PM Modi China Visit Live: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार (30 अगस्त) शाम चीन के तियानजिन पहुंचे. वैश्विक व्यापार में उथल-पुथल और बदलते गठबंधनों के बीच यह उनकी सात साल बाद की पहली चीन यात्रा है.
PM मोदी का यह दौरा उस समय हो रहा है जब दोनों देशों ने कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने और चीनी नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा बहाल करने जैसे कदम उठाकर संबंधों को सामान्य करने की कोशिशें तेज की हैं.
शी जिनपिंग से मुलाकात पर निगाहें
रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय बैठक करेंगे. यह अगले दो दिनों में होने वाली उनकी कई मुलाकातों में से सबसे अहम मानी जा रही है. लगभग पाँच साल से चले आ रहे सीमा पर सैन्य गतिरोध के बीच यह बातचीत रिश्तों में आई हालिया प्रगति को और मज़बूत करने का अवसर होगी. सूत्रों का कहना है कि मोदी इस बैठक में दीर्घकालिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से रिश्तों को आगे बढ़ाने का संदेश देंगे.
म्यांमार नेता से संभावित बातचीत
तियानजिन में मोदी की पहली दिन की बैठकों में म्यांमार के कार्यवाहक राष्ट्रपति और सैन्य प्रमुख मिन आंग ह्लाइंग के साथ संभावित वार्ता भी शामिल है. 2021 में सेना द्वारा सत्ता पर कब्ज़े के बाद से भारत और म्यांमार के बीच उच्च-स्तरीय संपर्क सीमित रहा है. थाईलैंड में बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के दौरान हुई बातचीत के बाद यह मोदी और म्यांमार नेता की इस वर्ष दूसरी मुलाकात होगी. माना जा रहा है कि मोदी समावेशी और विश्वसनीय चुनावों की ज़रूरत पर ज़ोर देंगे और जातीय हिंसा झेल रहे देश में लोकतंत्र बहाली का संदेश देंगे.
भारत-म्यांमार रिश्तों की अहमियत
म्यांमार पश्चिमी देशों से अलग-थलग पड़ चुका है, लेकिन भारत और चीन दोनों के साथ उसने मज़बूत रिश्ते बनाए रखे हैं. भारत की म्यांमार के साथ 1600 किलोमीटर लंबी सीमा है और सीमा पार उग्रवाद की चुनौती से निपटने के लिए भारत का म्यांमार की सेना के साथ सहयोग बनाए रखना अनिवार्य है.
व्यापारिक सहयोग पर होगी चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक में व्यापार और आर्थिक सहयोग मुख्य विषय रहेगा. मोदी निष्पक्ष व्यापार साझेदारी की ज़रूरत पर बल देंगे और दुर्लभ मृदा, उर्वरक और उपकरण जैसे अहम क्षेत्रों में चीन की भूमिका पर चर्चा करेंगे. हाल ही में चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को आश्वासन दिया था कि चीन इन वस्तुओं के निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में ढील देगा. साथ ही, दोनों देशों के बीच सीधी हवाई सेवा फिर से शुरू करने पर भी सहमति बनने की उम्मीद है.
आतंकवाद पर सख्त रुख
मोदी अपनी बैठक में आतंकवाद के मुद्दे को भी उठाने वाले हैं. हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत की ओर से सीमा पार आतंकवाद पर चिंता जताई जाएगी. यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत और अमेरिका के बीच रिश्ते दशकों के सबसे निचले स्तर पर हैं. ऐसे में मोदी की यह चीन यात्रा सिर्फ SCO शिखर सम्मेलन तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत-चीन संबंधों को नई दिशा देने और क्षेत्रीय राजनीति में संतुलन साधने की कोशिश भी है.