ईरान से भारतीय मेडिकल छात्रों को निकालने का अभियान जारी है. जम्मू और कश्मीर के कई छात्रों सहित लगभग 101 छात्रों का पहला जत्था 15 मार्च को भारत पहुंचने की उम्मीद है. जानकारी के अनुसार पहला जत्था ईरान से होते हुए आर्मेनिया के येरेवन स्थित ज़्वार्टनोट्स अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सुबह 1:25 बजे रवाना होगा. छात्र भारत पहुंचने से पहले दुबई होते हुए यात्रा करेंगे.
अजरबैजान पहुंचे 90 छात्र
अधिकारियों ने बताया कि लगभग 90 छात्र पहले ही अजरबैजान में प्रवेश कर चुके हैं, जबकि ईरान में फंसे भारतीय नागरिक निकासी मार्ग के तहत कई अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की ओर जा रहे हैं. इस बीच अखिल भारतीय मेडिकल छात्र संघ (एआईएमएसए) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद मोमिन खान ने कहा कि युद्धग्रस्त ईरान में फंसे सभी छात्रों को वापस लाने के प्रयास जारी हैं.
उन्होंने कहा कि इस्फ़हान और अराक के छात्र जो वर्तमान में अपने-अपने छात्रावासों में रह रहे हैं, उन्होंने एआईएमएसए सहित संबंधित अधिकारियों से अनुरोध किया है कि वे उनकी चिंताओं को अधिकारियों के समक्ष उठाएं और उनके पुनर्वास में तेजी लाएं. उन्होंने कहा कि उनके पुनर्वास कार्यक्रम को लेकर अनिश्चितता के कारण उनमें चिंता बढ़ रही है.
इस्लामिक आज़ाद विश्वविद्यालय और ईरान मेडिकल साइंसेज विश्वविद्यालय के कई छात्र निकासी मार्ग के तहत अज़रबैजान पहुंच चुके हैं, जबकि अन्य अभी भी सीमा चौकियों की ओर यात्रा कर रहे हैं. छात्रों का एक अन्य समूह क़ोम से यात्रा करके सफलतापूर्वक तबरीज़ पहुंच गया है, जहां उन्होंने रात बिताई थी. वे अब अर्मेनियाई सीमा की ओर बढ़ रहे हैं, जहां से आगे की यात्रा की व्यवस्था की जाएगी.
परिजनों ने जताया आभार
करमान में पढ़ रहे छात्रों को 13 मार्च की शाम को क़ोम ले जाया गया, जबकि शिराज यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेडिकल साइंसेज के छात्र भी फिलहाल वहीं फंसे हुए हैं. और उन्हें निकालने और यात्रा की व्यवस्था के संबंध में आगे के निर्देशों का इंतजार है. जम्मू और कश्मीर में छात्रों के परिवारों ने निकासी की प्रगति पर राहत व्यक्त की है, लेकिन अधिकारियों से अपील की है कि ईरान के कई हिस्सों में फंसे बाकी छात्रों की सुरक्षित और समय पर वापसी सुनिश्चित की जाए.
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