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Gulshan Kumar Murder Case : नदीम-श्रवण का नाम जुबान पर आते ही 90 और 2000 का दशक याद आ जाता है. वो दौर म्यूजिकल फिल्मों का था. 1990 में आई फिल्म ‘आशिकी’ से दोनों की किस्मत रातोंरात चमक गई थी. गीतकार समीर और प्लेबैक सिंगर कुमार सानू की चौकड़ी सिनेमा पर छा गई थी. बाद में अलका याज्ञनिक भी नदीम-श्रवण के साथ जुड़ गईं. हालांकि नदीम-श्रवण की म्यूजिक किंग के नाम से मशहूर गुलशन कुमार से मुलाकात अनुराधा पौडवाल ने करवाई थी. नदीम का नाम बाद में गुलशन कुमार हत्याकांड में भी सामने आया था.

नदीम-श्रवण ने अपने नाम को इस तरह से स्थापित किया कि उनका म्यूजिक फिल्म के बॉक्स ऑफिस पर सफल होने की गारंटी बन गया. दोनों ने 1990 के दशक में बॉलीवुड में म्यूजिक इंडस्ट्री को बदलकर रख दिया था. ‘आशिकी’ के बाद ‘साजन’, ‘फूल और कांटे’, ‘सड़क’, दिल है की मानता नहीं, ‘दीवाना’, ‘सपने साजन के’, ‘हम हैं राही प्यार के’, ‘रंग’, ‘दिलवाले’, ‘सलामी’, ‘राजा’, ‘बरसात’, ‘जीत’, ‘राजा हिदुस्तानी’, ‘साजन चले ससुराल’ और ‘परदेश’ जैसी फिल्मों में ब्लॉकबस्टर म्यूजिक देकर बॉलीवुड में तहलका मचा दिया था.

12 अगस्त 1997 को साउथ अंधेरी इलाके में स्थित जीतेश्वर महादेव मंदिर के बाहर टी-सीरीज कंपनी के मालिक गुलशन कुमार की मुंबई में हत्या कर दी गई थी. हत्या का संगीतकार नदीम सैफी पर भी लगा था. इस हत्याकांड के बाद नदीम लंदन भाग गए और फिर कभी लौटकर वापस नहीं आए. टिप्स कंपनी के मालिक रमेश तौरानी पर भी हत्या का आरोप लगा था. वो ढाई साल जेल में भी रहे.

नदीम के जोड़ीदार श्रवण राठौर के लिए यह समय बहुत मुश्किल भरा था. 2002 में दोनों ने ‘ये दिल है आशिकाना’ मूवी में म्यूजिक दिया था. इस मूवी के मुहुर्त के दौरान श्रवण राठौर पहली बार मीडिया के सामने आए थे. उन्होंने गुलशन कुमार हत्याकांड के बाद कहा था, ‘ईश्वर की कृपा से बहुत अच्छी फिल्म लॉन्च हुई है. कुक्कू कोहली डायरेक्ट कर रहे हैं. अरुणा ईरानी प्रोड्यूसर हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि नदीम-श्रवण का म्यूजिक इस फिल्म में है. करीब-करीब ढाई साल तक हम इंतजार कर रहे थे कि कोई अच्छी फिल्म हाथ आए. आज नदीम-श्रवण की फिर से एक नई जिंदगी शुरू हो रही है. मुझे इस बात की बहुत खुशी है.’

यह पूछे जाने पर कि क्या आप लंदन जाकर काम करेंगे, तो श्रवण ने कहा था, ‘अब तो कम्युनिकेशन बहुत आसान हो गया है. मुझे लंदन जाने की जरूरत है. हम दोनों एकदूसरे के दिमाग को बहुत अच्छे से समझते हैं. हमने अपना बैनर 25 साल में बनाया है. हम दोनों को अलग कर पाना मुश्किल है. यह बैनर हमेशा ऐसे ही रहेगा. हमें सही प्रपोजल का इंतजार था. कुक्कू जी के साथ हमने ‘फूल और कांटे’ में काम किया था. कुछ लोग चाहते थे कि मैं अलग से काम करू. यह हमारे उसूलों के खिलाफ था. म्यूजिक के सिवा हम लोग कुछ सोचते भी नहीं. नदीम लंदन में बैठकर क्रिएटिव काम करते हैं. मैं यहां काम करता हूं. हम दोनों फिर से मिलजुलकर म्यूजिक की दुनिया में आ गए हैं.’

एबीपी को दिए एक इंटरव्यू में नदीम ने गुलशन कुमार हत्याकांड पर कहा था , ‘मैं गुलशन कुमार को पापाजी कहा करता था. वह मेरे भाई जैसे थे. मैं उन्हें आज भी दिल से प्यार करता हूं. जब मर्डर हुआ तो मैं लंदन में था. मुझे इस बात का डर था कि मुंबई में मुझे फंसा दिया जाएगा, इसलिए भारतीय कोर्ट का सामना नहीं किया. हिंदुस्तान मेरा मुल्क है. मैंने उससे मुहब्बत की है. मरते दम तक मेरी मुहब्ब्त जारी रहेगी.

<br />क्यों हुई थी गुलशन कुमार की हत्या : गुलशन कुमार की हत्या से पहले 5 अगस्त को फिल्म मेकर सुभाष घई पर हमला किया गया था. गुलशन कुमार को लंबे समय से अंडरवर्ल्ड की ओर से धमकियां दी जा रही थीं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अबु सलेम ने शुरुआत में गुलशन कुमार से 60 लाख की फिरौती मांगी थी. फिर बात 5 लाख रुपये पर आ गई. बताते हैं कि गुलशन कुमार ने कहा था कि 5 लाख रुपये देकर वो वैष्णो देवी में भंडारा कराएंगे. बात ईगो पर आ गई. इस बात से नाराज सलेम ने शूटर राजा के जरिए उनकी हत्या करवा दी थी. हत्याकांड के आरोपी अब्दुल रऊफ उर्फ दाउद मर्चेंट को सेशन कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी.
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