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Bollywood Blockbuster Movies : बॉलीवुड में राइटर्स किसी ना किसी सत्य घटना, हॉलीवुड फिल्म या फिर किसी उपन्यास से इंस्पायर्ड होकर फिल्में लिखते रहे हैं. कई बार हॉलीवुड की किसी फिल्म का बैकग्राउंड भारतीय अंदाज में रखकर भी फिल्में बनाई गईं. नागिन मूवी इसका सबसे बेस्ट उदाहरण है. कई बार किसी उपन्यास की कहानी को आधार बनाकर फिल्म बनाई गई. 49 साल के अंतराल में ऐसी ही तीन फिल्में बनाई गईं जिनकी मूल कहानी ‘एक जादुई बॉक्स’ से निकली. इन तीनों फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर कमाई के नए रिकॉर्ड बनाए. दो फिल्में ब्लॉकबस्टर रहीं. एक फिल्म पहले फ्लॉप हुई, फिर हिट निकली. ये फिल्में कौन सी थीं, आइये जानते हैं.
कई बार किसी उपन्यास में ऐसी कहानी छिपी होती है, जिस पर फिल्म बनकर पर्दे पर आती है, तो यकीन करना मुश्किल हो जाता है. अच्छे फिल्में देखने के बाद जब उसकी जानकारी जुटाते हैं तो पता चलता है कि यह फिल्म अमुक उपन्यास पर बेस्ड है. 49 साल के अंतराल में सिनेमाघरों में तीन ऐसी हिंदी फिल्में आईं जिन्होंने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया. तीनों ही फिल्में मराठी उपन्यास पर बेस्ड थीं. ये फिल्में थीं : दो रास्ते (1969), तुम्बाड़ (2018) और छावा. दो रास्ते जहां ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई वहीं छावा ने बॉक्स ऑफिस पर कमाई का नया रिकॉर्ड बनाया था. तुम्बाड़ ने री-रिलीज पर इतिहास रच दिया था.

सबसे पहले बात करते हैं 1969 में आई राजेश खन्ना-मुमताज की फिल्म ‘दो रास्ते’ की. बच्चे बड़े होकर उन्हीं माता-पिता का साथ छोड़ देते हैं, जो उनकी खुशियों के लिए हर सुख-दुख सहते हैं. समाज की इस कड़वी सच्चाई पर बनी फिल्म का नाम ‘दो रास्ते’ था. फिल्म को राज खोसला ने डायरेक्ट और प्रोड्यूस किया था. म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का था. गीतकार आनंद बख्शी थे. फिल्म में राजेश खन्ना, मुमताज, बलराज साहनी, प्रेम चोपड़ा और बिंदु जैसे सितारों ने अपनी एक्टिंग का जलवा बिखेरा था. फिल्म के तीन कालजयी गाने थे. इन गानों में ‘ये रेशमी जुल्फें, ये शरबती आंखें’ और ‘तूने काजल लगाया दिन में रात हो गई’ और ‘बिंदिया चमकेगी, चूड़ी खनकेगी’ शामिल हैं.

दो रास्ते फिल्म की कहानी मराठी उपन्यासकार चंद्रकात काकोडकर के उपन्यास ‘नीलाम्बरी’ पर बेस्ड थी. करीब 40 लाख के बजट में बनी इस फिल्म ने 3 करोड़ से ज्यादा की कमाई की थी. यह एक ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई थी. सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म में राजेश खन्ना दाढ़ी-मूंछ में नजर आए थे. इसके पीछे की वजह बेहद रोचक है. दरअसल, उसी समय वो बीआर चोपड़ा की ‘इत्तिफाक’ में भी काम कर रहे थे. दोनों ही फिल्में फैमिली ड्रामा थीं. ऐसे में दोनों फिल्मों में राजेश खन्ना का गेटअप एक जैसा देखने को मिलता है. काकोडकर को बेस्ट स्टोरी का फिल्म फेयर अवॉर्ड भी मिला था. दो रास्ते फिल्म से सबसे ज्यादा फायदा मुमताज को हुआ. वो इंडस्ट्री में ए-ग्रेड की हीरोइन में शामिल हो गईं. इस फिल्म से पहले वो बी-ग्रेड की फिल्मों में काम किया करती थीं. इस फिल्म में मुमताज का ग्लैमरस अंदाज-खूबसूरती देखने को मिली थी. फिल्म में एक रेन डांस भी जिसने जवां दिलों में हलचल पैदा कर दी थी.
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2018 में एक ऐसी फिल्म आई जो लीक से हटकर थी. इस फिल्म की कहानी, पिक्चराइजेशन, फिल्मांकन-पटकथा-संवाद-स्क्रीनप्ले बहुत ही यूनिक था. इससे पहले हिंदी सिनेमा में ऐसी कहानी नहीं आई थी. बात हो रही है 12 दिसंबर 2018 को रिलीज हुई तुम्बाड फिल्म की. इस फिल्म की स्टोरी इतनी दिलचस्प थी कि सिनेमाघरों से बाहर निकलने के बाद भी कई दिन तक दर्शकों के दिल-दिमाग में फेवीकोल की तरह चिपकी रही. तुम्बाड फिल्म की कहानी मराठी में रहस्यमयी कहानियां लिखने वाले नारायण धारप की स्टोरी से ली गई थी. फिल्म का टाइटल महाराष्ट्र के श्रीपद नारायण पेंडसे के 1987 में आए एक नॉवेल तुम्बाड़ के नाम पर रखा गया था. इस फिल्म की स्क्रिप्ट पूरे 21 साल तक भटकती रही. डायरेक्टर राही अनिल बर्वे के एक दोस्त ने 1993 में महाराष्ट्र के भंडारा-गोंदिया जिएले में स्थित नागजीरा वर्ल्डलाइफ सेंक्चुरी एक बहुत ही डरावनी कहानी सुनाई थी.

राही ने ‘तुम्बाड’ का पहला ड्राफ्ट 1997 में लिखा था. 2009-2010 में उन्होंने 700 पन्नों की स्क्रिप्ट लिखी. 2008 से फिल्म बनना शुरू हुई. पहले नवाजुद्दीन सिद्दीकी लीड रोल में थे. अचानक प्रोड्यूसर पीछे हट गए तो फिल्म की शूटिंग बंद हो गई. 2012 में फिल्म ‘तुम्बाड’ फ्लोर पर आई लेकिन एडिंटिंग के दौरान अनिल राही फिल्म से संतुष्ट नहीं थे. उन्होंने 2015 में फिर से स्क्रिप्ट लिखी. फिल्म को फिर से शूट किया गया. तुम्बाड फिल्म में सोहम शाह, ज्योति मालशे, धुंधीराज जोगालेकर और अनीता दाते लीड रोल में थे. 5 साल और 4 मानसून में फिल्म का शूट कंप्लीट हुआ. फिल्म की लीड हीरो सोहम शाह ने फिल्म के लिए अपना घर-कार बेच दी. फिल्म का दुर्भाग्य यह रहा कि जब यह मूवी रिलीज हुई तो दर्शकों को समझ में नहीं आई. 15 करोड़ के बजट में बनी यह फिल्म सिर्फ अपनी लागत निकाल पाई थी और फ्लॉप हो गई.

पूरे छह साल बाद 2024 इस मूवी को फिर से रिलीज किया गया. तब तक यह फिल्म कल्ट मूवी बन चुकी थी. मूवी की एक फैन फॉलोइंग थी. इस बार यह फिल्म मैसिव हिट रही. इस मूवी को बॉलीवुड की अब तक की बेस्ट एक्सपेरिमेंटल फिल्म माना जाता है. तुम्बाड़ फिल्म की कहानी पूर्ति की देवी और श्रापित देवता हस्तर, महाराष्ट्र के तुम्बाड़ गांव के इर्द-गिर्द घूमती है. पूर्ति की देवी को अपनी पहली संतान हस्तर से लगाव था. हस्तर ने धोखे से देवी का सोना चुराया था. जैसे ही वह अनाज की ओर बढ़ा तो सभी देवी-देवताओं ने उस पर हमला कर दिया. देवी ने उसे इस शर्त पर बचा लिया कि उसे कोई नहीं पूजेगा. कई साल तक मां की कोख में सोता रहा. तुम्बाड़ जिले के लोगों ने उसकी पूजा शुरू की, उसका मंदिर बना दिया तो देवता नाराज हो गए. हस्तर खुश हुआ और उसने अपना सोना मंदिर के गर्भगृह में दफना दिया.

कहनी में ट्विस्ट तब आता है जब आटे की हर गुड़िया से एक हस्तर जन्म लेता है. विनायक यह देखकर घबरा जाता है. वह आटे की बची हुई गुड़ियां अपने शरीर से बांध लेता है और रस्सी के सहारे वहां से भागने की कोशिश करता है. इस दौरान सारे हस्तर उसकी ओर लपकते हैं. अपने बेटे की जान बचाने के लिए विनायक खुद को हस्तर के श्राप में फंसा देता है. हस्तर से पोटली चुराकर अपने बेटे की ओर फेंकता है लेकिन उसका बेटा समझ जाता है कि लालच बुरी बला है. वो विनायक के शरीर में आग लगा देता है और उसे जलाकर श्राप से मुक्ति देता है. इस फिल्म का लास्ट सीन कई दर्शकों की समझ में नहीं आया था. फिल्म का लास्ट सीन ओपर एंडेट था. यानी डायरेक्टर की ओर से कोई हिंट नहीं दिया गया. दर्शकों ने अपने हिसाब से लास्ट सीन की व्याख्या की. दर्शकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही आया कि आखिर आटे की हर गुड़िया से इतने हस्तर कैसे जन्म ले गए. कुछ फिल्म समीक्षकों ने इसके पीछे की वजह बताते हुए कहा कि हस्तर पर देवताओं ने हमला करके उसका शरीर छिन्न-भिन्न कर दिया था. ऐसे में आटे की ज्यादा से ज्यादा गुड़ियां देखकर हर उस छिन्न-भिन्न अंग से हस्तर बनने लगे थे. इसका अंदाजा विनायक राव को बिल्कुल भी नहीं था.

2025 की शुरुआत में ही बॉक्स ऑफिस पर एक ऐसी फिल्म आई जिसे देखकर सिनेमाघरों में दर्शक गुस्सा-कोफ्त-क्षोभ के चलते खूब रोए. इस फिल्म का नाम ‘छावा’ था जो कि पीरियड ड्रामा फिल्म थी. 14 फरवरी 2025 को रिलीज हुई इस फिल्म में छत्रपति शिवाजी महाराज के बेटे संभा जी महाराज के बलिदान और औरंगजेब की क्रूरता को इतना रियलिस्टिक तरीके से दिखाया गया था कि सिनेमाघरों में दर्शक हिल गए थे. औरंगजेब की इतनी क्रूरता के बाद भी संभाजी के चेहरे पर शिकन तक नहीं आई. इस सीन ने दर्शकों को भावुक कर दिया था. पूरी फिल्म में विकी कौशल छाए रहे थे. उनकी गेटअप, फिजिकल अपीयरेंस और डायलॉग डिलीवरी कमाल की थी. इस फिल्म को लक्ष्मण उतेकर ने डायरेक्ट किया था. स्क्रीनप्ले भी लिखा था. यह फिल्म भी शिवाजी सावंत के प्रसिद्ध मराठी उपन्यास ‘छावा’ पर बेस्ड थी. इस फिल्म ने ₹800 करोड़ से ज्यादा वर्ल्ड वाइड कलेक्शन किया था. यह एक ऑलटाइम ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई.
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