रोते-रोते बेहोश हुईं गीता
पति संजय की मौत पर मेडिकल कॉलेज में पत्नी गीता के साथ ही अन्य परिजन रोकर बेहाल थे। परिवार की महिलाएं गीता को संभाल रही थीं। रह-रहकर वह बेहोश हो जातीं। पानी की छींटे मुंह पर डालकर होश में लाया जाता। दोपहर करीब 12 बजे वह अचानक बदहवास हो गईं। पानी की छींटे मारने पर भी नहीं उठीं तो परिवार के लोग गोद में उठाकर इमरजेंसी की ओर दौड़ पड़े। इमरजेंसी में चिकित्सकों ने गीता का इलाज किया। इसके बाद उन्हें होश आया।
मेला जाने को तैयार थे बच्चे, तभी पहुंची मनहूस खबर
बच्चे मेले में जाने की तैयारी कर रहे थे, इसी दौरान संजय के बच्चों को पिता की मौत की खबर मिली। संजय की भाभी माया ने बताया कि उसके बच्चे राजा, गिरिजेश, पूनम और काजल, संजय की पत्नी गीता, उनके बच्चे मानसी और रिया तथा छोटे देवर दीपू की पत्नी रीता, उनके बच्चे कमल और रेशमा, कार्तिक पूर्णिमा मेले में जाने की तैयारी कर रहे थे। उसी समय ग्राम प्रधान ने संजय की मौत की सूचना दी।
विधायक ने डीआईजी से की बात
बलरामपुर के सदर विधायक पल्टूराम ने मामले को लेकर आरपीएफ के डीआईजी से बात की। डीआईजी ने कार्रवाई का भरोसा दिया। अवध केसरी सेना के नीरज सिंह, नील ठाकुर ने भी मृतक के परिजनों से मुलाकात कर न्याय की मांग की।
बिलखती मासूम… मेरे पापा को मार डाला
मेडिकल कॉलेज के मॉर्च्युरी के बाहर 10 साल की मानसी को रोते देखकर हर किसी की आंख नम हो गईं। वह चीखते हुए कह रही थी कि मेरे पापा को घर से ले जाकर आरपीएफ वालों ने मार डाला। अब क्या होगा। परिजन उसे समझाते रहे। उसके साथ छोटी बहन रिया (6) भी रोती रही।
![]()















