उत्तर प्रदेश में खाद की किल्लत को लेकर नई रणनीति बनाई गई है। पूर्वांचल पर विशेष फोकस किया गया है। कृषि निदेशालय के अधिकारी पूर्वांचल के जिलों में औचक निरीक्षण करते रहेंगे। किसानों के मोबाइल नंबर के आधार पर रैंडम जांच की जाएगी।
खरीफ सीजन में कृषि विभाग पर्याप्त खाद की उपलब्धता का दावा कर रहा है। पिछले साल से करीब 15 फीसदी अधिक वितरण किया गया है। इसके बाद भी विभिन्न जिलों में किसान खाद के लिए लाइन लगाए रहते हैं। कृषि मंत्री के निरीक्षण में भी यह बात सामने आई कि जिन किसानों के पास खेत नहीं है, वे भी 30 से 40 बोरी खाद खरीदे हुए हैं।
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कृषि निदेशालय से जिलों में पहुंचे अधिकारियों को भी इस तरह की शिकायतें मिली हैं। ऐसे में अब कृषि विभाग ने रणनीति बनाई है कि निरंतर जांच की जाएगी ताकि रबी सीजन में खरीफ की तरह फजीहत न झेलनी पड़े। रबी सीजन में 41 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 17 लाख मीट्रिक टन डीएपी, सात लाख मीट्रिक टन एनपीके और 4.78 मीट्रिक टन एसएसपी के लिए के लिए केंद्र सरकार से मांग की गई है।
समितियों में लगाए अतिरिक्त कार्मिक
प्रदेश की 6,861 प्राथमिक सहकारी समितियां खाद वितरण कर रही हैं। कई स्थानों पर एक सचिव के पास दो से तीन समितियों का कार्यभार है। ऐसे में खाद वितरण करने वाली समितियों पर अन्य समितियों के कार्मिकों को भी लगाया जा रहा है। इस संबंध में निर्देश जारी कर दिया है। प्रदेश में सहकारी समितियों से 10.40 लाख मीट्रिक टन यूरिया का वितरण किया गया है।










