अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को और तेज कर दिया है। मिलिट्री कमांड ने पुष्टि की है कि पिछले एक हफ्ते में ईरान के अंदर हजारों ठिकानों पर हमले किए गए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में कमांड ने इस मिशन की जानकारी दी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि ऑपरेशन के पहले हफ्ते में ही 3,000 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि वे अपनी कार्रवाई धीमी नहीं कर रहे हैं।
ट्रंप ने रखी ये मांग
इस सैन्य वृद्धि के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग की। उन्होंने कहा कि ईरान के आत्मसमर्पण के बिना कोई समझौता नहीं होगा। ट्रंप ने जोर दिया कि अमेरिका और उसके सहयोगी, खासकर इस्राइल, ईरान के नेतृत्व बदलने के बाद ही किसी समझौते पर विचार करेंगे। उन्होंने ‘मेक ईरान ग्रेट अगेन’ का नारा भी दिया। ट्रंप ने कहा कि आत्मसमर्पण के बाद वे ईरान को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में मदद करेंगे। ये घटनाक्रम 28 फरवरी को हुए अमेरिका-इस्राइल के संयुक्त सैन्य हमले के बाद आए हैं। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई और अन्य वरिष्ठ नेता मारे गए थे। इसके जवाब में ईरान ने कई अरब देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इस्राइली संपत्तियों पर ड्रोन व मिसाइल हमले किए। इस्राइल ने भी तेहरान और लेबनान में हिजबुल्लाह पर हमले जारी रखे हैं।
U.S. forces have struck over 3,000 targets in the first week of Operation Epic Fury, and we are not slowing down. pic.twitter.com/Nqn30feTQA
— U.S. Central Command (@CENTCOM) March 7, 2026
अगले नेता के चयन में ट्रंप क्या बोले?
खामेनेई की मौत के बाद, ट्रंप ने ईरान के अगले सर्वोच्च नेता के चयन में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने की इच्छा जताई। उन्होंने वेनेजुएला के राजनीतिक घटनाक्रम में अपनी भागीदारी से इसकी तुलना की। ट्रंप ने दिवंगत सर्वोच्च नेता के बेटे मोजतबा खामेनेई के संभावित उत्तराधिकार की आलोचना की। उन्होंने मोजतबा को कमजोर और अस्वीकार्य बताया। ट्रंप ने कहा कि वह ईरान में सद्भाव और शांति लाने वाले नेता को पसंद करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि खामेनेई की नीतियों को जारी रखने से अमेरिका के साथ फिर से संघर्ष हो सकता है।
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ईरान सरकार ने क्या कहा?
रिपोर्टों में कहा गया है कि 56 वर्षीय मौलवी मोजतबा खामेनेई, जिनके आईआरजीसी से करीबी संबंध हैं, एक प्रमुख दावेदार हैं। हालांकि, ईरानी सरकार ने इन दावों का आधिकारिक तौर पर खंडन किया है। मुंबई में अपने वाणिज्य दूतावास के माध्यम से अधिकारियों ने बताया कि संभावित उम्मीदवारों से संबंधित रिपोर्टों का कोई आधिकारिक स्रोत नहीं है। उन्होंने इन खबरों को आधिकारिक रूप से खारिज कर दिया। एक्सियोस के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति इस बात पर कायम हैं कि वाशिंगटन को ऐसे किसी भी नए ईरानी नेता को स्वीकार नहीं करना चाहिए। जो दिवंगत खामेनेई जैसी नीतियां अपनाएगा।
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