अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। व्हाइट हाउस में आयोजित एक हेल्थ राउंडटेबल के दौरान ट्रंप ने कहा कि अगर कोई देश अमेरिका की ग्रीनलैंड को नियंत्रित करने की योजना का समर्थन नहीं करता, तो उस पर टैरिफ लगाया जा सकता है।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड की जरूरत है और इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। ट्रंप के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है।
ग्रीनलैंड पर ट्रंप का दबाव जारी
जनवरी में व्हाइट हाउस लौटने के बाद से अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप लगातार ग्रीनलैंड को अपने नियंत्रण में लेने की इच्छा जता रहे हैं। हालांकि डेनमार्क और कई यूरोपीय देशों ने इस मांग को साफ तौर पर खारिज कर दिया है। ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि ग्रीनलैंड भौगोलिक रूप से उत्तरी अमेरिका क्षेत्र में आता है।
यह अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद अहम है। प्रशासन का कहना है कि आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच ग्रीनलैंड की रणनीतिक स्थिति अमेरिका के लिए जरूरी हो जाती है।
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डेनमार्क की आपत्ति के बावजूद ‘डील’ का दावा
ट्रंप के बयानों की आलोचना करने वालों का मानना है कि अमेरिका की नजर सिर्फ सुरक्षा पर नहीं, बल्कि ग्रीनलैंड में मौजूद विशाल खनिज संपदा पर भी है। इस बीच ट्रंप के ग्रीनलैंड मामलों के विशेष दूत ने कहा है कि वह मार्च में डेनमार्क के इस क्षेत्र का दौरा करने की योजना बना रहे हैं और उन्हें भरोसा है कि कोई समझौता हो सकता है।
विशेष दूत ने कहा कि राष्ट्रपति इस मुद्दे को लेकर गंभीर हैं और डेनमार्क को अपनी शर्तें बता चुके हैं। अब विदेश मंत्री और उपराष्ट्रपति के स्तर पर बातचीत के जरिए सौदा तय करने की कोशिश होगी।
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