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हिंदी सिनेमा की दुनिया में 90 का दशक रोमांस और म्यूजिकल फिल्मों का दौर था. इसी दौर में 1996 में फिल्म ‘मिस्टर बैचारा’ रिलीज हुई थी. फिल्म में अनोखी जोड़ी और अलग कहानी लोगों ने काफी पसंद की थी. फिल्म में नागार्ज…और पढ़ें

श्रीदेवी उस समय तक हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की सबसे बड़ी एक्ट्रेसेस में से एक मानी जाती थीं. उनकी अदाकारी, कॉमिक टाइमिंग और स्क्रीन प्रेजेंस का कोई जवाब नहीं था. दूसरी ओर साउथ सुपरस्टार नागार्जुन, हिंदी सिनेमा में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे थे. ‘शिवा’ और ‘खुदा गवाह’ जैसी फिल्मों से उन्हें खास पहचान बनाई थी. लेकिन दर्शकों के दिल में अलग जगह बनाने का सपना अभी बाकी था.आज नागार्जुन का बर्थडे है. इस खास मौके पर उनकी इस फिल्म से जुड़ी कुछ खास बातें जानते हैं.
फिल्म में नजर आई थी अनोखी जोड़ी
फिल्म की कहानी हल्की-फुल्की कॉमेडी और भावनाओं से सजी है. नागार्जुन ने फिल्म में एक मासूम, सीधे-सादे युवक अनिल का किरदार निभाया, जो बहुत ही भोला है, ईमानदार है और प्यार करने की कला से बिल्कुल अंजान. दूसरी तरफ श्रीदेवी का किरदार बिल्कुल विपरीत था. वो एक चुलबुली, चंचल और जिंदगी से भरपूर. जब ये दोनों किरदार स्क्रीन पर साथ नजर आए तो उनकी मासूमियत ने लोगों का दिल जीत लिया था. ये अनोखी जोड़ी फैंस के दिल को भा गई थी.

साउथ में कहलाती हैं हिट की गारंटी
फिल्म की कहानी ही नहीं गाने भी हुए हिट
बता दें कि 1989 में उन्होंने राम गोपाल वर्मा का टैलेंट पहचाना और उनके साथ फिल्म बनाई थी. राम गोपाल वर्मा ने इससे पहले कोई फिल्म निर्देशित नहीं की थी. उस समय नागार्जुन अपने करियर के चरम पर थे और उनके पास कई सफल फिल्में थीं, लेकिन उन्होंने राम गोपाल वर्मा के अनोखे विचार पर भरोसा दिखाया. इस फिल्म का नाम था ‘शिवा’, यह एक एक्शन-ड्रामा फिल्म थी जो एक छात्र नेता के जीवन पर आधारित थी. फिल्म की कहानी, उसका निर्देशन और नागार्जुन का दमदार अभिनय इतना प्रभावशाली था कि इसने तेलुगु सिनेमा में एक नया ट्रेंड शुरू कर दिया. ‘शिवा’ तेलुगु सिनेमा के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुई. इस फिल्म ने नंदी अवॉर्ड में उस साल दो पुरस्कार पाए थे. इस फिल्म के हिंदी रीमेक से नागार्जुन ने बॉलीवुड में कदम रखा था. राम गोपाल वर्मा ने इसके बाद कई यादगार फिल्में बनाईं. उन्हें ‘कंपनी’, ‘सत्या’, ‘शूल’, ‘रंगीला’ जैसी यादगार फिल्में देने के लिए जाना जाता है.