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हिंदी सिनेमा की जानी मानी एक्ट्रेस बेबी नाज 60–70 के दशक की लोकप्रिय चाइल्ड आर्टिस्ट रही हैं. अपनी मासूमियत और नैचुरल एक्टिंग से उन्होंने कई हिंदी फिल्मों में लोगों का दिल जीता. राजेश खन्ना की फिल्म ‘सच्चा झूठा…और पढ़ें
एक्टिंग से साथ सिगिंग में भी माहिर 20 अगस्त 1944 को मुंबई में जन्मी नाज ने बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट फिल्मी दुनिया में कदम रखा. महज चार साल की थीं, लेकिन पर्दे पर अदाकारी ऐसी की पूरे एक दशक तक बेबी नाज ने हिंदी सिने जगत की टॉप बाल कलाकार के तौर पर राज किया.
गरीबी ने बना दिया एक्ट्रेस
आर्थिक तंगी की वजह से उनकी मां ने उन्हें बहुत कम उम्र में ही फिल्मों में काम के लिए भेज दिया. 1954 में आर.के. फिल्म्स की बूट पॉलिश में उनकी भूमिका ने उन्हें खास पहचान दिलाई. इस फिल्म में उन्होंने एक अनाथ लड़की की भूमिका निभाई, जिसे दर्शकों ने दिल खोलकर सराहा. कौन भूल सकता है आत्मविश्वास से लबरेज एक बाल कलाकार का झूमकर गाना – मुट्ठी में है तकदीर हमारी, हमने किस्मत को बस में किया है. फिल्म इतनी बड़ी थी कि उन्हें और उनके सह-अभिनेता रतन कुमार को कान्स फिल्म फेस्टिवल में विशेष सम्मान भी मिला.
राजेश खन्ना की बहन बनते ही बनी स्टार
कुमारी नाज ने अपने करियर में न सिर्फ एक्टिंग बल्कि डबिंग कलाकार के रूप में भी अपनी खास पहचान बनाई. 1970 के दशक में उन्होंने दक्षिण भारतीय अभिनेत्री श्रीदेवी की हिंदी फिल्मों में आवाज दी, जिनमें हिम्मतवाला, तोहफा, और मवाली में उनकी आवाज को कई लोगों ने सराहा. बचपन जितना संघर्ष से भरा था, वहीं बाद का जीवन पति और बच्चों के साथ अच्छा बीता. उन्होंने अभिनेता सुबिराज से शादी की, जो ग्रेट शोमैन राज कपूर के परिवार से जुड़े थे. शादी के बाद उन्होंने हिंदू धर्म अपनाया और ‘अनुराधा’ नाम रखा. बावजूद इसके, दर्शक उन्हें हमेशा ‘नाज’ कहकर ही बुलाते रहे. वैवाहिक जीवन खुशहाल था, और उनके दो बच्चे हुए. लेकिन बाद में उन्हें लीवर की गंभीर बीमारी हो गई, जिससे उनका निधन हो गया.
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