धौज गांव निवासी शोएब लंबे समय से अल फलाह यूनिवर्सिटी में नौकरी करता था। इस दौरान उसकी ड्यूटी काफी समय तक ड्यूटी रोस्टर पर भी थी। यहां वह स्टाफ की ड्यूटियां अस्पताल के रोस्टर में लगाता था। इसी दौरान डॉ. उमर से उसकी नजदीकी बढ़ी थीं।
डॉ. उमर की इस दौरान शोएब ने काफी मदद भी की। डॉ. उमर के कहने पर ही शोएब ने उसकी ड्यूटी अधिकतर दूसरी और तीसरी शिफ्ट में ही रखी। दूसरी शिफ्ट यानि दोपहर 2 से 10 और तीसरी शिफ्ट यानि देर रात 10 से 6 बजे वाली शिफ्ट।
आधिकारिक सूत्रों की मानें तो डॉ. उमर हमेशा से ही शाम व रात की शिफ्ट में अल फलाह अस्पताल में ड्यूटी लगवाता था। इस दौरान वह ड्यूटी से अधिकतर नदारद ही रहता था। जब भी कोई इमरजेंसी वाली स्थिति होती तो अस्पताल का स्टाफ कई बार कॉल कर डॉ. उमर को बुलाता था। इसके बावजूद भी वो 5 से 10 मिनट के लिए आता और स्टाफ को हिदायत देकर, इलाज शुरू कराकर वापस अपने क्वार्टर में चला जाता था। इस दौरान शोएब से डॉ. उमर का संपर्क लगातार बढ़ता गया।
30 अक्तूबर को अल फलाह यूनिवर्सिटी परिसर से जम्मू कश्मीर पुलिस ने डॉ. मुजम्मिल को गिरफ्तार किया। उस समय डॉ. उमर यूनिवर्सिटी परिसर में ही मौजूद था। डॉ. मुजम्मिल के गिरफ्तार होते ही डॉ. उमर को अपनी गिरफ्तारी का डर हुआ और तुरंत यूनिवर्सिटी परिसर से बाहर निकल गया। बाहर जाकर उसने शोएब से संपर्क किया। शोएब भी कुछ देर बाद यूनिवर्सिटी से निकलकर डॉ. उमर के पास पहुंचा।
डॉ. उमर ने अपना मोबाइल बंद कर दिया था। साथ ही, उसने शोएब को कहा कि उसे कुछ दिन तक छुपने के लिए यहां से कुछ दूर के इलाके में कोई ठिकाना चाहिए। शोएब ने मदद कर नूंह में अपनी रिश्तेदार अफसाना के घर उसे कमरा दिलाया। आरोप है कि इस दौरान शोएब नूंह तक डॉ. उमर के साथ ही गया था। इसके बाद भी वो लगातार शोएब के संपर्क में रहा और उसके कहे अनुसार उसे मदद करता रहा।












