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Bollywood Interesting Story : बॉलीवुड की हिंदी फिल्मों में रोमांटिक सॉन्ग पहाड़, झरनों-वादियों में ही फिल्माए जाने का ट्रेंड है. सुहागरात के गाने ज्यादातर बेडरूम के अंदर ही फिल्माए जाते हैं. बॉलीवुड में 1996 में एक ऐसी फिल्म आई थी कि जिसमें खुली वादियों में ही हीरो-हीरोइन की ‘सुहागरात’ दिखाई गई थी. मजेदार बात यह है कि दर्शक भी इस ब्लंडर को नहीं पकड़ पाया. फिल्म की कहानी-म्यूजिक इतना जबर्दस्त था कि मूवी ने रिलीज ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया था. गीतकार समीर ने हाल ही में इसका खुलासा किया.
23 अगस्त 1996 को रिलीज हुई फिल्म ‘जीत’ ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया था. फिल्म में आलोक नाथ, करिश्मा कपूर, सलमान खान, सनी देओल और अमरीश पुरी लीड रोल में थे. फिल्म की स्टोरी राज कंवर ने लिखी थी. उन्होंने फिल्म का डायरेक्शन भी किया था. प्रोड्यूसर साजिद नाडियाडवाला था. फिल्म का म्यूजिक नदीम-श्रवण ने दिया था. गीतकार समीर अंजान थे. यह फिल्म 1977 में आई पाकिस्तानी मूवी ‘पहली नजर’ और बॉलीवुड मूवी ‘मुकद्दर का सिकंदर’ से प्रेरित थी. 6 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 30 करोड़ से ज्यादा की कमाई की थी. फिल्म में कुल 8 गाने रखे गए थे. फिल्म के मेलोडियस म्यूजिक ने धूम मचा दी थी. पान की दुकानों से लेकर चौराहों पर हर जगह इस फिल्म के गाने सुनाई देते थे. इस फिल्म का एक गाना ‘सुहागरात’ के लिए लिखा गया था और एक कमरे के अंदर फिल्माया जाना था. डायरेक्टर राज कंवर ने गलती से इस गाने का फिल्मांकन खुली वादियों-पहाड़ों में कर दिया था. हालांकि कोई भी इस ब्लंडर को नहीं पकड़ पाया.

जीत के सभी गाने सदाबहार थे. नदीम-श्रवण के म्यूजिक की अलग छाप इनमें दिखाई देती है. फिल्म के एवरग्रीन गाने आज भी सुनते समय दिल को रोमाटिंक बना देते हैं. फिल्म के कुछ पाप्युलर गानों में से ‘यारा ओ यारा, ये मिलना हमारा, जाने क्या रंग लाएगा’, ‘तू धरती पे चाहे जहां भी रहेगी, तुझे तेरी खुशबू से पहचान लूंगा’ ‘सांसों का चलना, दिल का मचलना, किसकी शरारत है’ और ‘अभी सांस लेने की फुर्सत नहीं है…’ शामिल थे. ‘अभी सांस लेने की फुर्सत नहीं है…’. फिल्म का एक सॉन्ग ‘अभी सांस लेने की फुर्सत नहीं है…’ की कहानी बेहद दिलचस्प है. हाल ही में गीतकार समीर ने एक इंटरव्यू में इसका खुलासा किया था. उन्होंने बताया था कि यह गाना ‘सुहागरात’ के लिखा गया था लेकिन डायरेक्टर ने इसे खुली वादियों में फिल्मा दिया था. सिर्फ एक सीन कमरे के अंदर का था. इस पर उन्होंने डायरेक्टर राज कंवर को खूब सुनाया था.

समीर ने अपने इंटरव्यू में बताया, ‘बहुत ही रोमांटिक सान्ग मैंने लिखा था. यह गाना सुहागरात की सिचुएशन पर लिखा गया था. डायरेक्टर ने बड़ा ब्लंडर किया. जब मैं राज कंवर से मिला तो मैंने उन्हें बहुत डांटा था. मैंने कहा कि ‘आप कमाल के आदमी हो. गाना शूट कैसे किया है? दरअसल, फिल्म की शूटिंग स्विटरजरलैंड में हो रही थी. उस समय उनके पास कोई गाना नहीं था. तो यह गाना जो एक बंद कमरे में फायर के साथ फिल्माया जाना था वो बहुत ही खराब ढंग से शूट हुआ. हीरोइन एक पहाड़ पर खड़ी है, हीरो एक पहाड़ पर खड़ा है….फिर हीरो गा रहा है ‘अभी सांस लेने की फुर्सत नहीं है कि तुम मेरी बांहों में हो’. मैंने राज कंवर से कहा कि आपने बहुत गड़बड़ कर दी है.’

समीर ने इस गाने की कहानी बताते हुए कहा, ‘मैंने राज कंवर से कहा कि मेरे गाने की जो शिद्दत थी, जो उसकी गहराई, जो दो दिलों के करीब आने की फीलिंग थी, वो तो चली गई. वो दोनों बीच-बीच में मिलते हैं और फिर अलग हो जाते हैं, और फिर मिलते हैं. मेरा बहुत पसंदीदा गाना है. फिल्म में साफ पता चलता है कि ‘हीरोइन’ को देखने के अलावा वो सब कुछ देख रहा है, जबकि गाने के बोल कुछ और कहानी कहते हैं. हीरो पहाड़ देख रहा है, फूल देख रहा है, झरने देख रहा है, हमने बोला कि कमाल कर दिया तुमने. लेकिन होता है, ऐसा भी होता है. हम गीतकार कुछ नहीं कर सकते. गाना वो सलमान खान के साथ ही होना चाहिए था, सिचुएशन सही थी लेकिन वो गाना एक कमरे के अंदर होना चाहिए था. फिल्म में जो गाना नजर आता है, उसमें साफ पता चलता है कि हीरो शादी करता है. फिर गाना सीधे आउटडोर पर चला जाता है. पूरा गाना बेडरूम का था.’
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