हृदय रोगों को होने से पहले ही रोका जा सकता है, बशर्ते कम उम्र से जांच, सही जीवनशैली, उन्नत परीक्षण और समय पर दवा का इस्तेमाल किया जाए। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (एएचए) और अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी (एसीसी) ने नए कोलेस्ट्रॉल (डिस्लिपिडेमिया) दिशानिर्देश-2026 में दिल की बीमारियों की रोकथाम के तरीके में बड़े बदलाव किए हैं।
जर्नल ऑफ द अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी में प्रकाशित इस अपडेट में साफ कहा गया है कि अब केवल 10 साल के जोखिम की बजाय पूरे जीवनकाल के खतरे को ध्यान में रखकर इलाज और रोकथाम की रणनीति तय की जानी चाहिए। नए दिशानिर्देश इस बात पर बल देते हैं कि लगभग 80 फीसदी हृदय रोगों को रोका जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि व्यक्ति कम उम्र से ही अपने कोलेस्ट्रॉल स्तर को नियंत्रित रखता है, तो भविष्य में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा काफी हद तक कम हो सकता है।
नए टूल में क्या है खास?
यही कारण है कि अब इलाज की शुरुआत बीमारी के लक्षण आने के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले ही करने की सलाह दी गई है। पहले जहां जोखिम आकलन के लिए पुराने समीकरणों का उपयोग किया जाता था, वहीं अब एथेरोस्क्लेरोटिक हृदय रोग (एएससीवीडी) प्रिवेंशन टूल को अपनाया गया है। यह नया टूल 10 साल के साथ-साथ 30 साल का जोखिम भी बताता है और व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर अधिक सटीक आकलन करता है।
चार श्रेणियों में बांटा जोखिम
जोखिम को चार श्रेणियों में बांटा गया है, जिससे डॉक्टर यह तय कर सकते हैं कि मरीज को दवा की जरूरत है या नहीं। नई गाइडलाइन में यह स्पष्ट किया गया है कि केवल एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। लिपोप्रोटीन (ए) यानी एलपी (ए) की जांच जीवन में कम से कम एक बार कराने की सलाह दी गई है, क्योंकि यह मुख्यतः आनुवंशिक होता है और उच्च स्तर पर जोखिम बढ़ाता है। इसके अलावा एपीओबी टेस्ट को अधिक सटीक माना गया है, क्योंकि यह शरीर में हानिकारक कणों की वास्तविक संख्या बताता है। वहीं सीएसी स्कोर, जो एक सीटी स्कैन के माध्यम से धमनियों में जमी चर्बी का पता लगाता है, जोखिम की गंभीरता को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
युवाओं के लिए विशेष चेतावनी
दिशानिर्देशों में 30 से 39 वर्ष के आयु वर्ग पर विशेष ध्यान दिया गया है। जिन लोगों के परिवार में हृदय रोग का इतिहास है या जो धूम्रपान, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और मोटापे जैसी समस्याओं से ग्रस्त हैं, उन्हें जल्दी जांच शुरू करने की सलाह दी गई है।इसका उद्देश्य बीमारी को शुरुआती चरण में ही रोकना है।
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