Namaz in Islam: इस्लाम धर्म में नमाज को लेकर हजरत मसीह मौऊद अलैहिस्सलाम ने कहा है, नमाज किसी दुआ से कम नहीं है. इस्लाम धर्म के 5 फर्ज में नमाज भी शामिल है. अल्लाह से दुआ मांगने का सबसे बेहतर साधन नमाज है.
इस्लाम धर्म के मुताबिक नमाज में किसी भी तरह की जल्दबाजी दिखाना गलत माना जाता है. साथ ही इसे अल्लाह का सबसे बेहतर इनाम भी माना जाता है.
अल्लाह की इबादत और दुआ करने के लिए नमाज सबसे महान है. इस्लाम धर्म में एक दिन में पांच वक्त की नमाज अदा की जाती है. हालांकि ये सभी नमाज अलग-अलग वक्त पर होती है. इसके साथ ही इनके नाम भी अलग होते हैं.
पांच वक्त की नमाज के नाम
इस्लाम धर्म में प्रतिदिन 5 वक्त की नमाज अलग-अलग समय पर अदा की जाती है. जिसमें सबसे पहले फज्र की नमाज, जुहर की नमाज, अस्त्र की नमाज, मगरिब की नमाज और इशा की नमाज अदा की जाती है.
इस्लाम धर्म में नमाज पढ़ने से पहले कुछ बातों का विशेष ध्यान दिया जाता है. जिसमें सबसे पहले समय, शरीर, कपड़ों और स्थान की सफाई हो. शरीर ढका होना चाहिए. मुंह किबला की तरफ होना चाहिए. नमाज की नीयत अर्थात् जो नमाज फर्ज़ या सुन्नत पढ़नी हो, उसकी नीयत की जाए.
मस्जिद में नमाज पढ़ने से जुड़ी अहम बातें
- मस्जिद में नमाज अदा करने से पहले वुजू करना जरूरी होता है, क्योंकि बिना पवित्रता के खुदा की इबादत अधूरी मानी जाती है.
- नमाज के लिए साफ और पाक कपड़े पहनना जरूरी है, जिससे शरीर और मन दोनों शुद्ध रहें.
- मस्जिद में नमाज अदा करने के लिए प्रवेश दाहिने पैर से किया जाता है और “बिस्मिल्लाह” पढ़ा जाता है, यह आदब और इज्जत का प्रतीक है.
- मस्जिद में ऊंची आवाज में बातचीत, हंसी-मजाक या फोन का प्रयोग करना मना होता है.
- मस्जिद में नमाज के दौरान सफ (लाइन) में बराबरी बनाए रखा जाता है और कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा होना सुन्नत है.
- इमाम की नमाज में पूरी तवज्जो और नीयत के साथ शरीक होना चाहिए.
- नमाज के दौरान आंखें सजदे की जगह पर टिकाए रखें, इधर-उधर देखना अनुचित है.
- नमाज पूरी होने के बाद जल्दी उठकर न जाना चाहिए, कुछ देर तक तस्बीह और दुआ करें.
- मस्जिद को साफ-सुथरा रखना और दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करना फर्ज़ का काम है.
- दूसरों की इबादत में खलल डालना या ध्यान भटकाना गुनाह माना जाता है.
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