पड़ोसी देश में हाल की घटनाओं के कारण भारत और बांग्लादेश के संबंधों में तनाव बढ़ गया है। पूर्व कूटनीतिज्ञ महेश सचदेव ने कहा कि ढाका की अंतरिम सरकार चाहती है कि स्थिति शांत हो जाए और भारत भी इसी भावना का समर्थन करने के लिए तैयार रहेगा। भारत ने एक हफ्ते में ही दूसरी बार मंगलवार को बांग्लादेश के उच्चायुक्त को तलब किया। बांग्लादेश ने भी अपने मिशन की सुरक्षा को लेकर भारत के राजदूत को तलब किया था।
महेश सचदेव अल्जीरिया और नॉर्वे में भारत के राजदूत और नाइजीरिया में उच्चायुक्त रह चुके हैं। उन्होंने बताया कि भारत और बांग्लादेश दोनों ही द्विपक्षीय संबंधों में तनाव को समझने और उसे कम करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, उच्चायुक्त दोनों देशों की राजधानी में उच्च पदस्थ व्यक्ति होते हैं और उन्हें विदेश मंत्रालय में तलब करना एक संकेत है कि शीर्ष स्तर पर किसी विशेष घटना पर ध्यान दिया जाए। मुझे लगता है कि यह दोनों पक्षों के बीच उच्चतम स्तर पर समझ बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा है।
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सचदेव ने कहा कि विदेश मंत्रालय (एमईए) ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया कि बांग्लादेशी उच्चायुक्त को तलब करने का कारण क्या था। जब यह जानकारी दी जाएगी, तभी इसके उद्देश्य और सफलता के बारे में ठीक से बताया जा सकेगा। उन्होंने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार चाहती है कि स्थिति शांत रहे और पड़ोसी देश में असंतोष का प्रभाव दोनों देशों के संबंधों पर न पड़े।
सचदेव ने कहा, मुझे लगता है यह एक सकारात्मक संकेत है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार चाहती है कि स्थिति शांत हो और बांग्लादेश में जो कुछ भी हो रहा है, वह भारत और बांग्लादेश के अच्छे पड़ोसी संबंधों को प्रभावित न करे। भारत भी ऐसी भावना का समर्थन करने के लिए तैयार है।
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भारत ने बांग्लादेश के उच्चायुक्त को उस समय तलब किया, जब पड़ोसी देश में छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या और दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा हत्या के कारण विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। दीपू दास की हत्या बांग्लादेश के मैमेंसिंह जिला में हुई, जिससे व्यापक आलोचना हुई और देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर सवाल उठे।
बांग्लादेश के शिक्षा सलाहकार सीआर अबरार ने अंतरिम सरकार की ओर से दीपू दास के परिवार से मुलाकात की और सहानुभूति जताते हुए समर्थन का आश्वासन दिया। बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के कार्यालय ने भी दीपू चंद्र दास की हत्या पर गहरा दुख व्यक्त किया और उनके परिवार के प्रति संवेदनाएं प्रकट कीं। मुलाकात के दौरान शिक्षा सलाहकार ने दीपु दास के पिता रबीलाल दास से बातचीत की।
उन्होंने दोहराया कि यह हत्या एक खौफनाक और निंदनीय अपराध है, जिसका बांग्लादेशी समाज में कोई स्थान नहीं है। किसी भी आरोप, अफवाह या धार्मिक मतभेद से हिंसा को जायज नहीं ठहराया जा सकता। किसी व्यक्ति को कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं है।












