पश्चिम एशिया में 17 दिन से जारी संघर्ष ने वैश्विक तेल बाजार को हिला कर रख दिया है। इसका बड़ा असर हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर देखने को मिला, जिसके चलते दुनियाभर की तेल आपूर्तियों संकट के बादल तक दिखने लगे। इसी तनावपूर्ण स्थिति के बीच भारत ने कूटनीतिक कदम उठाया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि भारत ईरान के साथ सीधे और निर्णायक संवाद कर रहा है, जिससे भारतीय ध्वज के साथ जहाजों का सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित हो रहा है।
जयशंकर ने इस बात पर भी जोर दिया कि ईरानी अधिकारियों के साथ सीधे संवाद ने सकारात्मक परिणाम दिए हैं। इसके तहत अभी कई और भारतीय ध्वज वाले जहाजों को होर्मुज जलमार्ग से गुजरना बाकी है। फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में जयशंकर ने स्पष्ट किया कि हर भारतीय जहाज को व्यक्तिगत रूप से अनुमति दी जा रही है और इसके लिए भारत और ईरान के बीच कोई नया समझौता नहीं हुआ है।
इस आवाजाही के लिए कोई समझौता नहीं- जयशंकर
इस दौरान जयशंकर ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारतीय ध्वज वाले जहाजों के सुरक्षित आवागमन के बदले ईरान को भारत की तरफ से कोई लाभ नहीं दिया गया। उनका कहना था कि भारत और ईरान के बीच पुराना सहयोग रहा है, इसी आधार पर हमने यह कदम उठाया। यह कोई लेन-देन का मामला नहीं है।