नई दिल्ली. संगीत की दुनिया में कुछ आवाजें ऐसी होती हैं जो सिर्फ सुनी नहीं जातीं, महसूस भी की जाती हैं और उन्हीं में से एक हैं शंकर महादेवन. ‘दिल चाहता है’, ‘मां’, ‘कल हो न हो’ और ‘मितवा’ जैसे यादगार गीतों से उन्होंने हिंदी सिनेमा को भावनाओं की नई गहराई दी, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने का उनका सफर उतना आसान नहीं था, जितना आज दिखता है. आज 3 मार्च को अपना जन्मदिन मना रहे शंकर महादेवन एक सांस्कृतिक माहौल वाले परिवार में पले-बढ़े और बचपन में ही उनका संगीत से परिचय हो गया था.
उनका जन्म मुंबई के चेंबूर में हुआ था, लेकिन वो केरल के पलक्कड़ से ताल्लुक रखते हैं. बचपन से ही वो इंडियन क्लासिकल म्यूजिक और कार्नाटिक संगीत के शौकीन रहे हैं. उन्होंने बहुत कम उम्र में शास्त्रीय संगीत की शिक्षा शुरू कर दी थी. पढ़ाई के साथ-साथ संगीत उनका जुनून बन चुका था. कॉलेज के दिनों में वह हर सांस्कृतिक कार्यक्रम के स्टार परफॉर्मर होते थे और अपनी आवाज के दम पर कई पुरस्कार भी जीत चुके थे.
जावेद अख्तर का गाना देख चकरा गया था शंकर महादेवन का सिर
असली चुनौती तब सामने आई, जब उन्हें अपने पहले एल्बम के लिए गाना रिकॉर्ड करना था. यह गाना — ‘ब्रेथलेस’ था. इसके बोल दिग्गज गीतकार जावेद अख्तर ने लिखे थे. जब शंकर महादेवन के हाथ में गीत की स्क्रिप्ट आई, तो वह देखकर चौंक गए. गाने के नाम पर चार पन्नों में बिना ठहराव के लिखे शब्द उन्हें किसी लेख जैसे लगे. एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि उन्हें समझ ही नहीं आ रहा था कि इसे गाना कैसे है. वो इस गाने को पहली बार देखकर बेहोश हो गए थे. लेकिन यही प्रयोग उनके करियर का टर्निंग पॉइंट बन गया.
ब्रेथलेस ने बनाया हिट
‘ब्रेथलेस’ में बिना रुके गाने का अनोखा अंदाज दर्शकों को बेहद पसंद आया और यह गाना जबरदस्त हिट साबित हुआ. इस गाने ने उन्हें संगीत की दुनिया लेजेंड बना दिया था. इसी के साथ शंकर रातोंरात संगीत जगत का बड़ा नाम बन गए और उन्हें स्क्रीन अवॉर्ड में बेस्ट नॉन-फिल्म एल्बम का सम्मान भी मिला.
शंकर–एहसान–लॉय की तिकड़ी ने किया कमाल
इसके बाद फिल्मों से ऑफर मिलने लगे. उन्होंने शुरुआत में सलमान खान की फिल्म ‘दस’ के लिए गाना गाया, लेकिन असली पहचान उन्हें म्यूजिक तिकड़ी शंकर–एहसान–लॉय के हिस्से के रूप में मिली. एहसान नूरानी और लॉय मेंडोंसा के साथ मिलकर उन्होंने बॉलीवुड को कई सुपरहिट गाने और यादगार म्यूजिक एल्बम दिए.
नई पीढ़ी को सिखाते हैं क्लासिकल म्यूजिक
पर्सनल लाइफ की बात करें तो शंकर हमेशा सादगी और पारिवारिक मूल्यों से जुड़े रहे हैं. वह लाइमलाइट से दूर रहना पसंद करते हैं और अपने परिवार व संगीत को ही जीवन की असली प्राथमिकता मानते हैं. अपने व्यस्त करियर के बावजूद उन्होंने हमेशा संगीत शिक्षा को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया और नई पीढ़ी को ट्रेनिंग देने के लिए म्यूजिक प्लेटफॉर्म शुरू किए.
आज शंकर महादेवन सिर्फ एक सिंगर नहीं, बल्कि एक संस्था बन चुके हैं — जिनकी आवाज में शास्त्रीयता की गहराई, आधुनिकता की चमक और भावनाओं की सच्चाई एक साथ सुनाई देती है. यही वजह है कि दशकों बाद भी उनका संगीत लोगों के दिलों में उतनी ही ताजगी के साथ गूंजता है.
शंकर महादेवन ने जीते कई अवॉर्ड्स
शंकर महादेवन का शानदार करियर रहा है. उन्होंने दशकों लंबे करियर के दौरान दर्जनों अवॉर्ड्स अपने नाम किए हैं. सिंगर और कंपोजर ने 4 नेशनल अवॉर्ड, 3 फिल्मफेयर अवॉर्ड्, 5 स्टेट अवॉर्ड्स समेत कइयों पुरस्कार जीते हैं. सिंगर को म्यूजिक इंडस्ट्री में अतुल्नीय योगदान के लिए पद्मश्री भी मिला था.










