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फिल्म ‘यादव जी की लव स्टोरी’ को लेकर विवाद गहरा गया है. सपा विधायक पंकज मलिक ने सरकार और सेंसर बोर्ड (CBFC) पर समाज को जाति-धर्म के नाम पर बांटने का आरोप लगाया है. उन्होंने सवाल उठाया कि भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली फिल्में बोर्ड से पास कैसे हो जाती हैं. पंकज मलिक ने नसीहत दी कि मेकर्स को विवादित टॉपिक के बजाय मुलायम सिंह यादव और भगत सिंह जैसे महापुरुषों पर फिल्में बनानी चाहिए. उन्होंने सरकार से ऐसी फिल्मों पर रोक लगाने की मांग की है जो सामाजिक ताने-बाने को बिगाड़ती हैं.
विधायक ने गहरी साजिश के दिए संकेत. (फोटो साभार: IANS)
नई दिल्ली: रोमांटिक-एक्शन फिल्म ‘यादव जी की लव स्टोरी’ को लेकर मचा बवाल अब सियासी गलियारों तक पहुंच गया है. समाजवादी पार्टी के विधायक पंकज मलिक ने इस फिल्म पर अपना तीखा रिएक्शन देते हुए सीधे तौर पर सरकार और सेंसर बोर्ड को आड़े हाथों लिया है. लखनऊ में बातचीत के दौरान पंकज मलिक ने बड़े ही साफ शब्दों में कहा कि देश और प्रदेश में इस तरह के विवाद कोई इत्तेफाक नहीं हैं, बल्कि ये जानबूझकर रचे जा रहे हैं. उनका मानना है कि जब तक मौजूदा सरकार सत्ता में है, तब तक कभी धर्म के नाम पर तो कभी जाति के नाम पर लोगों को आपस में भिड़ाने का खेल चलता रहेगा. उन्होंने आरोप लगाया कि कभी मस्जिद के लाउडस्पीकर का मुद्दा उछाला जाता है, तो कभी किसी खास जाति को निशाना बनाकर समाज का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जाती है.
विधायक पंकज मलिक ने फिल्मों को पास करने वाली संस्था केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के काम करने के तरीके पर भी बड़े सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि जब सेंसर बोर्ड भारत सरकार के अधीन आता है, तो फिर ऐसी फिल्में पास ही कैसे हो जाती हैं जो किसी समाज की भावनाओं को ठेस पहुँचाती हों? उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि यह सेंसर बोर्ड की पहली जिम्मेदारी थी कि वह ऐसे विवादित कंटेंट को रिलीज होने से पहले ही रोकता. मलिक ने पुरानी कड़वाहटों को याद दिलाते हुए कहा कि इससे पहले भी ‘घूसखोर पंडत’ जैसी फिल्मों के जरिए समाज में तनाव पैदा करने की कोशिश की गई थी, और अब ‘यादव जी की लव स्टोरी’ के नाम पर वही खेल दोबारा खेला जा रहा है.
महान हस्तियों पर बनाएं फिल्में
पंकज मलिक ने फिल्म मेकर्स को नसीहत देते हुए कहा कि अगर उन्हें फिल्में बनानी ही हैं, तो उन महान हस्तियों पर बनाएं जिन्होंने देश के लिए अपनी जान दी या समाज को नई दिशा दी. उन्होंने सुझाव दिया कि युवाओं को प्रेरित करने के लिए नेताजी मुलायम सिंह यादव, चौधरी चरण सिंह, महात्मा गांधी और शहीद भगत सिंह जैसे महापुरुषों की जीवनी को बड़े पर्दे पर लाना चाहिए. विधायक ने इस फिल्म की कड़ी निंदा करते हुए सरकार से मांग की है कि वह इस मामले में दखल दे और भविष्य में ऐसी फिल्मों पर रोक लगाए जिनसे समाज में गलत संदेश जाता हो. कुल मिलाकर, ‘यादव जी की लव स्टोरी’ अब केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि जातिगत और राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन चुकी है.
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अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें
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