अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के व्यापक टैरिफ फैसले के बावजूद भारत के साथ व्यापार समझौते में कोई बदलाव नहीं होने की पुष्टि की। उन्होंने कहा ‘इंडिया डील इज ऑन’ और इस पर अब भी पूरी तरह अमल किया जा रहा है। ट्रंप ने व्हाइट हाउस में शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि उनका भारत के साथ रिश्ता शानदार है और दोनों देश व्यापार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने रूस से तेल का आयात रोक दिया और अमेरिकी अनुरोध पर इसे वापस लिया, ताकि उस भयंकर युद्ध को रोका जा सके जिसमें हर महीने 25,000 लोग मर रहे थे।
भारत-पाक युद्ध रोकने में टैरिफ का इस्तेमाल
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि उन्होंने टैरिफ का इस्तेमाल कर भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित युद्ध को रोका। उन्होंने कहा मैंने अब तक आठ युद्धों को टैरिफ के जरिए खत्म किया है, जिनमें भारत और पाकिस्तान जैसी गंभीर, न्यूक्लियर स्थिति वाली लड़ाइयां भी शामिल हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा कि ट्रंप ने 3.5 करोड़ जीवन बचाए। ये टैरिफ अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने में भी मददगार रहे।
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अंतरिम व्यापार समझौता और टैरिफ
- इस महीने की शुरुआत में अमेरिका और भारत ने अंतरिम व्यापार समझौते का ढांचा तय किया।
- ट्रंप ने कार्यकारी आदेश जारी कर भारत पर 25 प्रतिशत लगाए गए दंडात्मक टैरिफ हटा दिए।
- समझौते के तहत वॉशिंगटन भारत से वसूले जाने वाले टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर रहा है।
- वहीं, नई दिल्ली ने अमेरिकी वस्तुओं पर शून्य टैरिफ लगाने पर सहमति दी।
- ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कुछ नहीं बदलेगा। वे टैरिफ का भुगतान करेंगे और हम कोई टैरिफ नहीं देंगे। यह पहले की स्थिति का उलट है।
- ‘प्रधानमंत्री मोदी एक महान व्यक्ति हैं, बेहद समझदार और उनके विरोधियों से काफी आगे।’
- ‘अमेरिकी हित में, हमें उनका फायदा मिल रहा था। इसलिए हमने भारत के साथ एक न्यायपूर्ण समझौता किया। अब हम उन्हें कोई टैरिफ नहीं देंगे, और वे देंगे।’
इससे पहले 20 फरवरी 2026 को अदालत ने ट्रंप के व्यापक वैश्विक टैरिफ को असंवैधानिक करार दिया, जिससे उनकी आर्थिक नीतियों को बड़ा झटका लगा। इस निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में उनकी दलीलों को सही तरह से नहीं सुना गया। उन्होंने फैसले को निराशाजनक और हतोत्साहित करने वाला बताया। ट्रंप ने यहां तक कहा कि उन्हें ऐसे निर्णय की उम्मीद नहीं थी और फैसला सुनाने वाले कुछ जजों के रवैये पर भी सवाल उठाए।