अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के सांस्कृतिक शिक्षा केंद्र (सीईसी) परिसर में लगे नौ दिवसीय उर्दू पुस्तक मेले में किताबें खरीदने के लिए शौकीनों की भीड़ उमड़ी। देशभर के प्रकाशकों ने 51 स्टाॅल लगाए। यह मेला नौ दिन तक चलेगा। हर स्टाॅल पर किताबों के शौकीनों के कदम ठहर जाते। हर स्टाॅल पर देश-दुनिया के उर्दू के साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों पर किताबें हैं। धार्मिक पुस्तकें भी हैं। कैलीग्राफी स्टाॅल पर लोगों की भीड़ रही।
मेले का उद्घाटन करने के बाद कुलपति प्रो. नईमा खातून ने कहा कि एनसीपीयूएल के सहयोग से यह उर्दू पुस्तक मेला केवल पुस्तकों का संग्रह नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और बौद्धिक उत्सव है। यह मेला एक बौद्धिक आंदोलन है, जो भाषा, साहित्य, शोध और सामाजिक चेतना को मजबूती देता है।
एनसीपीयूएल के निदेशक डॉ. शम्स इकबाल ने कहा कि यह मेला बौद्धिक विमर्श को बढ़ावा देने वाला मंच है। हिंदी और अंग्रेजी के बाद उर्दू भारत में सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा है, इसलिए इसके प्रोत्साहन के प्रयास सकारात्मक और भविष्यवादी दृष्टि से किए जाने चाहिए।











