देशभर के पुलिस थानों में काम न कर रहे या गायब सीसीटीवी कैमरों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। इसके तहत एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर मामले में दायर स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर कोर्ट आज सुनवाई करेगा। इस मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ करेगी। इस याचिका में पुलिस हिरासत में हो रही मौतों और मानवाधिकार उल्लंघनों पर चिंता जताई गई है। कोर्ट ने बीते चार सितंबर को एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा था कि इस साल के पहले सात से आठ महीनों में पुलिस हिरासत में 11 मौतें हुई हैं। ऐसे में सीसीटीवी कैमरों की गैर-मौजूदगी गंभीर मुद्दा है।
कोर्ट के इस फैसले के बाद बात अगर पिछले फैसले की करें तो 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं ताकि मानवाधिकार हनन को रोका जा सके। इसके बाद दिसंबर 2020 में कोर्ट ने केंद्र सरकार को सीबीआई, ईडी और एनआईए जैसे जांच एजेंसियों के दफ्तरों में भी सीसीटीवी और रिकॉर्डिंग उपकरण लगाने का निर्देश दिया था।
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कैमरे कहां-कहां लगाने थे?
बता दें कि कोर्ट के पिछले आदेश के अनुसार हर पुलिस स्टेशन के प्रवेश और निकासी द्वार, मुख्य गेट, लॉकअप, कॉरिडोर, लॉबी, रिसेप्शन और लॉकअप के बाहर के हिस्से में सीसीटीवी कैमरे लगाना जरूरी है। इसके अलावा कि कैमरों में नाइट विजन (रात में दिखने की क्षमता) और ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग दोनों होनी चाहिए। इसके साथ ही रिकॉर्डिंग कम से कम एक साल तक स्टोर करने की सुविधा होनी चाहिए।
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समझिए अभी क्यों चर्चा में आया मामला?
सुप्रीम कोर्ट ने एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर मामले में स्वतः संज्ञान जनहित याचिका दर्ज की है। गौरतलब है कि जिस मीडिया रिपोर्ट को कोर्ट ने आधार बनाया है उसमें बताया गया कि देश के कई पुलिस थानों में अभी भी सीसीटीवी कैमरे या तो नहीं लगे हैं या फिर काम नहीं कर रहे हैं, जिससे पुलिस हिरासत में हो रही मौतों और अमानवीय व्यवहार पर नजर रखना मुश्किल हो जाता है। सुप्रीम कोर्ट अब इस गंभीर मुद्दे पर खुद निगरानी करते हुए सुनवाई करेगा।












