बताया गया कि सुबह घर के लोग सो कर जगे तो रोजअली का कमरा बंद था। काफी देर होने के बाद भी अंदर से कोई हलचल न हुई। मां को चिंता हुई तो बेटी राबिया को देखने के लिए कहा। राबिया ने कमरे में झांककर देखा तो बेड पर लाशों का ढेर लगा था।
भैया-भाभी और तीन बच्चों की लाशें देख उसकी चीख निकल गई। शोर सुनकर आसपास के लोग भी जमा हो गए। देखते ही देखते लोगों की भीड़ जुट गई। ग्रामीणों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
सूचना पर सीओ भारत पासवान, थाना प्रभारी अखिलेश पांडेय और पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण करके जानकारी जुटाई। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
मां ने बताया कि रोजअली परिवार के साथ मुंबई में रहता था। वह पांच दिन पहले ही पत्नी व बच्चों के साथ घर लौटा था। मां बिलखते हुए यही कहती रही कि मासूम बच्चों की क्या गलती थी, उन्हें किस बात की सजा मिली। उन्होंने तो अभी ठीक से दुनिया भी नहीं देखी थी। इससे पहले ही उनकी जान ले ली।
![]()

















