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Sunny Deol Blockbuster Movies : बॉलीवुड में म्यूजिक अहम हिस्सा है. म्यूजिक के बिना हिंदी सिनेमा में किसी फिल्म की कल्पना नहीं की जा सकती है. म्यूजिक भी दिल से निकलता है. जो म्यूजिक दिल से नहीं निकलता, वो म्यूजिक मेकिंग कहलाता है. म्यूजिक को बनाया नहीं जा सकता, वो दिल से निकलकर रूह में उतर जाता है. बॉलीवुड की दो फिल्मों के साथ ऐसा ही हुआ. प्रोड्यूसर ने 15 दिन का समय गाने की धुन बनाने के लिए दिया था. 15 दिन में म्यूजिक तैयार नहीं हुआ. फिर ऐसा चमत्कार हुआ कि तीनों ही गाने ब्लॉकबस्टर निकले और दोनों ही फिल्में ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर साबित हुईं. इसे संयोग ही कहा जाएगा कि ये दोनों फिल्में एक्शन हीरो सनी देओल की हैं.
किसी ब्लॉकबस्टर फिल्म का म्यूजिक जितना हमें कर्णप्रिय लगता है, उसके बनाने में उतनी ही मेहनत संगीतकार-गीतकार और यूनिट के अन्य सदस्यों की होती है. कई बार तो अच्छे से अच्छे गानों की धुन एक सेकंड में मन में आती है तो कई बार संगीतकार हफ्ते-हफ्तेभर इंतजार करता रहता है लेकिन अच्छी सी धुन नहीं बन पाती. आज हम उन दो फिल्मों की चर्चा करेंगे जिनके मोस्ट पॉप्युलर सॉन्ग 15 दिन में तैयार नहीं हो पाए थे. फिर ऐसा चमत्कार हुआ कि दिल के कोने से अच्छी सी धुन निकली. इस धुन पर बने गाने ने इतिहास रच दिया. दोनों ही फिल्में ब्लॉकबस्टर निकलीं.

सबसे पहले बात करते हैं गदर-एक प्रेम कथा फिल्म का जिसका डायरेक्शन अनिल शर्मा ने किया था. अनिल शर्मा के पिता एस्ट्रोलॉजिस्ट थे. वो मथुरा के रहने वाले थे. मथुरा से जाकर मुंबई में बस गए थे. अनिल शर्मा कश्मीरों पंडितों के पलायन पर एक फिल्म बनाना चाहते थे. उनके साथी शक्तिमान तलवार जब कहानी लेकर पहुंचे तो उसे देखकर उन्होंने क्रॉस-बॉर्डर लव स्टोरी बनाने का फैसला किया. फिल्म का नाम रखा : गदर एक प्रेम कथा. 15 जून 2001 को रिलीज हुई गदर फिल्म में म्यूजिक के लिए उन्होंने उत्तम सिंह से संपर्क किया. उत्तम सिंह ने पैसे ले लिए. एक माह से भी ज्यादा वक्त हो गया था, एक भी गाना तैयार नहीं कर पाए थे.

संगीतकार उत्तम सिंह ने अपने एक इंटरव्यू में गदर: एक प्रेम कथा के म्यूजिक बनने की कहानी शेयर की थी. उन्होंने इंटरव्यू में बताया था, ‘अनिल शर्मा ने मुझे गदर की स्टोरी सुनाई. बोले कि पहला गाना जल्दी चाहिए. हर दूसरे दिन फोन आ जाता था. इस तरह से 15 दिन निकल गए. एक सिंगल नोट भी तैयार नहीं हुआ था. गाना बनाया नहीं जाता, वो तो अपने आप आता है. गाना अगर बनाया गया तो वह मैकेनिकल हो गया. सुबह का समय था. सर्दियों के दिन थे. मैं वॉक पर जा रहा था. खुद को मैंने जीभर कोसा. खुद से कहा कि अगर गाना नहीं बनाना तो प्रोड्यूसर्स के पैसे लौटा दो. फिल्म छोड़ दो. फिर मैंने खुद से कहा कि अगर कोई फॉक गाएगा तो क्या गाएगा. अचानक ‘बागों में फिर झूले पड़ गए, पक गईं मिठियां अमियां..कि घर आजा परदेसी, तेरी मेरी एक जिंदड़ी’ की धुन आई. मैंने जल्दी से लौटकर घर आया. रिकॉर्डर में धुन रिकॉर्ड की. मेरे आंखों में आंसू आ गए. भगवान का शुक्रिया अदा किया. कहा कि ये तेरी मेहरबानी है. मैंने तत्काल अनिल शर्मा को फोन किया. जब तक वो आए, तब तक मैंने ‘उड़ जा काले कौआ तेरा मुंह बिच खंड पावा…’ की सारंगी वाली धुन तैयार कर ली. अनिल शर्मा को यह धुन उतनी पसंद नहीं आई थी. मैंने कहा कि गाना लिखवाएंगे तो अच्छा बनेगा.’
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उत्तम सिंह ने आगे बताया, ‘डायरेक्टर अनिल शर्मा गीतकार आनंद बख्शी को नहीं लेना चाहते थे. उन्होंने कई गाने आनंद बख्शी से लिखवाए थे लेकिन कोई गाना चल नहीं पाया था. हम लोग गुलजार साहब के पास गए. वो बिजी थे. फिर मैंने आनंद बख्शी के पास जाने की सलाह दी. अनिल शर्मा मान गए. मैंने उन्हें स्टोरी सुनाई तो वो बोले कि तुम डायरेक्ट कर रहे हो क्या? सारंगी की धुन पर गीत के बोल लिखने का सजेशन अनिल शर्मा का था. सात दिन का समय आनंद बख्शी ने लिया था लेकिन दो दिन बाद ही बुला लिया. गीत के बोल लिखाए. ‘उड़ जा काले….. गाना सुनते ही अंदर ही अंदर अजीब सी तपिश महसूस हुई. यह गाना आप देखेंगे कि हर समय फिल्म में अलग-अलग मौकों पर गाया गया है. यह एक फॉक सॉन्ग बन गया. सुख-दुख हर घड़ी में यह गाना फिल्म में सुनाई देता है. पूरी फिल्म सिर्फ एक गाने पर बेस्ड है.’

अनिल शर्मा ने फिल्म की कहानी सनी देओल को ध्यान में रखकर लिखी थी. वो सनी देओल को फिल्म की कहानी सुनाने के लिए हैदराबाद गए थे. दिलचस्प बात यह है कि हैदाराबाद में रात में तीन घंटे तक कहानी सनी देओल ने कहानी सुनी थी. कहानी सुनने के बाद इशारों-इशारों में कहा था कि क्या वो इस फिल्म में शामिल हो सकते हैं. यह इशारा अनिल शर्मा समझ गए थे. करीब 18.5 करोड़ के बजट में बनी गदर एक प्रेम कथा ने वर्ल्डवाइड 133 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया था. यह एक ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई थी. यह भारत की सबसे ज्यादा देखी फिल्म की लिस्ट में तीसरे नंबर पर है.

13 जून 1997 को रिलीज हुई बॉर्डर फिल्म के सिग्नेचर सॉन्ग ‘संदेशे आते हैं’ को भला किसने नहीं सुना है. हर तीज-त्योहार पर हमें यह गाना सुनाई देता है. इस गाने को सुनते ही दिल में सेना के जवानों, उनके परिवार से जुड़े ख्याल मन में उमड़ने-घुमड़ने लगते हैं. इस फिल्म ने देशभक्ति का एक अलग ही रंग पूरे देश में दिखाया था. जेपी दत्ता ने फिल्म के डायरेक्टर-प्रोड्यूसर थे. कहानी-स्क्रीनप्ले भी उन्होंने ही लिखा था. बॉर्डर फिल्म की कहानी लोंगेवाला युद्ध पर बेस्ड थी. सनी देओल, जैकी श्रॉफ, सुनील शेट्टी, अक्षय खन्ना, पुनीत इस्सर और सुदेश बेरी लीड रोल में नजर आए थे. फिल्म का सबसे पॉप्युलर सॉन्ग ‘संदेशे आते हैं’ को पहले लिख गया था. बाद में इसकी धुन तैयार की गई थी.

बॉर्डर फिल्म में अनु मलिक ने म्यूजिक दिया था. संगीतकार अनु मलिक ने ‘संदेशे आते हैं’ गाने के तैयार होने का दिलचस्प किस्सा अपने एक इंटरव्यू में शेयर किया था. उन्होंने बताया था, ‘जावेद अख्तर ने गाना पहले ही लिख लिया था. डायरेक्टर जेपी दता ने एक माह का समय धुन तैयार करने के लिए दिया था. गाना 7 मिनट लंबा था. एक दिन जावेद अख्तर, जेपी दत्ता मेरे घर आए. मेरे कमरे में दाखिल हुए और कुंडी लगा दी. जावेद अख्तर ने गाना लिखवाया. 14 पेज भर गए थे. जब उन्होंने गाने की लाइन ‘ऐ गुजरने वाली हवा बता, मेरा इतना काम करेगी क्या’ लिखवाई तो मैंने इसे ट्यून दी. फिर अचानक चमत्कार हुआ और मैंने ‘संदेशे आते हैं, हमें तड़पाते हैं….’ की ट्यून बोल दी. जावेद साहब सुनकर खुशी से उछल पड़े. उन्होंने कैसेट पर ही मेरे ऑटोग्राफ लिए.’

बॉर्डर फिल्म जेपी दत्ता ने अपने भाई की याद में बनाई थी जो कि इंडियन एयरफोर्स में पायलट थे. 1987 में एक मिग दुर्घटना में उनकी मौत हो गई थी. डायरी में लिखे अनुभवों के आधार पर जेपी दत्ता ने यह फिल्म बनाई थी. फिल्म उन्हीं को समर्पित की गई है. 1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ था. उसी कहानी को आधार बनाकर बॉर्डर फिल्म बनाई गई. फिल्म को तीन नेशनल अवार्ड, चार फिल्म फेयर अवार्ड मिले थे. फिल्म ने करीब 39 करोड़ की कमाई की थी. यह 1997 में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी.
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