदाहरण देते हुए कहा कि ‘कई बार तलाक का उच्चारण हो चुका होता है, पति अलग रहता है, फिर भी वह जब चाहे पत्नी पर जबरदस्ती करता है, और कानून कुछ नहीं कर पाता क्योंकि कागजों में वे अभी भी पति-पत्नी हैं।’ वहीं एक छात्रा के सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि ‘वैवाहिक दुष्कर्म प्रेम नहीं, हिंसा है। इसे अपराध माना जाना चाहिए।’ उन्होंने इस विषय पर सरकार द्वारा ध्यान न दिए जाने पर भी निराशा जताई और कहा कि ‘इस पर महिला मंत्रियों ने भी गंभीरता नहीं दिखाई।’
प्रवासन पर वैश्विक शत्रुता की चर्चा
इस कार्यक्रम में विदेशों में भारतीयों और प्रवासियों के प्रति बढ़ती नफरत पर पूछे गए सवाल पर थरूर ने कहा कि ‘दुनिया भर में प्रवासियों के प्रति शत्रुता और जेनोफोबिया बढ़ रहा है। लोग महसूस करते हैं कि बाहरी लोग उनकी नौकरियों और सपनों को छीन रहे हैं।’ उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे विदेश जाकर ज्ञान अर्जित करें, परंतु अंततः देश की सेवा के लिए वापस लौटें, ‘आपका शहर, आपका देश आपको चाहता है।’
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परिवार, राजनीति और भाषा पर बेबाक बातें
शशि थरूर ने राजनीतिक जीवन में अपनी बहनों और परिवार द्वारा दी गई भावनात्मक मजबूती के लिए उनका धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि राजनीति में सबसे जरूरी है ‘अपने मूल्यों और विश्वासों के प्रति ईमानदार रहना।’ अपनी अंग्रेजी के चर्चित शब्दों पर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि उनका मकसद हमेशा लोगों को समझना और अपनी बात समझाना रहा है, ‘यदि कोई नहीं समझे, तो ऐसी भाषा का क्या लाभ।’ घर में क्या वे कूटनीतिक बने रहते हैं? इस पर उन्होंने चुटकी ली, ‘घर पर मैं कूटनीतिक नहीं हूं। वहां किसी पार्टी लाइन की चिंता नहीं रहती!’











