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Basu Chatterjee Best movies : ये दास्ता है बॉलीवुड के उस महान फिल्ममेकर की जिन्होंने मिडिल वर्ग को ध्यान में रखकर फिल्में बनाईं. इन फिल्मों में एक अपनापन था. हर घर की कहानी थी. भारतीय समाज के मुद्दे थे. इन कहानियों को पर्दे पर हल्के-फुलके अंदाज में उतारने का काम बासु चटर्जी ने किया. 10 जनवरी 1930 को अजमेर शहर में जन्मे बासु चटर्जी ने 70 और 80 के दशक में कम बजट की ऐसी फिल्में बनाईं जिन्होंने दर्शकों पर अमिट छाप छोड़ी. आज इन फिल्मों की गिनती कल्ट क्लासिक मूवी में होती है. बासु चटर्जी बतौर डायरेक्टर और स्क्रीन राइटर बहुत मशहूर हुए. यह बात बहुत ही कम लोग जानते होंगे कि बासु चटर्जी ने 18 साल तक बतौर कार्टूनिस्ट भी काम किया. गीतकार शैलेंद्र की ‘तीसरी कसम’ फिल्म से अपने करियर की शुरुआत की. फिर इन्होंने ‘सारा आकाश’ फिल्म बनाई जो कि उपन्यासकार राजेंद्र यादव के उपन्यास पर बेस्ड थी. इस फिल्म के बासु चटर्जी को बेस्ट स्क्रीनप्ले फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला.
70-80 के दशक में कुछ ऐसे फिल्मकार भी हुए जिन्होंने लो बजट की सार्थक और दिल को छू लेने वाली फिल्में बनाईं. इन फिल्मों को कहानी देखकर दर्शकों को ऐसा लगता था जैसे उनकी स्टोरी पर्दे पर चल रही हो. बासु चटर्जी ऐसी ही फिल्में बनाने के लिए जाने जाते हैं. बासु चटर्जी ने सिर्फ 4 साल के अंतराल में चार ऐसी फिल्में बनाईं जो कालजयी मानी जाती हैं. इन फिल्मों को पूरे परिवार के साथ बैठकर देखा जा सकता है. हल्के-फुल्के अंदाज में चुटीली बातें इन फिल्मों में देखी जा सकती है. ये फिल्में थीं : पिया का घर (1972), रजनीगंधा (1974), छोटी सी बात (1975) और चितचोर (1976) . इनमें से तीन फिल्मों में आमोल पालेकर हीरो थे. आइये जानते हैं इन फिल्मों से जुड़े दिलचस्प तथ्य….

सबसे पहले बात करते हैं 1972 में आई ‘पिया का घर’ फिल्म की जिसे बासु चटर्जी ने डायरेक्ट किया था. प्रोड्यूसर ताराचंद्र बड़जात्या थे. स्टोरी वसंत पी. काले ने लिखी थी. स्क्रीनप्ले राम केलकर ने लिखा था. जया भादुड़ी और अनिल धवन लीड रोल में थे. म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का था. गीतकार आनंद बख्शी थे. 25 फरवरी 1972 को रिलीज यह एक रोमांटिक कॉमेडी फिल्म थी. मराठी फिल्म ‘मुंबईचा जवाई’ का रीमेक थी. फिल्म 1970 के दशक में मुंबई में रहने वाले लोगों की जिंदगी की मुश्किलों को दिखाती है. पहले इस फिल्म के लिए आमोल पालेकर ही पहली पसंद थे लेकिन बासु चटर्जी से बात नहीं बनी. ऐसे में अनिल धवन को लीड रोल में लिया गया. अनिल धवन, बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर डेविड धवन के भाई हैं. फिल्म का एक गाना ‘ये जीवन है..’ किशोर कुमार की आवाज में बहुत पॉप्युलर हुआ था. 2022 में आई फिल्म ‘ऊंचाई’ में यह सॉन्ग बैकग्राउंड में बार-बार यूज हुआ था .

‘पिया का घर’ में लीड रोल में नजर आए जया भादुड़ी और अनिल धवन FTII में बैचमेट थे. अनिल धवन ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘मुझे राजश्री प्रोडक्शन से कॉल आया था. मैं जब ऑफिस पर पहुंचा तो देखा कि वहां टेबल पर कई मैगजीन पड़ी हैं. उनके कवर पेज पर मेरा फोटो है. मैं हैरान रह गया. यह ताराचंद बड़जात्या के काम करने का तरीका था. उन्होंने मुझसे कहा कि हम आपको अपनी फिल्म में ले रहे हैं. आप बासु चटर्जी से मिल लीजिए. मुझे 500 रुपये कपड़े खरीदने के लिए दिए. कुछ पैसे बच गए तो हमने उन्हें लौटाए. चार रुपये देखकर बोले कि मैं इन्हें किस अकाउंट में डालूं. पिया का घर को आज भी लोग बहुत पसंद करते हैं.’
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1974 में अमोल पालेकर ने बॉलीवुड में रजनीगंधा फिल्म से एंट्री ली थी. एक्ट्रेस विद्या सिन्हा के साथ उनकी फिल्म आई थी. फिल्म की कहानी प्रख्यात लेखिका मन्नू भंडारी की कहानी ‘यही सच है’ से ली गई थी. प्रेम में डूबी स्त्री के मनोविज्ञान को पर्दे पर दिखाया गया. रजनीगंधा फिल्म में अमोल पालेकर, विद्या सिन्हा और दिनेश ठाकुर लीड रोल में थे. सुरेश जिंदल-कमल सहगल ने फिल्म को प्रोड्यूस किया था. गीतकार योगेश गौड़ थे. म्यूजिक सलिल चौधरी का था. अमोल पालेकर और दिनेश ठाकुर थिएटर से आए थे. फिल्म में सिर्फ दो गाने ‘कई बार यूं ही देखा है, तेरे मन की सीमा रेखा है..’ और ‘रजनीगंधा फूल तुम्हारे महके यूं ही जीवन में.’ थे. दोनों ही गाने कालजयी माने जाते हैं.’कई बार यूं ही देखा है’ गाने के लिए मुकेश को सर्वश्रेष्ठ प्लेबैक सिंगर का अवॉर्ड मिला था.

रजनीगंधा मूवी जब बनकर तैयार हुई तो छह माह तक कोई डिस्ट्रीब्यूटर ही नहीं मिला. बाद में राजश्री प्रोडक्शन के ताराचंद बड़जात्या ने इसे खरीदा और मुंबई क्षेत्र में रिलीज किया. फिल्म की शुरुआत धीमी रही लेकिन आगे जाकर बहुत सफल हुई और यादगार फिल्म बन गई. फिल्म का टाइटल और रजनीगंधा के फूल कभी नए तो कभी पुराने संबंधों का प्रतीक बनकर उभरते हैं. रजनीगंधा फिल्म की कहानी अपने समय से बहुत आगे की थी. पहले और दूसरे प्रेम में फंसी स्त्री की उलझनों को खूबसूरती से बयां करती है. रजनीगंधा आमोल पालेकर की पहली हिंदी फिल्म थी. मूल कहानी कानपुर-कोलकाता पर थी. बासु चटर्जी ने स्क्रीनप्ले लिखते समय इसे बदलकर दिल्ली-मुंबई पर बेस्ड कर दिया था. रजनीगंधा को तीन फिल्म फेयर अवॉर्ड मिले थे. बेस्ट फिल्म का फिल्म फेयर अवॉर्ड प्रोड्यूसर सुरेश जिंदल को मिला था. बेस्ट फिल्म क्रिटिक्स का अवॉर्ड बासु चटर्जी को मिला था.

साल 1975 की शुरुआत में ही बासु चटर्जी की फिल्म ‘छोटी सी बात’ सिनेमाघरों में आई थी. यह फिल्म 9 जनवरी 1975 को रिलीज हुई थी. इस फिल्म में आमोल पालेकर, विद्या सिन्हा, अशोक कुमार और असरानी लीड रोल में थे. म्यूजिक सलिल चौधरी का था. गीतकार योगेश गौड़ थे. फिल्म में कुल 3 गाने रखे गए थे. ये थे : ‘जाने मन जाने मन तेरे दो नयन, ‘ना जाने क्यूं होता है ये जिंदगी के साथ’ और ‘ये दिन क्या आए’. दो गाने बहुत पॉप्युलर हुए थे. ‘छोटी सी बात’ एक रोमांटिक कॉमेडी फिल्म थी. इसे 1970 के दशक की बेस्ड कॉमेडी फिल्म माना जाता है. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट रही थी. इस मूवी को फिल्मफेयर में 6 नॉमिनेशन मिले थे. इनमें से बेस्ट स्क्रीनप्ले का फिल्मफेयर अवॉर्ड बासु चटर्जी को मिला था. यह फिल्म 1960 की एक ब्रिटिश फिल्म ‘स्कूल फॉर स्काउंड्रल्स’ का रीमेक थी. प्रोड्यूसर बीआर चोपड़ा थे.

‘छोटी सी बात’ फिल्म का बजट करीब 50 लाख था. मूवी ने करीब 2 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह एक सुपरहिट फिल्म साबित हुई थी. दिलचसप बात यह है कि फिल्म के पोस्टर में धर्मेंद्र-हेमा मालिनी की जोड़ी दिखाई गई थी. अमोल पालेकर-विद्या सिन्हा को एक कोने में जगह दी गई थी. धर्मेंद्र और हेमा मालिनी सिर्फ एक गाने में नजर आए थे. बीआर चोपड़ा ने जमीर और ‘छोटी सी बात’ को एक साथ प्रोड्यूस किया था. जमीर में अमिताभ बच्चन सायरा बानो और शम्मी कपूर थे. यह फिल्म फ्लॉप हो गई थी जबकि छोटी सी बात सुपरहिट साबित हुई थी.

30 जनवरी 1976 को बासु चटर्जी के निर्देशन में बनी एक फिल्म ‘चितचोर आई थी जिसमें अमोल पालेकर और जरीन वहाब की जोड़ी लीड रोल में थी. मूल स्टोरी सुबोध घोष की एक बंगाली कहानी से ली गई थी. राजश्री प्रोडक्शन के बैनर ताराचंद बड़जात्या ने फिल्म को प्रोड्यूस किया था. फिल्म में एके हंगल, दीना पाठक, विजेंद्र घाटगे और मास्टर राजू नजर अहम भूमिकाओं में थे. फिल्म का सदाबहार म्यूजिक रविंद्र जैन ने दिया था. गाने भी रविंद्र जैन ने लिखे थे. ‘आज से पहले, आज से ज्यादा’, ‘जब दीप जले आना, जब शाम ढले आना’, ‘गोरी तेरा गांव बड़ा प्यारा’ और ‘तू जो मेरे सुर में सुर मिला ले’ सॉन्ग बहुत ही कर्णप्रिय थे. येशुदास को ‘गोरी तेरा गांव बड़ा प्यारा, मैं तो गया मारा, आके यहां रे’ के लिए बेस्ट प्लेबैक सिंगर का नेशनल अवॉर्ड मिला था. चितचोर फिल्म को दो नेशनल अवॉर्ड और एक फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था.

चितचोर फिल्म को अंधेरी मुंबई के सिर्फ एक थिएटर में जानबूझकर प्रोड्यूसर ताराचंद बड़जात्या ने रिलीज किया था. यह बात डायरेक्टर बासु चटर्जी को पसंद नहीं आई थी. वेटरन एक्टर अमोल पालेकर ने अपने एक इंटरव्यू में इसका खुलासा किया था. ताराचंद ने अपने जवाब में कहा था कि फिल्म जरूर हिट होगी. हम माहौल बनाना चाहते हैं और यह संदेश देना चाहते हैं कि अगर यह फिल्म देखनी है तो यहां आकर देखे. 100 दिन तक फिल्म सिर्फ उसी थिएटर में चली. फिर दूसरे थिएटर्स में रिलीज हुई.. 45 लाख के बजट में बनी इस फिल्म ने 1.15 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन कर सबको हैरान कर दिया था. यह फिल्म जरीना वहाब के करियर के लिए टर्निंग प्वॉइंट साबित हुई. उनकी गिनती टॉप एक्ट्रेस में होने लगी.
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