Ganesh chaturthi 2025: हम कोई भी शुभ कार्य प्रारंभ करते हैं तो कहते हैं कि हमने आज इस कार्य का श्री गणेश कर दिया। वरना वक्रतुण्ड महाकाय, सूर्यकोटि समप्रभः. निर्विघ्नं कुरूमे देव सर्वकार्येषु सर्वदा. इसी मंत्र उच्चारण के साथ शुभ एवं धार्मिक कार्य का प्रारम्भ करते हैं.
चाहे वह यज्ञोपवीत संस्कार हो, चाहे विवाह संस्कार हो या कोई अन्य पूजन विशेष. भगवान श्रीगणेश जी को तैंतीस कोटि देवता की पूजा में अग्रस्थान प्राप्त हैं. श्रीगणेश का स्मरण-पूजन करने से समस्त विघ्न-बाधाएं तत्क्षण दूर हो जाती हैं.
वह बड़े ही दयालु और करूणा सिधुं माने जाते हैं. हमें अपने जीवन के सभी प्रकार के विघ्नों के नाश एवं शुचिता व शुभता की प्राप्ति के लिए श्री गणेश जी की उपासना करनी चाहिए.
हर साल भाद्रपद महीने की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश उत्सव का शुभारंभ होता है, इस दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था. यह उत्सव 10 दिन यानि अनन्त चतुर्दशी तक चलता है. ज्ञान के सागर, रिद्धि-सिद्धि के दाता और विघ्नों का नाश करने वाले श्री गणेश इस बार शुभ योगों के साथ खुशियों की कई सौगात लेकर आ रहे हैं.
कब रख सकते हैं गणेश चतुर्थी का व्रत
इस वर्ष गणेश चतुर्थी 3 साल बाद फिर से बुधवार को है. बुधवार को गणेशजी की पूजा खास मानी गई है. इस दिन स्वयं सिद्ध अबूझ मुहूर्त भी है, जो शुभ व श्रेष्ठ में भूमि-भवन-वाहन, सोने-चांदी व आभूषण की खरीदारी करने का श्रेष्ठ समय भी रहेगा.
इस साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरूआत 26 अगस्त को दोपहर 01 बजकर 55 मिनट पर होगी और अगले दिन 27 अगस्त को 03 बजकर 45 मिनट तक रहेगी. वहीं उदयातिथि के आधार पर 27 अगस्त 2025 को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा.
जो लोग गणेश चतुर्थी का व्रत करते हैं, वे 26 अगस्त मंगलवार को व्रत करें. क्योंकि चतुर्थी तिथि को चंद्रमा की पूजा की जाती है, जो 26 अगस्त की रात को होगी. इसलिए गणेश चतुर्थी का व्रत 26 अगस्त को होगा और 27 अगस्त को श्री गणेश जी का घर पर आगमन होगा.
पुराणों के अनुसार, गणेशजी का जन्म दोपहर के समय हुआ था, जिसकी वजह से 27 तारीख को उदिया तिथि दोपहर तक रहने वाली है इसलिए गणेशजी की स्थापना और पूजा पाठ का कार्य 27 अगस्त को होगा.
कब तक रहेगा पूजा का शुभ मुहूर्त
27 अगस्त बुधवार को चित्रा नक्षत्र, शुभ योग, लक्ष्मीनारायण योग, रवि योग बन रहा है. जो गणेशजी की तरह सभी कार्यों को सिद्ध करता है. इन शुभ योग में गणेशजी की पूजा अर्चना करने से सभी दुख व कष्टों से मुक्ति और जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है.
27 अगस्त 2025 को गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 23 मिनट से लेकर दोपहर 02 बजकर 39 मिनट तक है. इस श्रेष्ठ मुहूर्त में आप पूरे मान-सम्मान, हर्षोल्लास और ढ़ोल-नगाडों के साथ गणपति को अपने घर लाकर विराजमान करे, विधि-विधान से पूजा करें. शुभ संयोगों के संगम में निश्चित आपकी मनोकामना पूर्ण होकर धन-सम्पदा और खुशियों का लाभ होगा.
गणेश स्थापना न करने पर क्या करें
किसी वजह से गणेश स्थापना और पूजा न कर पाएं तो पूरे गणेशोत्सव में हर दिन गणपति के सिर्फ तीन मंत्र का जाप करना चाहिए. हर सुबह नहाने के बाद गणेशजी के मंत्रों को पढ़कर प्रणाम कर के ऑफिस-दुकान या किसी भी काम के लिए निकलना चाहिए.
इस से भी पुण्य मिलता है. शास्त्रों के मुताबिक गणपति को तुलसी नहीं चढ़ानी चाहिए और नीले या काले कपड़े भी नहीं पहनें चाहिए. गणेश महोत्सव के दौरान गणेशजी की विधि विधान के साथ पूजा कर 3, 5, 7 या 10 दिन बाद गणपति जी का विसर्जन कर सकते हैं.
अंतिम दिन अनंत चतुर्दशी को जल में प्रतिमा विसर्जित कर ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ‘ के जयघोष के साथ बप्पा को विदाई दे. बप्पा अपने साथ खुशियां लाते हैं और जाते समय सभी दुःख, कष्ट और विघ्न ले जाते हैं.
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