Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति का त्योहार 14 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा. सूर्य देव जब मकर राशि में प्रवेश कर उत्तरायण होते हैं, तब मकर संक्रांति मनाई जाती है. पर्व-त्योहार पूजा-पाठ के साथ ही परिवार के साथ खुशी मनाने का जरिया भी होते हैं.
पर्व-त्योहारों के माध्यम से लोग परिवार के साथ समय बिताते हैं और खुशियों के पल बिताते हैं. लेकिन कई बार कुछ अप्रिय घटनाएं पर्व और खुशियों पर ग्रहण लगा देती है. खासकर जब त्योहार के दिन परिवार में किसी की मृत्यु हो जाए तो इससे अधिक दुखद समय कुछ नहीं हो सकता. ऐसा ही हुआ पंकज के साथ.
दरअसल कुछ साल पहले मकर संक्रांति के दिन ही पंकज के परिवार में मकर संक्रांति के दिन परिजन की मृत्यु हो गई. कई लोगों ने कहा कि, जिस पर्व पर किसी की मृत्यु हो जाती है, वह पर्व हमेशा के लिए बंद हो जाता है, यानी नहीं मनाया जाता. आइए ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास से जानते हैं, क्या सच में मकर संक्रांति के दिन परिवार में किसी की मृत्यु हो जाए तो पर्व हमेशा के लिए नहीं मनाया जा सकता.
मकर संक्रांति पर निधन, क्या कभी नहीं मनेगा पर्व
अनीष व्यास बताते हैं कि, जिस वर्ष परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु होती है, उस वर्ष त्योहार नहीं मनाना चाहिए. खासकर 13 दिनों तक तो किसी तरह के धार्मिक अनुष्ठान या साधारण पूजा-पाठ भी नहीं करना चाहिए. लेकिन इसके बाद परिवार के लोग अपनी पारिवारिक इच्छा से पर्व मना सकते हैं. इसमें किसी प्रकार का दोष नहीं है. सदैव के लिए त्योहार निषेध नहीं रहता है. शोक काल पूर्ण होने और वार्षिक श्राद्ध संपन्न होने के बाद पर्व फिर से मनाए जा सकते हैं. इसलिए शोक समाप्त होने के बाद पर्व मनाने को धर्मविरुद्ध नहीं माना जाता है. आप परिवार की इच्छा से सादगी और स्मृति भाव के साथ पर्व मना सकते हैं. साथ ही पर्व के दिन दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना और गरीबों में दान भी जरूर करें.
मकर संक्रांति पर मृत्यु होना, मोक्ष की प्राप्ति
महाभारत के अजेय योद्धा भीष्म पितामह ने अपनी मृत्यु के लिए मकर संक्रांति का दिन चुना था. इसी दिन अपने शरीर का त्याग कर वे देव लोक चले गए. मकर संक्रांति का दिन वही संयोग है जब भागीरथ अपने साथ भगवती गंगा को लेकर गंगा सागर पहुंचे. इन्हीं कारणों से मकर संक्रांति के दिन मोक्ष प्राप्ति के लिए प्रयाग में लोग बड़ी संख्या में गंगा स्नान करते हैं.
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