दुद्धी/सोनभद्र/एबीएन न्यूज। बुधवार दोपहर लगभग 2:30 बजे अपर आयुक्त के दुद्धी आगमन के पश्चात तहसील परिसर का विस्तृत निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने तहसील अंतर्गत संचालित सभी न्यायालयों की कार्यप्रणाली की गंभीरता से जांच की। नजारत शाखा, अभिलेखों के रखरखाव, लंबित प्रकरणों की स्थिति एवं अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं का गहन परीक्षण किया गया। अधिकारियों को अभिलेखों के सुव्यवस्थित संधारण एवं प्रकरणों के त्वरित निस्तारण के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए।
निरीक्षण के उपरांत दुद्धी बार संघ के नेतृत्व में अधिवक्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने अपर आयुक्त से मुलाकात की। इस दौरान अधिवक्ताओं ने तहसील क्षेत्र की विभिन्न ज्वलंत समस्याओं को रखते हुए 6 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा। अपर आयुक्त ने समस्याओं को गंभीरता से सुना और कुछ मामलों के शीघ्र निस्तारण हेतु संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया।
ज्ञापन में अधिवक्ताओं ने प्रमुख रूप से बताया कि क्षेत्र की अधिकांश अराजी नंबर मिनजुमला कांटा दर्ज है, जिससे सीमांकन एवं फाटक (पाठ) की कार्यवाही में काफी कठिनाई आती है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राजस्व संहिता में सीमांकन एवं संबंधित कार्यवाही के लिए समय-सीमा निर्धारित है, किंतु उसका पालन नहीं किया जा रहा है।
अधिवक्ताओं ने धारा 116 के अंतर्गत पारित आदेशों के अनुपालन में शिथिलता का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि आदेशों का अमल दरामद एवं कंप्यूटरीकृत खतौनी में आवश्यक प्रविष्टियां नहीं की जा रही हैं। मिनजुमला कागजात से संबंधित फाटक की कार्यवाही के लिए धारा 30(2) के तहत जिला मुख्यालय जाना पड़ता है, जो लंबी दूरी होने के कारण वादकारियों के लिए अत्यंत कठिन है। मांग की गई कि ऐसे मामलों की सुनवाई हेतु अपर जिलाधिकारी सोनभद्र को दुद्धी तहसील मुख्यालय पर ही आकर सुनवाई करने के निर्देश दिए जाएं।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि असंक्रमणीय भूमिधरों की मियाद पूरी होने के बाद भी उन्हें संक्रमणीय भूमिधर घोषित नहीं किया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसे तत्काल प्रभाव से लागू कराने की मांग की गई।
दुद्धी तहसील को आदिवासी बहुल क्षेत्र बताते हुए अधिवक्ताओं ने सर्वे प्रक्रिया के दौरान हुई अनियमितताओं पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि कई मामलों में वास्तविक काश्तकार की भूमि किसी अन्य के नाम दर्ज कर दी गई है, जिससे विवाद उत्पन्न हो रहे हैं। आरोप लगाया गया कि बाहरी क्षेत्रों से आए अधिकारी बिना स्थानीय परिस्थितियों को समझे नामजद व्यक्ति को पुलिस बल या प्रभाव के आधार पर कब्जा दिला देते हैं, जिससे गरीब एवं आदिवासी परिवारों की भूमि पर संकट खड़ा हो रहा है। इस प्रकार की घटनाओं पर रोक लगाने और निष्पक्ष जांच की मांग की गई।
अपर आयुक्त ने आश्वासन दिया कि प्रस्तुत बिंदुओं पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। निरीक्षण और संवाद के इस कार्यक्रम को लेकर तहसील परिसर में दिनभर हलचल बनी रही।
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