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70s Hit Classic Bollywood Number: इस धुन में न सिर्फ संगीत है, बल्कि एक फिलॉसफी भी है… कि नाम, शोहरत, और जिंदगी… सब कुछ पल दो पल का ही सफर है. इस गाने को पांच दशक बीत चुके हैं, मगर इस क्लासिक की मिठास आज भी उतनी ही ताजा है, जितनी उस वक्त थी, जब सिनेमा हॉल में इसे सुनकर लोग खामोश हो गए थे.
नई दिल्ली. वो गाना नहीं, एक एहसास है… जिसने वक्त को थाम लिया. सत्तर के दशक की उस ब्लॉकबस्टर फिल्म से जुड़ा ये नगमा आज भी सुनने वालों के दिल में वही सुकून, वही कसक जगा देता है. इसे सुनते ही जैसे जिंदगी के सफर की थकान मिट जाती है. यही वजह है कि करोड़ों लोगों की तरह देश के सबसे शांत और दृढ़ क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी ने भी इसे अपना पसंदीदा माना है. उन्होंने अपने जीवन के सबसे भावनात्मक पल में इसी गीत को चुना… वो पल जब उन्होंने क्रिकेट को अलविदा कहा.

1976 में रिलीज हुई यश चोपड़ा की क्लासिक फिल्म ‘कभी कभी’ का आइकॉनिक गीत ‘मैं पल दो पल का शायर हूं’ आज भी दिलों पर राज करता है. साहिर लुधियानवी के भावुक बोल, खय्याम की संगीतमय धुन और मुकेश की आवाज ने इसे अमर बना दिया.

यह गीत न सिर्फ संगीत प्रेमियों का चहेता है, बल्कि पूर्व भारतीय कप्तान एमएस धोनी का भी फेवरेट है. 2020 में रिटायरमेंट अनाउंसमेंट वीडियो में धोनी ने इसे बैकग्राउंड में बजवाकर लाखों को भावुक कर दिया था. धोनी ने 2019 में एक इवेंट में खुद इसे गाया भी था.

फिल्म ‘कभी कभी’ 27 फरवरी 1976 को रिलीज हुई, जो यश राज फिल्म्स की पहली ब्लॉकबस्टर साबित हुई. स्टोरी दो पीढ़ियों के प्रेम की है. अमित (अमिताभ बच्चन) और पूजा (राखी) के अधूरे इश्क के बाद, पूजा की शादी विजय (शशि कपूर) से हो जाती है.

सालों बाद, पूजा-विजय के बेटे विक्की (ऋषि कपूर) और अंजलि (वहीदा रहमान)-अमित की बेटी स्वीटी (नासिम) के बीच नया प्रेम फलता है, जो पुरानी यादें ताजा कर देता है.

फिल्म का कांसेप्ट साहिर लुधियानवी की एक कविता से प्रेरित था, जो उनकी अमृता प्रीतम से अधूरी मोहब्बत को दर्शाती है.

‘कभी कभी’ ने बॉक्स ऑफिस पर 40 मिलियन कमाए, 1976 की आठवीं सबसे ज्यादा कमाई वाली हिंदी फिल्म बनी. इस फिल्म के संगीत ने इसे अमर बनाया. टाइटल सॉन्ग ‘कभी कभी मेरे दिल में’ ने बिनाका गीतमाला में टॉप किया और मुकेश को मरणोपरांत फिल्मफेयर बेस्ट प्लेबैक सिंगर अवॉर्ड मिला.

फिल्म को 24वें फिल्मफेयर में 13 नॉमिनेशन मिले, जिसमें बेस्ट फिल्म, डायरेक्टर (यश चोपड़ा), एक्टर ( अमिताभ बच्चन) शामिल थे. शूटिंग कश्मीर और मुंबई में हुई, जहां पूरी कास्ट फैमिली स्टाइल में रही.

49 साल बाद भी यह गीत रेलेवेंट है. अमिताभ के शायर किरदार की उदासी आज भी युवाओं को छूती है.

साहिर के बोल- ‘मुझसे पहले कितने शायर आए और आकर चले गए’ जीवन की सच्चाई बयां करते हैं. यह गीत साबित करता है कि अच्छी कहानियां समय की कसौटी पर टिकती हैं.
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