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Bollywood Cult Classic Movies : कुछ फिल्मों की यादों दिल में बस जाती हैं. वर्षों तक उनके गाने याद रहते हैं. कुछ गाने इतने कर्णप्रिय होते हैं कि मुखड़ा सुनते ही दिल झूमने लगता है. मन गाने लगता है. फिल्म की कहानी, उससे जुड़ी यादें ताजा होने लगती हैं. इन फिल्मों को चाहे कितनी ही बार देख लें, मन नहीं भरता. 75 साल पहले ऐसी ही दो फिल्में रिलीज हुई थीं जिनकी कहानी एकसाथ फाइनल हुई थी. दोनों फिल्मों को गुलजार ने डायरेक्ट किया था. एक फिल्म जहां बॉक्स ऑफिस पर हिट रही तो दूसरी फिल्म मास्टरपीस बन गई. एक फिल्म जब सिनेमाघरों में जोरशोर से चल रही थी, तब उसे बैन कर दिया गया था. दोनों फिल्मों का म्यूजिक बेमिसाल था. ये दोनों फिल्में कौन सी थीं, आइये जानते हैं…….
1975 का नाम लेते ही ‘शोले’, ‘दीवार’ और ‘जय संतोषी मां’ फिल्म का नाम जुबां पर आ जाता है. शोले और दीवार फिल्म के डायलॉग-सींस चेहरे के सामने घूमने लगते हैं. इसी साल दो ऐसी फिल्में आईं जो कालजयी साबित हुईं. दोनों ही फिल्में मसाला फिल्मों से हटकर थीं. इनमें से एक को उस साल बेस्ट मूवी का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था. दोनों ही फिल्मों का डायरेक्शन गुलजार ने किया था. ये फिल्में थीं : आंधी और मौसम. दोनों फिल्मों की कहानी गुलजार के यहां फाइनल हुई थी. आंधी फिल्म को 1976 में आयोजित 23वें फिल्मफेयर अवॉर्ड में 7 कैटेगरी में नामांकन मिला था. इसमें से यह फिल्म दो पुरस्कार जीतने में कामयाब रही थी. दोनों फिल्मों में जैसा म्यूजिक था, वो आज तक फिर कभी सुनाई नहीं दिया. दोनों फिल्मों की गिनती कल्ट क्लासिक मूवी में होती है. आइये जानते हैं दोनों फिल्मों से जुड़े दिलचस्प पहलू…….

सबसे पहले बात करते हैं 14 फरवरी 1975 को रिलीज हुई ‘आंधी’ फिल्म की. यह एक पॉलिटिक ड्रामा फिल्म थी जिसमें संजीव कुमार-सुचित्रा सेन लीड रोल में थे. ओम शिवपुरी, मनमोहन, एके हंगल, सीएस दुबे, ओम प्रकाश और रहमान भी अहम भूमिकाओं में थे. कहा गया कि यह फिल्म पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनके पति फिरोज गांधी के रिश्ते पर बेस्ड थी, लेकिन सच्चाई यह है कि फिल्म तारकेश्वरी सिन्हा और इंदिरा गांधी की लाइफ से इंस्पायर्ड थी. फिल्म का कालजयी म्यूजिक आरडी बर्मन ने तैयार किया था. स्क्रीनप्ले गुलजार ने लिखा था. फिल्म की कहानी कमलेश्वर ने लिखी थी. स्क्रीनप्ले गुलजार-भूषण बनमाली ने लिखा था. प्रोड्यूसर जे. ओमप्रकाश थे.

फिल्म को कल्ट क्लासिक बनाने में सबसे अहम रोल इसके म्यूजिक का था जिसे आरडी बर्मन ने तैयार किया था. फिल्म के ज्यादातर गाने किशोर कुमार -लता मंगेशकर ने गाए थे. फिल्म में कुल 4 गाने रखे गए थे, जिसमें से एक कव्वाली ‘सलाम कीजिए, आली जनाब आए हैं’ भी शामिल थी. फिल्म के तीन गाने ‘तेरे बिना जिंदगी से कोई शिकवा तो नहीं’, ‘तुम आ गए हो तो नूर आ गया है’, और ‘इस मोड़ से जाते हैं, कुछ सुस्त कदम रस्ते’ आज भी उतने ही सदाबहार हैं. इन्हें सुनकर मन एक अलग ही दुनिया में खो जाता है.
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आंधी फिल्म के बनने की कहानी भी दिलचस्प है. राइटर कमलेश्वर डायरेक्टर-गीतकार गुलजार के पास एक कहानी लेकर पहुंचे. गुलजार ने कहानी सुनी तो फिल्म बनाने की दिलचस्पी जताई. उन्हीं दिनों प्रोड्यूसर पी. मल्लिकार्जुन राव ओम प्रकाश एक फिल्म बनाना चाहते थे. गुलजार ने उन्हें कमलेश्वर की कहानी सुनाई लेकिन उन्हें पसंद नहीं आई. वहीं पर मौजूद राइटर भूषण बनमाली ने एक आइडिया सुनाया जो एजे क्रोनिन के उपन्यास ‘द जूडास ट्री’ से इंस्पायर्ड था. तय हुआ कि इस कहानी को डेवलप करके एक फिल्म बनाई जाएगी. हुआ भी ऐसा ही. इस कहानी पर फिल्म मौसम बनी. मौसम फिल्म की कहानी को कमलेश्वर-भूषण बनमाली ने लिखा था. जब कहानी लिखी जा रही थी तो गुलजार ने कमलेश्वर को दोनों कहानियों पर उपन्यास लिखने को कहा. कमलेश्वर ने दो उपन्यास लिखे. एक था ‘आगामी अतीत’ और दूसरी था ‘काली आंधी’. ‘आगामी अतीत’ की कहानी निर्माता पी. मल्लिकार्जुन राव को पसंद आई और उन्होंने फिल्म ‘मौसम’ बनाई.

‘काली आंधी’ उपन्यास पर कोई भी प्रोड्यूसर फिल्म बनाने के लिए तैयार नहीं था. उन्हीं दिनों प्रोड्यूसर जे. ओमप्रकाश ने गुलजार को एक फिल्म का निर्देशन करने के लिए बुलाया. कहानी राइटर सचिन भौमिक ने लिखी थी जो थ्रिलर जैसी थी और एक हॉस्पिटल में चलती है. जे. ओमप्रकाश संजीव कुमार और सुचित्रा सेन को लेकर यह फिल्म बनाने वाले थे लेकिन गुलजार को यह कहानी पसंद नहीं आई. गुलजार ने कहा कि इस फिल्म के लिए सुचित्रा सेन को कलकत्ता से बुलाना ठीक नहीं. उन्हें मुंबई बुलाने के लिए कहानी स्पेशल होनी चाहिए. इसी दौरान गुलजार ने कमलेश्वर के उपन्यास ‘काली आंधी’ की कहानी सुना दी. प्रोड्यूसर जे. ओम प्रकाश को कहानी बेहद पसंद आई. उन्होंने जल्दी से स्क्रीनप्ले तैयार करने के लिए कहा. इस तरह से ‘आंधी’ फिल्म की कहानी फाइनल हुई.

यह सुचित्रा सेन की आखिरी हिंदी फिल्म मानी जाती है. आंधी और मौसम फिल्म की शूटिंग साथ-साथ ही हुई थी. ‘आंधी’ फिल्म की शूटिंग कश्मीर में हुई थी. कहा जाता है कि आंधी फिल्म की शूटिंग के दौरान गुलजार और राखी में होटल में विवाद हुआ और दोनों अलग हो गए. इसके बाद राखी ने फिर से फिल्मों में काम शुरू कर दिया था. कहा जाता है कि होटल में पार्टी हुई. पार्टी के बीच से ही सुचित्रा सेन जाने लगी तो संजीव कुमार ने कलाई पकड़ ली. गुलजार ने बीच-बचाव किया. गुलजार सुचित्रा को होटल के कमरे तक छोड़ने गए लेकिन राखी ने देख लिया. राखी ने कुछ कहा तो गुलजार ने हाथ उठा दिया. फिर क्या था, दोनों हमेशा के लिए अलग हो गए.

आंधी फिल्म जब रिलीज हुई तो कई थिएटर्स ने इसे ‘इंदिरा गांधी और फिरोज गांधी’ की फिल्म बताकर बेचा. कुछ डिस्ट्रीब्यूटर्स ने कई जगह पोस्टर छपवाए गए जिनमें लिखा गया कि पर्दे पर देखिए आजाद भारत की प्रधानमंत्री की कहानी को पर्दे पर देखिए. पूरे देश में बात फैली. गुजरात में विधानसभा चुनाव होने थे. इसी बीच इंदिरा गांधी ने तत्काल सूचना एवं प्रसारण मंत्री आईके गुजराल के साथ फिल्म देखी. आखिरकार सरकार ने ‘आंधी’ पर बैन लगा दिया. देश में इमरजेंसी लगा दी गई. इमरजेंसी के बाद 1977 में सरकार बदली तो फिल्म को फिर से रिलीज किया गया. दूरदर्शन पर भी दिखाया गया. यह एक हिट फिल्म साबित हुई.

अब बात करते हैं मौसम फिल्म की जो 29 दिसंबर 1975 को रिलीज हुई थी. यह एक म्यूजिकल रोमांटिक फिल्म थी. शर्मिला टैगोर-संजीव कुमार इसमें लीड रोल में थे. इस फिल्म को भी गुलजार ने ही डायरेक्ट किया था. गीत-डायलॉग्स गुलजार ने ही लिखे थे. म्यूजिक मदन मोहन का था. बैकग्राउंड स्कोर सलिल चौधरी ने तैयार किया था. संगीतकार मदन मोहन का 14 जुलाई 1975 को निधन हो जाने के बाद म्यूजिक सलिल चौधरी ने तैयार किया था.

मौसम फिल्म का एक गाना ‘दिल ढूंढता है, फिर वही, फुरसत के रात-दिन.’ आज भी उतना ही कर्णप्रिय लगता है. इस गाने की दो धुन मदन मोहन ने बनाई थी. 30 साल बाद 2004 में आई फिल्म ‘वीर-जारा’ में जावेद अख्तर ने ‘तेरे लिए, हम हैं जिए, हर आंसू पिए..’ गाना लिखा था. गुलजार ने ‘दिल ढूंढता है, फिर वही, फुरसत के रात-दिन’ गाना मिर्जा गालिब की गजल से इंस्पायर होकर लिखा था.

मौसम फिल्म जब शूटिंग हो रही थी तब शर्मिला टैगोर और संजीव कुमार के बीच बोलचाल नहीं था. एक दिन शर्मिला टैगोर उनके घर पर पहुंची. खुद आगे बढ़कर हाथ मिलाया और दोस्ती कर ली. मौसम को सेकंड बेस्ट फिल्म फीचर फिल्म का नेशनल अवॉर्ड, शर्मिला टैगोर को बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड , गुलजार को बेस्ट डायरेक्टर का फिल्म फेयर अवॉर्ड मिला था. मौसम को बेस्ट फिल्म का फिल्म फेयर अवॉर्ड भी मिला था. मौसम फिल्म का बजट 1 करोड़ के करीब था और फिल्म कुल 1.25 करोड़ रुपये का ही कलेक्शन कर पाई थी. यह फिल्म आज कल्ट क्लासिक फिल्म की कैटेगरी में आती है.
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