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Bollywood Cult Hit Movies : 80 के दशक में देश में पढ़े-लिखे युवाओं की संख्या में बेहताशा बढ़ोतरी हो रही थी. नौकरियां उस पैमाने पर नहीं थीं. बेरोजगारी बहुत बड़ा मुद्दा बनकर उभरी. बॉलीवुड के कई राइटरों की नजर इस ज्वलंत सब्जेक्ट पर पड़ी. बेरोजगारी और युवाओं को ध्यान में रखकर फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखी जाने लगी. 7 साल के अंतराल में ऐसी ही तीन फिल्में रिलीज हुईं जिनकी कहानी लीक से हटकर थी. तीनों ही फिल्मों के केंद्र में युवा और उनके सपने थे. बॉक्स ऑफिस पर तीनों ही फिल्में सफल भी रहीं. आज इन फिल्मों को कल्ट हिट का स्टेटस मिल चुका है. ये फिल्में कौन सी थीं, आइये जानते हैं…
कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जिन्हें समय भी अपने बंधन में नहीं बांध पाता. जब भी इन फिल्मों को देखेंगे, हर बार नई सी लगेंगी. ऐसी ही तीन फिल्में 7 साल के अंतराल में सिनेमाघरों में रिलीज हुई थीं. तीनों ही फिल्मों की स्टोरी युवा पीढ़ी, उनके सपनों के इर्द-गिर्द घूमती है. तीनों फिल्मों की कहानी इतनी शानदार थी कि युवाओं ने सबसे ज्यादा इन्हें पसंद किया. आज ये फिल्में कल्ट का स्टेटस ले चुकी है. इन फिल्मों को देखने वाली एक खास फैन फॉलोइंग है. ये तीन फिल्में थीं : अर्जुन, गर्दिश और जो जीता वही सिकंदर.

सबसे पहले बात करते हैं 1985 में आई अर्जुन फिल्म की जिसका डायरेक्शन राहुल रवैल ने किया था. सनी देओल-डिंपल कपाड़िया और अनुपम खेर लीड रोल में थे. परेश रावल-अन्नू कपूर की छोटी लेकिन प्रभावी भूमिकाएं थीं. बेताब फिल्म की कामयाबी के बाद राहुल रवैल-जावेद अख्तर ने सनी देओल को लेकर एक और फिल्म बनाने का फैसला लिया था. दिलचस्प बात यह है कि अर्जुन फिल्म के जरिये बॉलीवुड में दूसरे एंग्री यंगमैन का जन्म हुआ.

अर्जुन फिल्म ने सनी देओल को एक्शन हीरो बनाया. फिल्म की कहानी, स्क्रीनप्ले, डायलॉग, गाने जावेद अख्तर ने लिखे थे. इस फिल्म की गिनती आज कल्ट फिल्मों में होती है. इसी फिल्म में छाते वाले सीन है जिसे हिंदी सिनेमा का कालजयी सीन माना जाता है. यह कालजयी सीन 3 दिन में शूट हुआ था. दो हजार लोगों के हाथ में दो-दो छाते पकड़ाए गए थे.
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फिल्म की कहानी का आइडिया जावेद अख्तर को होटल में आधी रात को आया था. उन्होंने टॉयलेट पेपर पर फिल्म की स्टोरी लिखी थी. जावेद अख्तर को यह आइडिया न्यूज पेपर के एक आर्टिकल को पढ़कर आया था. दरअसल, संडे टाइम्स में एक आर्टिकल छपा था जिसमें डोंगरी गैंग और पठान गैंग के बारे में लिखा था. डोंगरी गैंग को उन दिनों अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम ऑपरेट करता था. वह बेरोजगार युवाओं को काम देने के बहाने अपनी गैंग में शामिल करता था. फिल्म की कहानी अर्जुन मारवंकर नाम के बेरोजगार युवक की है. अपने घर-परिवार को बेहतर जिंदगी देने का सपना पाले विजय कब क्राइम की दुनिया में आ जाता है, उसे पता ही नहीं चलता.

युवाओं की थीम पर 90 के दशक में एक फिल्म आई जिसमें आमिर खान, आयशा झुल्का, दीपक तिजोरी, मामिक सिंह और कुलभूषण खरबंदा नजर आए थे. फिल्म का नाम था ‘जो जीता वही सिकंदर’ जिसे 22 मई 1992 को रिलीज किया गया था. फिल्म का डायरेक्शन आमिर खान के ममेरे भाई मंसूर खान ने किया था. मंसूर खान इससे पहले आमिर खान की 1988 में आई डेब्यू फिल्म ‘कयामत से कयामत तक’ का निर्देशन कर चुके थे. फिल्म को आमिर खान के मामा नासिर हुसैन ने प्रोड्यूस किया था. फिल्म में जतिन-ललित का म्यूजिक था. फिल्म का एक गाना ‘पहला नशा-पहला खुमार’ आज भी उतना ही पॉप्युलर है. फिल्म का बजट करीब 2 करोड़ रुपये का था. मूवी ने वर्ल्डवाइड 7 करोड़ का कलेक्शन किया था. यह एक हिट फिल्म साबित हुई थी. 1992 में कमाई के मामले में यह फिल्म 12वें नंबर पर थी.

‘जो जीता वही सिकंदर’ की कहानी मंसूर खान ने ‘कयामत से कयामत तक’ के पहले लिख ली थी. फिर अपने पिता के कहने पर पहले ‘कयामत से कयामत तक’ को पूरा किया. दीपक तिजोरी इसमें निगेटिव रोल में नजर आए थे. अक्षय कुमार इस फिल्म के लिए ऑडिशन देने पहुंचे थे लेकिन उन्हें रिजेक्ट कर दिया गया था. अक्षय कुमार-आमिर खान की आज तक कोई फिल्म नहीं आई है. आमिर खान के बड़े भाई के रोल में मामिक सिंह नजर आए थे लेकिन उनका करियर बॉलीवुड में नहीं बन पाया. यह फिल्म एक कल्ट क्लासिक मानी जाती है क्योंकि इसकी थीम स्पोर्ट्स की है. यह फिल्म युवाओं को मेहनत करने की प्रेरणा देती है. मूवी को बेस्ट फिल्म और बेस्ट एडिटिंग का फिल्म फेयर अवॉर्ड मिला था. इस फिल्म को आज भी युवा देखना पसंद करते हैं. अपने पर्सनल लाइफ को इससे जोड़ते हैं.

कहते हैं इंसान परिस्थितियों का दास होता है. वही करने के लिए मजबूत होता है जो परिस्थितियां उससे करवाती हैं. कई चीजें इंसान के हाथ में नहीं होती. इंसान कुछ ऐसा कर गुजरता है जिसे वह करना ही नहीं चाहता. 1993 में ऐसे एक पढ़े-लिखे युवक की कहानी पर्दे पर आई थी जो अपने परिवार को बेहतर जिंदगी देना चाहता था लेकिन हालात के आगे मजबूर हो गया और क्राइम की दुनिया में आ गया. 10 सितंबर 1993 को डायरेक्टर प्रियदर्शन की फिल्म ‘गर्दिश’ आई थी. गर्दिश मूवी उस समय बॉलीवुड में बन रही मसाला फिल्मों से बिल्कुल अलग थी. फिल्म के कहानी और सीन बहुत ही रियलिस्टिक थे.

गर्दिश फिल्म में जैकी श्रॉफ, डिंपल कपाड़िया, अमरीश पुरी, मुकेश ऋषि लीड रोल में नजर आए थे. मुकेश ऋषि ने विलेन बिल्ला जिलानी की भूमिका निभाई थी. यह ब्लॉकबस्टर मलायलम फिल्म किरीदम का रीमेक थी जिसमें मोहनलाल नजर आए थे. हिंदी दर्शकों के हिसाब से प्रियदर्शन ने फिल्म की कहानी लिखी थी. फिल्म का म्यूजिक औसत ही था.
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