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Bollywood Best Romantic Movie : कुछ फिल्में लार्जर दैन लाइफ होती हैं. इस तरह की फिल्म बनाई नहीं जाती, बस बन जाती हैं. ऐसी ही एक फिल्म 25 साल पहले सिनेमाघरों में आई थी जिसके सभी गाने सुपरहिट थे. हर गाना दर्शकों ने दिल से महसूस किया था. दिलचस्प बात यह थी कि हीरो ही विलेन था जबकि फिल्म में एक भी एक्शन सीन नहीं था. हीरो को बेस्ट विलेन का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था. यह फिल्म कौन सी थी आइये जानते हैं………
कुछ फिल्मों का गीत-संगीत और उसकी कहानी अमर हो जाती है. ऐसी फिल्में कई साल में एक बार बनती हैं. 11 अगस्त 2000 को ऐसी ही एक म्यूजिकल रोमांटिक फिल्म रिलीज हुई थी जिसके किरदार हमेशा के लिए अमर हो गए. गीत-संगीत हर संगीत प्रेमी की धड़कनों में समा गया. इस फिल्म का नाम धड़कन था जिसे धर्मेश दर्शन ने डायरेक्ट किया था. वही धर्मेश दर्शन जिन्होंने 1996 में ‘राजा हिंदुस्तानी’ जैसी ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्म बनाई थी. धड़कन फिल्म में अक्षय कुमार, शिल्पा शेट्टी, सुनील शेट्टी, महिमा चौधरी लीड रोल में थे. डायलॉग नसीम मुकरी-धर्मेश दर्शन ने लिखे थे. स्क्रीनप्ले नसीम मुकरी-राज सिन्हा ने लिखा था. राज सिन्हा फिल्म में असिस्टेंट डायरेक्टर थे. फिल्म का बेहद पॉप्युलर म्यूजिक नदीम-श्रवण की जोड़ी ने कंपोज किया था. गीतकार समीर थे. करीब 9.5 करोड़ के बजट में बनी इस मूवी ने 26.47 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था.

‘धड़कन’ के सभी गाने लोगों ने दिल से महसूस भी किए गए थे. फिल्म के एक गाने ‘दूल्हे का सेहरा सुहाना लगता है’ सुनकर आज भी आंखें नम हो जाती हैं. गाना शिल्पा शेट्टी-अक्षय कुमार पर फिल्माया गया था. इस फेमस सॉन्ग को नुसरत फतेह अली खान ने गाया था. इस गाने को गाते समय वो पूरे 150 बार रोए थे. गीतकार समीर अनजान ने पूरा किस्सा अपने एक इंटरव्यू में बताया था. समीर ने बताया था, ‘नुसरत फतेह अली खान उन दिनों मुंबई आए थे. मैं धड़कन फिल्म के गाने लिख रहा था. दिल ने ये कहा है दिल से…समेत कई गाने रिकॉर्ड हो गए थे. हम लोग उनके फैन थे. मन में इच्छा हुई कि वो हमारी फिल्म का एक गाना गा दें लेकिन दिक्कत यह थी वो बाहर का गाना नहीं गाते थे. हालांकि वो भी नदीम-श्रवण के फैन थे. हम लोग उनसे होटल में मिले और एक गाने की रिक्वेस्ट की. उन्होंने कहा कि गाना तो मैं गाऊंगा लेकिन मुझे पसंद आना चाहिए.’

राजा हिंदुस्तानी जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के गाने लिखने वाले गीतकार समीर ने आगे बताया, ‘नुसरत साहब के लिए नदीम-श्रवण ने ‘दूल्हे का सेहरा’ गाना बनाया. जब हम गाना लेकर उनके पास गए तो उन्होंने जल्दी से जल्दी स्टूडियो बुक कराने के लिए कहा. सनी देओल के स्टूडियो सनी सुपर साउंड में बुकिंग की गई. पहली बार वहां पर 100 ट्रैक रिकॉर्डिंग की मशीन आई थी. एक अंग्रेज रिकार्डिस्ट मशीन सिखाने के लिए आया था. नुसरत साहब के लिए तख्त की व्यवस्था की गई. वो माइक पर खड़े होकर तो गा नहीं पाते थे. सब अरेजमेंट किए गए. गाना शुरू हुआ. जैसे ही ‘मैं तेरी बांहों के झूले में पली बाबुल’ लाइन आई तो वो रोने लगे. कम से कम 150 बार इसी लाइन पर गाना कट हुआ. हर बार वो रोने लगते थे.’
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समीर अनजान ने इस दिलचस्प किस्से के बारे में आगे बताया, ‘ऐसे में नदीम ने कहा कि बाकी गाना कल रिकॉर्ड कर लेंगे. इस पर नुसरत साहब ने कहा कि अगर ये गाना आज रिकॉर्ड हुआ तो हुआ वर्ना फिर कभी नहीं हो पाएगा. इस बुखार में ही यह गाना निकलेगा नहीं तो मैं फिर गाऊंगा नहीं. हमने रोने की वजह पूछी तो उन्होंने कहा कि जैसे ही वो लाइन आती है तो मुझे अपनी बेटियों की याद आ जाती है. वो असली कलाकार थे, जो दिल से गाते थे. ‘मैं तेरी बांहों के झूले में पली बाबुल’ लाइन पर थिएटर्स में दर्शक भी खूब रोए थे.’

धड़कन फिल्म के संबंध में सुनील शेट्टी ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘यह फिल्म लार्जर दैन लाइफ थी. मेरे किरदार देव शर्मा के अंदर दीवानगी की हद थी. पूरा कमाल डायरेक्टर धर्मेश दर्शन का था. वो जब पहली बार मेरे पास आए तो उन्होंने मुझसे डायरेक्टली कहा था कि मैं आपको गारंटी देता हूं कि आपको इस रोल के लिए अवॉर्ड मिलेगा. मुझे धड़कन के लिए बेस्ट विलेन का अवॉर्ड मिला. वो हर चीज एक्ट करके दिखाते थे. मैं जो भी एक्टिंग करता था तो वो टोक देते थे. फिर समझाते थे कि एक्ट कैसे करना है. वो मुझे देव कहकर बुलाते थे. मेरे सीन और गाने के पीछे बैकग्राउंड म्यूजिक कमाल का था. मुझे तब यह पसंद नहीं था. लग रहा था कि मैं क्या कर रहा हूं, फिर तीन दिन बाद आदत हो गई. फिर मुझे लगा कि मैं गलत हूं, धर्मेश अपनी जगह पर बिल्कुल सही हैं. उनका इरादा बिल्कुल सही है.’

धड़कन फिल्म में किरण कुमार ने शिल्पा शेट्टी के पिता का रोल निभाया था. रोल तो छोटा था लेकिन बहुत ही इंपैक्टफुल था. इस फिल्म में किरण कुमार सुनील शेट्टी के लिए एक डायलॉग बोलते थे जो बहुत फेमस हुआ था. डायलॉग था : तू कल भी बदतमीज था, आज भी बदतमीज है…मेरी बेटी तेरी कभी नहीं होगी…’ किरण कुमार ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘धड़कन फिल्म बहुत चली. फिल्म में एक गाना ‘दूल्हे का सेहरा सुहाना लगता है’ बहुत मकबूल हुआ था, जहां पर बेटी की विदाई होती है. आज भी शादी-विवाह यह गाना बजता है. फिल्म सिटी में सेट लगा हुआ था. पूरी रात शूटिंग हुई थी. डायरेक्टर धर्मेश दर्शन के साथ मेरा एक बड़ा ही करीबी रिश्ता है. मैंने इस फिल्म के लिए 7 दिन शूटिंग की थी. जब फिल्म की शूटिंग हो रही थी, उन दिनों जिंदगी बहुत सिंपल थी. तब फेसबुक, इंस्टाग्राम की दुनिया नहीं थी. यह डायलॉग इतना वायरल हो जाएगा, सोचा ना था.’

धड़कन फिल्म के संबंध में सुनील शेट्टी ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘यह फिल्म लार्जर दैन लाइफ थी. मेरे किरदार देव शर्मा के अंदर दीवानगी की हद थी. पूरा कमाल डायरेक्टर धर्मेश दर्शन का था. वो जब पहली बार मेरे पास आए तो उन्होंने मुझसे डायरेक्टली कहा था कि मैं आपको गारंटी देता हूं कि आपको इस रोल के लिए अवॉर्ड मिलेगा. मुझे धड़कन के लिए बेस्ट विलेन का अवॉर्ड मिला. वो हर चीज एक्ट करके दिखाते थे. मैं जो भी एक्टिंग करता था तो वो टोक देते थे. फिर समझाते थे कि एक्ट कैसे करना है. वो मुझे देव कहकर बुलाते थे. मेरे सीन और गाने के पीछे बैकग्राउंड म्यूजिक कमाल का था. मुझे तब यह पसंद नहीं था. लग रहा था कि मैं क्या कर रहा हूं, फिर तीन दिन बाद आदत हो गई. फिर मुझे लगा कि मैं गलत हूं, धर्मेश अपनी जगह पर बिल्कुल सही हैं. उनका इरादा बिल्कुल सही है.’

डायरेक्टर धर्मेश दर्शन ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘महेश भट्ट और मुकेश भट्ट मेरे सगे मामा हैं. मैंने अपनी अलग पहचान बनाई है. मैंने महज 24 साल की उम्र में सनी देओल-जूही चावला के साथ लुटेरे फिल्म बनाई थी. मेरे पिता फिल्म लाइन में थे. वो डिस्ट्रीब्यूटर थे. महंगे कैमरे फिल्म की शूटिंग के लिए किराए पर देते थे. प्रोडक्शन हाउस था. मैंने जब फिल्म लाइन में आने का फैसला किया तो वो बेहद नाराज थे. उन्होंने मुझे अपना नाम धर्मेश से बदलकर दर्शन करने के लिए कहा था. मैंने अपनी पहली फिल्म बिना किसी के मदद के बनाई.’

राजा हिंदुस्तानी के बाद मैंने धड़कन के लिए अक्षय कुमार और सुनील शेट्टी को सबके विरोध के बावजूद साइन किया. अक्षय कुमार 10 साल काम कर चुके थे लेकिन उनको एक अच्छी फिल्म का इंतजार था. सुनील शेट्टी ने फिल्म में बहुत अच्छा काम किया. फिल्म के एक गाने ‘दूल्हे का सेहरा सुहाना लगता है’ ने हर दिल पर कब्जा कर लिया था. इस गाने में कादर खान को इसलिए लिया था क्योंकि वो मेरे पिता के खास दोस्त थे. वो पहले प्रोफेसर, फिर राइटर बने. मैंने इस गाने के लिए शम्मू कपूर को भी लेना चाहता था लेकिन फिर पिता की बात मानी और कादर खान को स्पेशल अपीयरेंस के लिए लिया. इस गाने के लिए कादर खान शाम 6 बजे से तैयार होते थे. 1000 लोगों का क्राउड था. कादर खान साहब को 11 बजे रात को सेट से वापस लौटना था. रात साढ़े बजे गाना शूट होना होता था और 11 बजे पैक अप हो जाता था. बाकी शूटिंग हम पूरी रात करते रहते थे.’

धड़कन फिल्म की एंडिंग बदली गई थी. शिल्पा शेट्टी ने अपने एक इंटरव्यू में हैरान करने वाला खुलासा करते हुए कहा था, ‘फिल्म में जैसी एंडिंग दिखाई देती है, वैसी नहीं थी. जब मुझे कहानी सुनाई गई थी तो उसके मुताबिक, जब देव को पता चलता है कि मैं राम के बच्चे की मां बनने वाली हूं, उसकी धड़कन वहीं पर रुक जाती है. फिल्म की शुरुआत में ही एक सीन में देव कहता है कि अंजली अगर तुम मुझसे दूर चली जाओगी, तो मेरी धड़कन खुद-ब-खुद रुक जाएगी. फिर धर्मेश दर्शन ने एंडिंग चेंज कर दी थी.’
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