कांग्रेस ने सांसद राहुल गांधी के गढ़ से भले ही हरिओम वाल्मीकि की हत्या को लेकर दलित कार्ड खेला हो, लेकिन पार्टी के रणनीतिकारों का यह दांव अब उल्टा पड़ सकता है। वजह, हरिओम की हत्या में सर्वाधिक दलित और पिछड़ा वर्ग के हमलावर ही शामिल हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार अब तक जेल भेजे गए नौ आरोपियों में से तीन दलित, चार पिछड़ा वर्ग और दो सामान्य वर्ग के हैं। पुलिस की ओर से चिह्नित 15 आरोपियों में भी सात दलित ही हैं।
फतेहपुर निवासी हरिओम की एक अक्तूबर की रात चोर समझकर बर्बरतापूर्ण तरीके से पिटाई कर दी गई, जिससे उनकी मौत हो गई। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ ही कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पत्र जारी कर हरिओम की हत्या पर नाराजगी जताई और इसे दलितों के अत्याचार से जोड़ा। देखते ही देखते मामले ने तूल पकड़ लिया। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने फतेहपुर जाकर पीड़ित परिवार से मुलाकात कर संदेश देने का प्रयास किया कि कांग्रेस दलितों के साथ खड़ी है। प्रदेश सरकार पर दलितों के उत्पीड़न का आरोप मढ़ा।
हरिओम की हत्या में कांग्रेस ने दलित कार्ड उछाला, तो पुलिस प्रशासन भी सफाई देने के लिए आगे आया। पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह ने मंगलवार रात करीब 10 बजे प्रेस कान्फ्रेंस बुलाई और सफाई दी कि वारदात में सभी वर्गों के लोग शामिल थे। इस घटना को जाति से न जोड़ा जाए। कांग्रेस ने दलित कार्ड खेलकर जो राजनीति फायदा लेने की कोशिश की, उसमें पुलिस अधीक्षक ने विराम लगाने की कोशिश की है। अब देखना यह है कि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर आगे किस तरह की रणनीति अपनाती है।
अब तक इन आरोपियों की हुई है गिरफ्तारी
लल्ली पासी, आशीष पासी, सहदेव पासी, सुरेश गुप्ता, विपिन मौर्या, विजय कुमार मौर्या, सुरेश कुमार मौर्या, शिवप्रसाद अग्रहरि व वैभव सिंह को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। मामले में मृतक हरिओम के पिता गंगादीन की तहरीर पर पुलिस ने वैभव, अखिलेश व अज्ञात के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया है।












